*इस वर्ष आश्विन मास होगा पुरूषोत्तम मास*
शिवशंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केन्द्र गाजियाबाद,
भारतीय पंचांग एवं सम्वत् के अनुसार सम्वत् 2077 में इस वर्ष आश्विन मास अधिक मास या पुरुषोत्तम मास होगा।
भारतीय काल गणना व ग्रहों की सूक्ष्म गति पर आधारित भारतीय पंचांग में दो प्रकार के वर्ष प्रचलित है , सौर वर्ष व चान्द्र वर्ष।
सौर वर्ष 365.25 दिन का होता है जबकि चान्द्र मास 254 दिन का होता है।दोनों प्रकार वर्षो में प्रतिवर्ष 10-11 दिन का अन्तर होता है। वशिष्ठ सिद्धांत के अनुसार इस अन्तर का समायोजन करने के लिए 32 माह 16 दिन 8 घंटे के पश्चात् अधिक मास को बढ़ा देते हैं।इस मास को पुरुषोत्तम मास कहने के पीछे एक पौराणिक कथा है ,जब बारह मासों व उनके स्वामी देवता का निर्धारण हो गया किन्तु इस तेरहवें व अधिक मास का स्वामी बनने को कोई भी देव तैयार नहीं हुए तो स्वयं भगवान विष्णु इस मास के अधिपति देवता बनें। इसलिए इसे पुरुषोत्तम मास भी कहते हैं , यद्यपि इस मास में विवाह मुहूर्त,गृह प्रवेश, गृहारंभ आदि शुभ मुहूर्त नहीं होते हैं , किन्तु पूरे मास ईश्वर भजन, संकीर्तन पूजा पाठ ,दान आदि के लिए बहुत पुण्य दायक है।
इस वर्ष आश्विन मास अधिक मास है अर्थात इस बार आश्विन मास दो बार आएगा।अधिक मास में प्रथम पक्ष व चौथा पक्ष शुद्ध होता है ,बीच के दोनों पक्ष अशुद्ध होते हैं।
*पितृ विसर्जन अमावस्या से एक माह बाद आयेंगे नवरात्रि व्रत*
सामान्य रूप से पितृपक्ष की समाप्ति पितृ विसर्जन अमावस्या के बाद नवरात्रि व्रत आरंभ हो जाते हैं, किन्तु अधिक मास के चलते बीच के दोनों पक्ष (एक माह) अशुद्ध होने से एक माह बाद नवरात्रि पर्व आरंभ होंगें।
अधिक मास 18 सितंबर से 17 अक्टूबर तक रहेगा। पितृ विसर्जन अमावस्या 17 सितंबर को हैं जबकि प्रथम नवरात्र 18 अक्टूबर को हैं।
पं.शिवकुमार शर्मा
अध्यक्ष शिवशंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केन्द्र गाजियाबाद,
9811893069
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