वास्तु है सबके लिए (भाग 40) फ्लैट्स में आकाश तत्व की कमी व उसके दुष्प्रभाव

27Oct
वास्तु है सबके लिए (भाग 40)
*फ्लैट्स सिस्टम में आकाश तत्व की कमी और उससे होने वाले दुष्प्रभाव*
महाभारत में यह सूक्ति आती है: *यत् पिंडे तत्  ब्रह्मांडे* अर्थात जो हमारे शरीर में है वही पूरे ब्रह्मांड में है। हमारा शरीर पंच तत्वों से मिलकर बना है। अग्नि, वायु, जल, आकाश और पृथ्वी तत्वों से मिलकर हमारे शरीर की पूर्णता होती है।  वहीं पांच तत्व हमारे ब्रह्मांड  में स्थित है।
हमारा भवन, आवास, दुकान, फैक्ट्री, कारखाना आदि वहां भी प्रकृति के इन पांच तत्वों का संतुलन होना अनिवार्य है ।यदि किसी एक तत्व का संतुलन बिगड़ जाता है तो वही वास्तु दोष कहलाता है।आकाश तत्व सृष्टि का सबसे पहला तत्व है; जब ग्रह, तारे ,नक्षत्र आदि कुछ नहीं था। तब  भी आकाश तत्व था ।यह कहना भी अतिशयोक्ति नहीं होगा कि आकाश तत्व से ही भूमि, ग्रह, नक्षत्र ,आदि सभी का निर्माण हुआ है। चारों तत्व आकाश तत्व के ऊपर निर्भर है ।कैसे ?
आकाश तत्व नहीं है तो अग्नि तत्व क्या करेगा, अग्नि को जलने के लिए भी आकाश चाहिए।
आकाश तत्व के बिना वायु का भ्रमण कैसे होगा?
आकाश तत्व नहीं होगा तो पृथ्वी का परिक्रमण  व परिभ्रमण कैसे होगा ?
उपरोक्त विवेचन ही आकाश तत्व की महत्ता को प्रदर्शित करता है। आकाश का गुण शब्द है ।वायु द्वारा हमें सुनाई पड़ता है ।आकाश का अपना गुण स्पर्श है और आकाश का विकास वायु से ही हुआ है। इसलिए आकाश और वायु दोनों तत्व आपस में मित्र हैं।
आर्यभट्ट ने शून्य की खोज की थी, जिसका मूल भारतीय दर्शन में आकाश तत्व कहलाता है। शून्य और आकाश आपस में पर्यायवाची है।
सोसायटी द्वारा निर्मित फ्लैट्स इस आकाश तत्व के गुणों से वंचित रह जाते हैं।
आकाश तत्व हमें स्वयं का मूल्यांकन करने का अवसर देता है।
आकाश आकाश तत्व हमें बोलने की शक्ति देता है ।
 आकाश तत्व ही हमारी वाणी का प्रमुख कारक है।
आकाश तत्व के कारण ही हम दूसरे की बात सुन पाते हैं ।जैसा कि पहले कहा कि आकाश और वायु का परस्पर संबंध है। सुनना, बोलना, कहना यह सब एक दूसरे के  पूरक हैं।
प्राचीन काल में घरों में बीच में स्थान छोड़कर चारों ओर अलग-अलग कमरे बनाए जाते थे। इससे वहां पर आकाश तत्व का बाहुल्य होता था। लोगों के हृदय विशाल होते थे ।एक दूसरे के सुख दुख में भागीदार होते थे ,और सहनशक्ति तो उनमें गजब की होती थी।
कालांतर में शहरों में मकान बन गए फिर भी हमने उसका आकाश तत्व का ध्यान रखा ।छत पर बीच में दाएं बाएं प्रकाश व्यवस्था हेतु जाल लगा दिया। इससे भी कुछ मात्रा में आकाश तत्व हमारे घर में आ गया। लेकिन उपरोक्त गुणों का लगभग  40% ह्रास हो गया।
