अवचेतन मन की अद्भुत शक्तियों से हो सकते हैं असंभव कार्य भी संभव

27Oct
*अवचेतन मन की अद्भुत शक्तियां*
*अवचेतन मन के द्वारा हो सकते हैं असंभव कार्य भी संभव*
मानव मस्तिष्क के दो भाग होते हैं। चेतन (conscious mind)और
 अवचेतन( unconscious mind)
जैसा कि हम सभी जानते हैं कि हमारा मस्तिष्क का चेतन मस्तिष्क केवल 10%  कार्य करता  है। जिसके द्वारा हम नियमित कार्य करते हैं ।नौकरी,व्यापार ,सोना ,जागना एवं समस्त दैनिक क्रियाएं करते हैं।
किंतु हमारा 90% भाग अवचेतन मस्तिष्क होता है ,जिसका कोई भी प्रयोग नहीं करता और जो करता है वह विलक्षण बुद्धि का व्यक्ति बन जाता है।
*अवचेतन मन को  कैसे विकसित करें*
अवचेतन मन को विकसित कैसे किया जाए ,जिससे कि हम अपना मनचाहा कार्य कर सकें ।
वास्तव में अवचेतन मन में इतनी अपार शक्तियां हैं कि हम असंभव कार्य भी संभव कर सकते हैं वहां पर आपको उदाहरण देना चाहता हूं योग गुरु रामदेव का। जिन्होंने अध्ययन काल में अपने अवचेतन मन को जागृत किया और आज विलक्षण प्रतिभा के धनी हैं और  वर्तमान समय  में विश्व में एक  ब्राण्ड  हैं।
अवचेतन मन को जागृत करने के लिए तीन शर्त होनी चाहिए ।
*उदाहरण के लिए जैसे कोई गरीब व्यक्ति है ।किसी  दबंग ने उसका घर छीन लिया या बेटी की शादी के लिए रखे गए पैसे चोरी कर लिए। ऐसे व्यक्ति के मन से जो हाय  निकलेगी वह उसके अवचेतन मन से टकराकर निकलेगी और आपने देखा है कि इसी हाय  के कारण चोरी करने वाले व्यक्ति का कुछ ना कुछ अशुभ अवश्य होगा।
*कोई व्यक्ति बहुत अधिक शराब पीता है या गुटखा खाता है और उसे कैंसर हो गया है, उसको डॉक्टर बताते हैं कि अब तेरी आयु 3 महीने या 6 महीने हैं इसलिए इन सब को छोड़ दें। तो उसके मस्तिष्क में अचानक झटका लगता है और वह सीधा अवचेतन मन से टकराता है। उसके कारण वह तुरंत अपनी आदतें बदल सकता है और दीर्घायु प्राप्त कर सकता है ।
*अवचेतन मन को जागृत करने के लिए बार-बार उसको स्मरण कराना होता है और स्मरण कराने का तरीका है वर्तमान काल में अपनी बात कहना।आपने अक्सर सुना होगा कि 100 बार झूठ बोलने पर भी सच हो  जाता  है।
 कई बार वकील झूठे गवाह के आधार पर अपनी मुवक्किल को बचा लेता है ऐसा क्यों होता है बार-बार बार-बार एक ही बात को दोहराने से उसका अवचेतन मन जागृत हो जाता है।
जो भी हम अवचेतन मन से अपनी इच्छाएं पूरी कराना चाह रहे हैं, उस बात को आप सकारात्मक रूप से वर्तमान काल में बोले।
