भारतीय नव संवत्सर 2078,13 अप्रैल से होगा आरंभ, वासंतिक नवरात्र भी 13 अप्रैल से ही आरंभ होंगे।

27Oct
*भारतीय नव संवत्सर 13 अप्रैल से होगा आरंभ*
*वासंतिक नवरात्रि 13 अप्रैल से ही आरंभ होंगे*
*मां दुर्गा घोड़े पर सवार होकर आएंगी*
भारतीय नव वर्ष संवत्सर 2078
इस वर्ष 13 अप्रैल से आरंभ होगा। 13 अप्रैल दिन मंगलवार होने से इस वर्ष के राजा मंगल ही रहेंगे और मेष  राशि में सूर्य भी 13 अप्रैल को ही आएंगे अर्थात मेष सक्रांति में सूर्य 13 अप्रैल को ही आएंगे, इसीलिए इसीलिए मंत्रीपद  का स्थान भी मंगल के पास ही रहेगा।
मंगलवार को प्रतिपदा होने से मां भगवती घोड़े पर सवार होकर आएंगी।
संवत्सर 2078 तक कई प्रकार से विशेष प्रभाव रखेगा।
मंगल स्वभाव से ही पाप ग्रह है। वह युद्ध प्रिय ,मारधाड़, तोड़फोड़, दंगे फसाद ,खून खराबा औरआतंकी वारदात  का ग्रह है । वर्ष प्रवेश कुंडली में 12 स्थान का राहु वर्ष लग्न के साथ बैठा हुआ है इसका भाव यह है कि इस संवत्सर में समस्त संसार अपनी सारी ताकत  युद्ध सामग्री को एकत्रित करने और सैन्य बल को बढ़ाने में लगा रहेगा। कंप्यूटर तकनीकी से युद्धोन्मादी प्रभाव बढ़ेगा। असाध्य बीमारी जैसे कोरोनावायरस  , कैंसर आदि की इस वर्ष प्रधानता रहेगी‌। 13 अप्रैल को ही सूर्य देव 2:33 बजे  अश्विनी नक्षत्र और मेष राशि में प्रवेश करेंगे। तत्कालीन मकर लग्न कुंडली में लग्नेश शनि बलवान होकर बैठे हैं। और संवत् 2078 के राजा मंगल शनि को पूर्ण दृष्टि से देख रहे हैं।
इस वर्ष राजा और मंत्री अर्थात सर्वे सर्वा मंगल ही हैं जो सुख और लाभ भाव के स्वामी बन कर के संपूर्ण ताकतें शनि को दे रहे हैं ।इस योग के चलते यह संबंध बहुत विनाशकारी कहा जा सकता है।
महर्षि पाराशर ने कहा है- *स्थान वृद्धिं करौ शनि:*
अर्थात भारत की प्रभाव राशि मकर है इसलिए शनि मकर राशि की रक्षा करता है। क्योंकि वह उनकी स्वयं की राशि है इसी कारण जब सारा संसार कोरोनावायरस से बहुत व्याकुल था ।किंतु भारतवर्ष में उसका प्रभाव कम था और उसका उपचार भी शनि की कृपा से भारत में ही शीघ्र ही ढूंढ लिया गया।
किंतु मकर व कुंभ राशि में गुरु पूरे वर्ष रहने वाला  है ,जो देश और धर्म के लिए ठीक नहीं है राजा और प्रजा में भारी तनाव और वैमनस्य कराएगा। अराजक तत्व खुला खेल खेलेंगे। जिससे सरकार परेशानी आ सकती है।
मंगल के राजा और मंत्री दोनों होने से सामाजिक और राजनीतिक तौर पर बड़े बदलाव हो सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्तर पर भारत की छवि धूमिल करने का प्रयास जारी रहेगा ।किंतु दृढ़ संकल्पित सरकार अपने कर्तव्यों से देश का नाम ऊंचा रखेगी, क्योंकि शनि मकर राशि में विराजमान है और अपनी भारत की राशि भी मकर राशि है इसलिए मकर राशि में  उपरोक्त प्रभाव कम रहेगा।
इस वर्ष प्राकृतिक आपदाएं आंधी, तूफान, चक्रवात, बवंड,र विद्युत्पात, हिमपात, भूकंप ,ओलावृष्टि और समुद्री तूफान की मार झेलने को तैयार रहना चाहिए।  पैदावार अच्छी रहेगी । यद्यपि शनि और बृहस्पति एक राशि में होने से तामसी योग बना हुआ है यह योग वास्तव में तामसी प्रवृत्ति के विनाश के लिए ही प्रयोग हो रहा है ।जो लोग देश के प्रति कुचक्र रचेंगे ।उनके लिए गुरु शनि का मिलन बहुत ही खतरनाक होगा ।ऐसी प्रवृत्ति वाले जनसमूह पर प्रतिबंध लगाये जा सकते हैं।

नववर्ष 2078 का मंत्रिमंडल इस प्रकार रहेगा:
राजा -मंगल
मंत्री- मंगल
फसल विभाग शुक्र के पास है।
 वित्त मंत्री गुरु रहेंगे ।
वर्षा के स्वामी  चंद्र हैं।
इस संवत का वासा धोबी के घर है। इसलिए उत्तम वर्षा और कृषि कार्यों में उत्तम सफलता मिलेगी ।
*संवत्सर 2078 का नाम राक्षस नामक संवत्सर है जो अपने नाम के अनुरूप ही देश के विरुद्ध राक्षसी प्रवृत्ति का कुचक्र चलता रहेगा।*
यद्यपि यह वर्ष उत्तम फसल वर्षा और सैन्य प्रबंधन और राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं का है। किंतु सरकार को दूर दृष्टि से कार्य लेना चाहिए।
संवत 2078 मैं चुनावी माहौल रहेगा। पांच राज्यों में चुनाव हैं, जिनमें भारतीय जनता पार्टी का दबदबा रहेगा ।क्षेत्रीय पार्टियां अपने अस्तित्व को बचाने के लिए संघर्षरत रहेंगी।
पंडित शिवकुमार शर्मा आध्यात्मिक गुरु एवं ज्योतिष रत्न 
अध्यक्ष- शिव शंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केंद्र ,गाजियाबाद

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