और अब आधुनिकता की चकाचौंध में फ्लैट सोसाइटी में हमने आकाश तत्व को आने के लिए स्थान ही नहीं छोड़ा जो स्थान हमारे आकाश तत्व के लिए था। इस में वायु का संचालन ठीक प्रकार से होता था। छोटी-छोटी लाबियां, उसी के अंदर ड्राइंग रूम बन गए हैं। वायु और आकाश तत्व का संचालन कैसे हो।
आप खुद तुलना कीजिए। मैंने तो सैकड़ों घर में देखा है। ऐसे फ्लैट्स में रहने वाले लोगों के अंदर सहनशीलता प्राय: खत्म हो गई है।
शारीरिक क्षमता जो प्राचीन समय के लोगों में थी, अब वह कहीं नहीं दिखाई पड़ती है, लोगों के अंदर रोग प्रतिरोधक क्षमता /इम्यूनिटी बहुत कम हो गई है ।मनुष्य का स्वभाव चिड़चिड़ा और उदासी से भरा हुआ हो गया है। अब वह अकेले में ही रहने को मजबूर है।  समाज व सोसाइटी से दूर होती हुई हमारी पारिवारिक परंपरा  लुप्तप्राय:हो रही है।
मैंने कई घरों में देखा है जो 10 ,12 , 14आदि मंजिलो में रहते हैं, अधिकतम में स्वास्थ्य की दिक्कत रहती है, विशेष समस्याएं महिलाओं में होती हैं क्योंकि सर्वाधिक समय महिलाएं  घर में रहती हैं और पुरुष वर्ग तो फिर भी ऑफिस, दुकान आदि के बहाने बाहर चले जाते हैं। बच्चे भी विद्यालय के बहाने बाहर चले जाते हैं ।
आपने अभी देखा कोरोना काल में लोकडाउन में बच्चे घर पर ही रह रहे हैं। सोसायटीज या फ्लैट्स  में जहां पर आकाश तत्व की कमी है वहां के बच्चे अपने आप को डरा ,सहमा महसूस करते हैं। कई बच्चे तो मानसिक तनाव के शिकार भी हो जाते हैं।
महिलाएं अक्सर अपने आप को असुरक्षित और अस्वस्थ महसूस करती हैं।
अब किया क्या जाए ?जिससे हम आकाश तत्व के गुण को अपने आवास में ला सकें।
इसके लिए सबसे पहले हमें अपनी दिनचर्या पर ध्यान देना होगा।
अपने शरीर को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए योग ,प्राणायाम आदि का सहारा ले ।प्रातः काल सूर्योदय से पहले ही अपने घर की सारी खिड़कियां खोल दें और एक दो घंटा खुला रहने  दें ताकि दाएं बाएं से आती हुई प्रात:काल की प्राणदायिनी वायु थोड़े बहुत आकाश तत्व को भी संग्रहित कर सकती है।
खुली वायु के घर में प्रवेश करती है। तो हमारे घर के कोने कोने में घूमती है इसलिए घर के प्रत्येक कक्ष को सुबह कुछ समय के लिए अवश्य खोलें, बाहरी खिड़की के पास पवन घंटी लगा सकते हैं इससे नाद /मधुर स्वर उत्पन्न होगा और यह नाद आपके फ्लैट में आकाश तत्व की पूर्ति करेगा।
कहीं-कहीं वास्तु का यह भी आदेश है की छत पर जहां पंखा लगाते हैं। उसके दाएं बाएं एक शीशा/लुकिंग मिरर नीचे की ओर देखता हुआ लगा दें। इन उपायों से हम अपने फ्लैट में आकाश तत्व को आमंत्रित कर सकते हैं और हम फिर हम धैर्यवान , बुद्धिमान और स्वस्थ रह सकते हैं।
पंडित शिवकुमार शर्मा ,आध्यात्मिक गुरु और ज्योतिष रत्न
अध्यक्ष- शिवशंकर ज्योतिष एवं राष्ट्रीय अनुसंधान केंद्र गाजियाबाद,
Pt. Shiv Kumar Sharma

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