ग्रहों के गुण, प्रवृत्ति और स्वभाव, राहु ग्रह

27Oct

 ग्रहों के गुण, प्रवृत्ति और स्वभाव,

              राहु ग्रह 

राहु छाया ग्रह होने से इसको किसी भी राशि का स्वामित्व नहीं मिला है। यद्यपि इसे कन्या राशि का स्वामी मानते हैं ।यह आर्द्रा , स्वाति और शतभिषा नक्षत्र का स्वामी है। राहु की उच्च राशि वृषभ मानी गई है और नीच राशि वृश्चिक। छाया ग्रह होने कारण राहु जिस ग्रह की राशि में होते हैं। उसी के अनुसार फल देते हैं।

 राहु के पूर्ण दृष्टि 5,7 व नौवें स्थान पर पड़ती है ।यह  तमोगुणी  व अंधकार प्रिय ग्रह है। इसको पापी ग्रह की संज्ञा मिली है। राहु की स्वराशि कन्या मानी गई है ।इस के मित्र ग्रह शनि और केतु हैं। सूर्य, चंद्रमा और बुध  राहु के शत्रु  हैं। मंगल इसका सम ग्रह हैं। राहु का रंग धुएं की तरह होता है ।यह पृथकतावादी ग्रह है।

राहु कूटनीति, राजनीति ,झूठ कपट, षड्यंत्र कारक ग्रह है। वायु विकार देने वाला, उत्प्रेरक (उकसाने वाला) हवाई यात्रा कारक ग्रह है।

लोग राहु का नाम सुनकर  बहुत ही अशुभ मानते हैं। लेकिन शनि की तरह यदि आपके कर्म अच्छे हैं और कर्म भाव  में शनि  या राहु का शुभ प्रभाव है तो आप राजनीति में अच्छा कर सकते हैं। राहु कालसर्प दोष का कारक है। जब राहु और केतु के बीच में सभी ग्रह एक और हो जाते हैं तब वह कालसर्प दोष बनता है। राहु सर्प का   मुख माना गया है और केतु सर्प का पुच्छ माना गया है।

 यदि राहु केतु के साथ में कोई ग्रह हो या एक ग्रह बाहर हो और वह राहु केतु से अंशों में अधिक हो तो कालसर्प दोष कट जाता है। राहु के साथ मंगल होने से अंगारक दोष बनता है। यह दोष व्यक्ति के अंदर  इगो, क्रोध का निर्माण करता है ,चोट आदि भी देता है।

यदि कुंडली में पंचम या षष्ठ भाव में  व्यक्ति को पेट रोग देता है। द्वितीय अथवा द्वादश भाव में राहु या शनि हो मंगल हो तो उस व्यक्ति को नेत्र पीड़ा हो सकती है। छठे भाव में राहु ,केतु, शनि ,मंगल के प्रभाव के पैरों में चोट आदि का भय रहता है।

राहु की महादशा 18 साल होती है। यदि कुंडली में  राहु अशुभ होता है ,तो व्यक्ति को बुरे कर्म करने को उकसाता है।

सबसे पहले व्यक्ति की दिनचर्या को खराब करता है। घूमने फिरने का शौक पैदा करता है ,वाणी दोष उत्पन्न करता है और विवेक हीनता उसके अंदर आ जाती है‌ अच्छे बुरे का ज्ञान नहीं रह पाता। उसको घूमना ,फिरना, ड्रिंक करना, नॉनवेज आदि का शौक पड़ जाता है। यदि राहु की महादशा में आप उपरोक्त अवस्था से पीड़ित  हो रहे हैं तो समझो कि आप के साथ राहु  बहुत बुरा करने वाला है। अपयश, धोखा  ,आर्थिक हानि , मानसिक विकार ,तलाक आदि हो सकता है।

कुंडली में राहु अच्छी अवस्था में हो तो वह अपने महादशा में रंक से राजा बना देता है ।राजनीति में राहु अपना उच्चतम स्थान रखता है और किसी साधारण व्यक्ति को भी राजा बना सकता है। डॉ एपीजे अब्दुल कलाम को राहु ने उच्च प्रतिष्ठा दिलवाई। उनको, वैज्ञानिक ,मिसाइल मैन ,राष्ट्रपति आदि सम्मानित पदों पर राहु ने ही पहुंचाया था। नेहरू ,सचिन तेंदुलकर ,डॉ मनमोहन आदि अनेक राजनेताओं, खिलाड़ियों की कुंडली में राहु उत्तम अवस्था में था ‌इसलिए उनको उच्चतम शिखर पर पहुंचाया।यदि आपकी कुंडली में राहु अशुभ है या महादशा में अशुभ प्रभाव  दे रहा है तो आप कुत्ते को दूध रोटी खिलाएं। कोढियों  को भोजन दान करें ।मछलियां को आटे की गोलियां खिलाएं।  राहु के  तांत्रिक मंत्र का जाप कराएं और अपनी दिनचर्या बदले।

राहु की अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए रांगे की गोली सफेद धागे में बुधवार को गले में धारण करें ।रांगा और गोमेद राहु के नकारात्मक प्रभाव को कम करते हैं। रांगा, जो बर्तनों में टांका लगाने का काम आता है, बहुत ही महत्वपूर्ण है।यदि किसी को राहु अत्यंत पीड़ित कर रहा हो या किसी बालक को नजर अधिक लगती हो ,अज्ञात भय रहता हो तो रांगे की गोली सफेद धागे में धारण करें। 

पंडित शिवकुमार शर्मा आध्यात्मिक गुरु एवं ज्योतिष रत्न

 अध्यक्ष -शिवशंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केंद्र गाजियाबाद

Pt.Shiv Kumar Sharma

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