वास्तु है सबके लिए (भाग 45), वास्तु में जियोपैथिक स्ट्रेस

27Oct
वास्तु है सबके लिए ( भाग 45)
*वास्तु में जियोपैथिक स्ट्रेस*
वास्तु शास्त्र केवल दिशाओं का ही शास्त्र नहीं है बल्कि उस घर में घटने वाली अच्छी बुरी सभी घटनाओं का कारक है।
कभी-कभी कुछ अवांछित घटनाएं हमें यह सोचने को मजबूर कर देती है कि आखिर घर में क्या हो गया है? मैंने कई स्थानों पर जाकर देखा है तथा कई लोगों के फोन भी आते हैं कि नीचे लिखी घटनाएं घटित हो रही हैं। जैसे:
*घर में एक विशेष स्थान से लाल चींटी अथवा काली चींटी बहुत मात्रा में निकल रही हैं। हल्दी तेल आदि छिडकने के बाद भी वहां से नहीं जा पा रही हैं।
*घर में अकसर  घूमने वाली बिल्ली घर के किसी विशेष स्थान पर जाकर रोना शुरू कर देती है चाहे वो आंगन हो या छत हो ।
*अचानक घर में से किसी विशेष स्थान से बदबू आनी शुरू हो जाती है और कई कई दिन तक आती रहती है।
*किसी विशेष स्थान पर रखे हुए गमले में पौधे सूख जाते हैं।
*अचानक आपकी घर के इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक सामान खराब होने शुरू हो जाते हैं ।उसमें भी विशेष स्थान पर रखे हुए सामान जल्दी टूटते हैं.
*आप अपनी अलमारी कैश बॉक्स आदि का स्थान बदल देते हैं कुछ  समय बाद अनुभव होता है कि वहां धन रखने पर पर आपके खर्चे बहुत बढ़ गए हैं ।घर में बरकत खत्म हो गई है।
*वास्तु के अनुसार दिशाएं उपयुक्त होने पर भी वह वस्तु वहां पर बहुत नुकसान देना आरंभ कर देती है।। मेरे एक उद्योगपति मित्र हैं ।पहली बार उनके घर गया ।घर के द्वार पर मंदिर बना हुआ था और घर दक्षिणमुखी था। क्योंकि मैं वास्तु करता भी हूं और सलाह भी देता हूं। मैंने कहा आदरणीय भाई साहब, मंदिर आपने मुख्य द्वार पर रखा है और वह भी दक्षिण दिशा में। मंदिर तो आपको नॉर्थ ईस्ट में  रखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि नार्थ ईस्ट में मंदिर रखा था।अचानक सब कुछ उल्टा पुल्टा शुरू हो गया। एक और बात मेरी  धर्मपत्नी को आभास हुआ कि मंदिर आपको घर के द्वार के पास रखना चाहिए। और तब मन्दिर वहां रखा है सब कुछ पुन: वैसा ही हो गया.। उस दिशा (ईशान ) में  एक पीतल का गमला रखवा कर पीले पुष्प रख दिये।
*कभी-कभी सोते समय अचानक लगता है कि किसी ने हमारा गला दबा दिया है और हमारा गला सूख गया है ।हाथ पैर बिल्कुल निष्क्रिय हो गए हैं। किसी विशेष आकृति ने हमें बिल्कुल निष्क्रिय कर दिया है। ऐसा तो मैंने अक्सर कई स्थान में देखा है ।और यह अचानक से होना आरंभ होता है।
*घर में कोई नवजात शिशु 6 महीने से लेकर 2 साल तक का किसी विशेष स्थान पर बैठ जाता है तो तुरंत हट जाता है। कुत्ता या गाय किसी स्थान पर बंधी है और वहां पर वह अगर स्ट्रेस है तो वहां वह ज्यादा देर तक बैठने नहीं पाती अचानक उठ जाती है।
मैंने देखा है कि गांव में एक व्यक्ति ने अपने प्लॉट में पशुओं को चारा खिलाने के लिए नांद / खोर बनाई।
उसके दोनों खूंटे से दो दो पशु दोनों ओर बांध दिये।जब से वहां पशु बांधने आरंभ किए वह न तो ठीक से घास खाते थे और ना ठीक से बैठकर जुगाली कर पाए थे ‌एक दो बार तो उन्होंने वहां से खूंटा उखाड़ने का प्रयास किया जब मैंने उसको देखा स्थान बदलने का सलाह दी और उसके बाद देखा कि अब वह ठीक प्रकार से चारा भी खा रहे हैं और बैठ कर आराम से जुगाली भी करने लगे हैं।
