ग्रहों के गुण प्रवृत्ति और स्वभाव
*केतु ग्रह*
भारतीय ज्योतिष में केतु छाया ग्रह है। केतु तमोगुणी ग्रह है।
केतु को मीन राशि का स्वामी माना गया है ।धनु राशि में उच्च के होते हैं। शनि केतु का मित्र है। राहु शत्रु ग्रह है ,चंद्र और मंगल सम ग्रह है। सूर्य ,बुध और बृहस्पति केतु के सम ग्रह हैं। केतु का रंग मिश्रित होता है ।इनका रत्न लहसुनिया है । केतु अश्वनी मघा और मूल नक्षत्रों के स्वामी हैं। केतु की महादशा 7 वर्ष की होती है।
गोचर में केतु एक राशि पर 15 महीने रहता है ।केतु राहु से ठीक 180 अंश पर होता है ।इसलिए इनको नॉर्थ पोल और साउथ पोल कहते हैं जो आपस में कभी मिलते नहीं है। केतु मीन, कन्या , वृषभ और धनु के उत्तरार्ध में बलवान होते हैं। यद्यपि केतु को पापी ग्रह माना गया है। किंतु अकेला केतु पंचम भाव या एकादश भाव में हो तो वह अपनी महादशा में उस व्यक्ति को फर्श से अर्श पर ले जाता है। उस व्यक्ति की प्रसिद्धि को चार चांद लगा देता है। मेरे एक मित्र इसके एक उदाहरण हैं। सिंह लग्न की कुंडली में पंचम भाव में धनु के केतु शुभ है। गुरु की राशि में केतु का होना दोनों का सम्मिलित प्रभाव पड़ता है ।संतान भाव पुष्ट होता है। यद्यपि इसी भाव में केतु का होना विद्या में कुछ रुकावट संकेत होता है और पेट रोग देता है।
2003 मे उनकी कुंडली के अनुसार केतु की महादशा आई। वास्तव में इस महादशा ने ही मेरे मित्र को गाजियाबाद में बसा दिया। अध्यापन, ज्योतिष और वास्तु के क्षेत्र में बहुत ही अच्छा परिणाम मिला। केतु की कृपा से भवन ,वाहन ,प्लॉट, बच्चों की उच्च शिक्षा ,उनकी शादी सब ठीक प्रकार से और उचित समय पर पूर्ण हो रही है। वे कहते हैं कि उनको केतु की महादशा का ब्याज शुक्र की महादशा में भी मिल रहा है।
अशुभ भाव में बैठा हुआ केतु
अशुभ परिणाम देता है ।इस अवस्था में कलंक, झूठा आक्षेप, मुकदमा ,झगड़ा ,धन हानि आदि होने की संभावना रहती है। यदि केतु छठे या आठवें स्थान पर और अशुभ स्थिति में हो तो इसकी महादशा या अंतर्दशा में शत्रु पीड़ा ,चोट या कोई ऑपरेशन का सामना करना पड़ता है। ऐसा माना जाता है की द्वादश भाव में केतु मोक्ष कारक है।
*अशुभ केतु के उपाय*
यदि आपको लगता है कि आपके साथ केतु अच्छा नहीं कर रहा है। अशुभ प्रभाव दे रहा है तो आप निम्नलिखित उपाय कर सकते हैं।
शनिवार को सतनजा दान करे। केतु के तांत्रिक मंत्र के 64000 जाप करें अथवा किसी ब्राह्मण से करा दें।
किसी भिखारी को लोहा, तेल नारियल ,काला कंबल उड़द दान करें। लहसुनिया धारण करना बहुत शुभ होता है ।
असगंध जड़ी का पूजन करके उसको काले कपड़े बांध कर छोटा सा ताबीज गले में पहनें अथवा अपनी जेब में रखें।
पंडित शिवकुमार शर्मा, आध्यात्मिक गुरु एवं ज्योतिष रत्न
अध्यक्ष शिवशंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केंद्र, गाजियाबाद
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