 रात्रि को सोते समय आप 5 मिनट  लेटे हुए अथवा बैठकर  आप अपनी कामनाएं या इच्छाएं हैं उनको (अधिकतम एक समय में दो कामनाएं  हो सकती हैं)  स्मरण करें और प्रातः काल उठने से पहले भी उसी चक्र को पुनः अपनाएं। उस समय ऐसा महसूस करें कि चेतन मस्तिष्क  अवचेतन मस्तिष्क   को संदेश भेज रहा है। आप अपनी इन एक या दो कामनाओं को किसी कागज पर लिखकर अपनी जेब में भी रख लें ,यह जहां कार्य करते हैं, उस कार्यस्थल पर लगा ले ।और जाते ही उसको 2 मिनट  नियमित रूप एकाग्र होकर  बोलें।मन में दृढ़ संकल्प और उस कार्य के प्रति तड़पन का भाव भी आपके मन में होना चाहिए। यदि आपने ऐसा लगातार किया तो आप का इच्छित कार्य कुछ दिनों में पूर्ण होने की संभावना बनेगी। मैं यह नहीं कहता कि कार्य  तुरन्त बन जाएगा। लेकिन उसके लिए आपको उचित राह व  योजना आपके दिमाग में आ जाएंगी। और उस कारण अपनी कामना को पूरा होने के रास्ते प्रशस्त हो जाएंगे।
जापान की एक महिला अचानक अंधी हो गई ।डॉक्टर के पास गई। दो-तीन महीने इलाज चला। डाक्टर्स ने कह दिया कि आंखों की तंत्रिकाएं डैमेज हो चुकी  हैं, उन्होंने कार्य करना बंद कर दिया है ‌इसलिए आप अब कभी देख नहीं सकती।
लेकिन वह महिलाएं हताश नहीं हुई और उसने इसको  चैलेंज के रूप में स्वीकार कर लिया और कहा कि मैं अब स्वयं ही अपनी आंखों को ठीक कर लूंगी ।उसको धार्मिक ग्रंथों का कुछ ज्ञान था और अवचेतन मन के बारे में उनका अध्ययन था।
 वह अब दिन रात इसी कल्पना में खोयी रहती कि मेरी आंखें स्वस्थ हो गई हैं ,मेरी आंखें स्वस्थ हो गई हैं। अब मैं देख सकती हूं ।मैं अब देख रही हूं, मैं देख रही हूं ।
जैसा कि मैंने कहा था कि वर्तमान काल में सकारात्मक सोचिए ।
उसके द्वारा  लगातार अवचेतन को पुश  करने से यह परिणाम निकला  कि महीने 2 -3 महीने में उसको दिखाई देना आरंभ हो गया।
 जितनी आप की कल्पनाएं/ इच्छाएं प्रबल होगीं और उनके अंदर जो आपके मन की तड़पन होगी और जो मन का भाव रहेगा उतनी जल्दी आपके कार्य बनेंगे । 
उस महिला को 3 महीने  के बाद उसकी नेत्र ज्योति आनी शुरू हो गई और वह देखने लगी ‌चार-पांच महीने में पूर्ण रूप से स्वस्थ हो गई ।डॉक्टरों ने उसका पुनः जांच की तो पता चला कि उसकी  आंखों की तंत्रिकाओं को मृत घोषित कर दिया था ।जब  पुनः जीवित हो उठी।एक दूसरा उदाहरण है:
एक युवक को लिखने का शौक था,एक प्रकाशक ने उसकी कहानी प्रकाशित की। कुछ महीने बाद 45000 रूपए रायल्टी मिली।
उस दिन उसने प्रण किया कि एक साल बाद 2 करोड़ का  चैक मिल गया है। उसने एक कागज का एक बड़ा से चैक पर दो करोड़ रुपए लिखकर अपने शयनकक्ष में सामने दीवार पर टांग दिया। और प्रतिदिन सोने से पहले  उस पर दृष्टि गड़ाएं अपने अवचेतन मन को जागृत करने लगा।  मेरे दो करोड रूपये आ गए हैं। मेरे दो करोड रू. का चेक मिल गया है ।मुझे दो करोड़ में चैक मिल गया है। ऐसी कामनाएं करते-करते एक  वर्ष कैसे बीत गया पता ही नहीं चला। इस एक वर्ष में  उसने दो किताबें और लिख दी। उसने अपने सपने को अपने दिल में जीवित रखा। अवचेतन मन को बार-बार पुश(जाग्रत) करता रहा ।वह रोजाना   दीवार पर लगाया   गया दो करोड रूपये का चित्र देखता रहा। 
