*वास्तु है सबके लिए*
* भाग -एक*
*वास्तु में दिशाओं का ज्ञान*
वास्तु है सबके लिए -वास्तु की एक श्रृंखला आरंभ करते हुए सबसे पहले वास्तु में दिशाओं एवं उप दिशाओं का ज्ञान महत्वपूर्ण है। दिशाओं का ज्ञान हम कम्पास(दिशा सूचक यन्त्र) से कर सकते हैं। आधुनिक युग में आपके स्मार्ट फोन पर भी कम्पास उपलब्ध होता है,इसमें तो दिशाओं की अंशों (Degrees) में वृद्धि एवं न्यूनता अंकों में प्रदर्शित होती है।
दिशाएं मुख्यत:चार होती
हैं- पूर्व, पश्चिम , उत्तर, दक्षिण।
चार उपदिशाएं अर्थात् मुख्य दिशाओं के कोने के रूप में दिखाई जाती है।
उप दिशाएं इस प्रकार हैं- ईशान(उत्तर पूर्व का कोना)
आग्नेय (पूर्व दक्षिण का कोना)
नैऋत्य ( दक्षिण पश्चिम का कोना)
वायव्य ( पश्चिम उत्तर का कोना)
चारों दिशाएं व उप दिशाएं पूरे भूमण्डल का 360 अंशों में निर्धारण करती हैं। प्रत्येक दिशा का विस्तार 90 अंश होता है , उपदिशाएं दो दिशाओं का मध्य भाग होता है,अत: इनका अंशात्मक मान 45 अंश होता है।
प्रत्येक दिशा व उप दिशा का मध्य बिन्दु से दोनों ओर 22.5 अंश का विस्तार होता है।सभी दिशाएं ज्ञात करना वास्तु में बहुत महत्वपूर्ण हैं।
पं. शिवकुमार शर्मा अध्यक्ष शिवशंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केन्द्र गाजियाबाद
9811893069
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