तेरह महीने के पश्चात उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा।प्रकाशन कंपनी का उसको दो करोड रुपए का चेक मिला। क्या उसे  दो करोड रुपए का चैक ऐसे ही मिल गया। पुरानी पुस्तक की असाधारण बिक्री और दो पुस्तकें उसने लिखी थी उन सब का रॉयल्टी दो करोड रूपये मिल गई । ऐसा नहीं केवल अवचेतन मन को जागृत करने से हुआ ,वह  लगातार  प्रयास करता रहा और उस दिशा में आगे बढ़ता रहा और साथ-साथ अवचेतन मन को भी बार-बार जागृत करता रहा।
अब मैं आपको उसकी पूरी विधि बताता हूं।
अवचेतन मन के कार्य क्या क्या है? जब हम सोते हैं और चेतन मन भी सो जाता है नींद आते ही हमारे सारे चेतन मस्तिष्क के क्रियाकलाप बंद हो जाते हैंऔर सारे क्रियाकलाप भूल कर हम नींद का आनंद लेते है। क्या हमारी इंद्रियों का कार्य ,हृदय की धड़कन, श्वसन प्रणाली, पाचन क्रियाएं भी बंद  हो जाती हैं,नहीं। क्योंकि  यह सब अवचेतन मन के हवाले होती हैं।  जब  चेतन मन सो जाता है तो उस समय अवचेतन मन  जागृत होकर इन सारे आंतरिक अंगों को कार्य करने में सहायता करता है। इसलिए रात्रि के समय ही अवचेतन मन अधिक सक्रिय रहता है और मैं कहता हूं रात्रि को सोते समय और प्रातः उठते ही बार बार अपने कामनाओं को मन से कहने पर अवचेतन मन सुनता है। *किन्तु अवचेतन मन को यह नहीं पता होता कि सच क्या है, जो आप बोलते हैं वही सच है।**जैसे मैं कल्पना कर रहा हूं मैं स्वस्थ हूं ,मैं स्वस्थ हूं ,मैं स्वस्थ हूं, मैं स्वस्थ हूं ,यदि किसी को कोई असाध्य बीमारी है ।लेकिन वह बार-बार कह  रहा है कि मैं स्वस्थ हूं, स्वस्थ हूं ,मेरी अमुक बीमारी ठीक हो गई है ,मैं स्वस्थ हूं।
या मैं करोड़पति बन गया हूं, अगले वर्ष मेरे पास बैंक में करोड़ों रूपये होंगे, मैं शहर का सबसे बड़ा धनी आदमी हो गया हूं, मैं विधायक बन गया हूं आदि आदि कुछ भी आपकी कामनाएं हो सकती है। जिसे आप लगता है कि यह असंभव है , आप अपनी कामनाएं अवचेतन मन को बार-बार और नियमित रूप से सुनाइए । अवचेतन मन पूरी तरह से आपके लक्ष्य को सफल करेगा ।
हां इसके लिए आपको लगन के साथ नियमित रूप से तड़पन के साथ रोजाना अपने अवचेतन मन को कहना पड़ेगा ।इसके प्रभाव से आपके  मस्तिष्क में ऐसी ऐसी योजनाएं बनेंगी, उसी प्रकार के कार्य आपके दिमाग में आएंगे  जिससे कि आप अपने लक्ष्य पर पहुंच सकने में समर्थ हो जाएंगे।
पंडित शिवकुमार शर्मा आध्यात्मिक गुरु ज्योतिष एवं वास्तु रत्न गाजियाबाद।
अध्यक्ष -शिवशंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केंद्र, गाजियाबाद

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