*ऐसा क्यों होता है* अमेरिका के खगोलीय वैज्ञानिकों  ने सन 1952 में खोज की पृथ्वी से सतह से ढाई सौ मीटर गहराई से पृथ्वी से बहुत तीव्र गति से नेगेटिव एनर्जी निकलती है और उसकी गति ऊर्ध्व अर्थात  ऊपर की ओर होती है यदि बीच में कोई पानी का स्रोत अथवा चट्टान हो तो दाएं बाएं हो जाती है ।लेकिन वह पृथ्वी के ऊपरी सतह पर पहुंचना चाहती है। उसी नेगेटिव एनर्जी को वास्तु की  भाषा में जियोपैथिक स्ट्रैस  कहते हैं।
यह ज्योपैथिक स्ट्रेस पहले से नहीं होता है  जैसा कि मैंने कहा कि यह पृथ्वी से अचानक  आने वाली वह तीव्र नकारात्मक उर्जा होती है, जिस क्षेत्र में ,जिस घर में जाती है ,उस स्थान को बहुत हानि पहुंचाती है ।
मेरा संबंध गांव से है ‌,मैंने कई बार बागों में ऐसे पेड़ देखे हैं कि  पूरा हरा-भरा बाग है और अचानक कोई पेड़  अपने आप ही सूख जाता है। कई बार नीचे तक  खोदने के बाद भी नीचे कोई पत्थर अथवा जड़ के लिए कोई अवरोधक नहीं मिला । कभी-कभी खेतों में भी कई स्थान पर हरी-भरी फसल किसी कोने से या किसी स्थान से सूख जाती है।
यह सब जियोपैथिक स्ट्रेस के नकारात्मक प्रभाव  के कारण होता है।
जियोपैथि स्ट्रेस ऐसा नहीं है कि सभी घरों में होता है ।हां 10-20 घरों में से किसी एक घर में अवश्य देखने को मिलता है ।इसलिए इससे घबराने की आवश्यकता नहीं है। आजकल वास्तु एक्सपर्ट इस जिओ पैथिक स्ट्रेस के नाम सेअनुचित लाभ भी उठा रहे हैं।
वे महंगी महंगे वास्तु के यन्त्र   लगवाकर खूब व्यापारिक लाभ उठा रहे हैं।
मेरा  यह  उद्देश्य नहीं है कि कौन क्या कर रहा है? मैं तो केवल आपको सचेत कर रहा हूं।
*जिओ पैथिक स्ट्रेस से बचने के उपाय*
सबसे सस्ता उपाय तो यह है यह आप तांबे के तार लेकर अथवा तांबे की टीन की प्लेट लेकर के उसको गोलाकार आकृति बांधकर मेउस विशेष स्थान पर, जहां लगता है कि आपको यहां सब कुछ निगेटिव हो रहा है। वहां रख दीजिए कुछ समय बाद वहां से जिओपैथिक स्ट्रेस खत्म हो जाएगा। 
यदि आपको अचानक सोते समय आपकी नींद उड़ जाए। भयानक सपने आने शुरू हो जाएं या जैसा कि मैंने पहले बताया कि कोई आपका गला दबा रहा है। और आप निष्क्रिय हो जाएं ।ऐसी अवस्था में आपको अपना वह  सोने का स्थान कुछ दिनो के लिए बदल देना चाहिए।
जिस स्थान पर आपको महसूस हो कि यह स्थान नकारात्मक हो चुका है। वहां से अपनी उपयोगी वस्तुएं: इलेक्ट्रॉनिक सामान आदि हटवा लीजिए जिससे कि हानि की संभावनाएं कम हो जाए और वहां पर पहले बताए गए उपाय अर्थात तांबे की तारों का गुच्छा या तांबे की टिन/पर लेट लगवा दीजिए अथवा रख दीजिए। कुछ दिनों बाद वह नकारात्मक प्रभाव स्वयं ही खत्म हो जाएगा।।
यदि उस विशेष स्थान पर चींटी निकलती हो या अचानक छिपकली  आ कर के वहां बोलना शुरू करती हो ।तो उस कमरे को कुछ समय के लिए आप खाली छोड़ दीजिए उसमें लाल रंग की बल्ब जलाए। और वही एकमात्र उपाय हैं तांबे की प्लेट उस विशेष स्थान पर रख दीजिए।
कई बार लोग पूछते हैं कि क्या यह भूतल पर ही होता है या प्रथम द्वितीय अथवा बहुमंजिला इमारतों भी होता है। 
यह जियोपैथिक स्ट्रेस एक धारा में चलने वाली वह तीव्र गति की नकारात्मक ऊर्जा होती है जो ढाई सौ मीटर भूमि के नीचे से लेकर ढाई  तीन सौ मीटर ऊपर  तक जाती है हां ऐसा हो सकता है कि विशेष भारी निर्माण के कारण दाएं बाएं हो सकती है लेकिन इसका प्रभाव किसी  भी मंजिल पर हो सकता है।
एक बात और ध्यान देने की होती है ऐसा नहीं कि जियो पैथिक स्ट्रेस हमेशा ही तीव्र गति का होता है यदि यह ढाई सौ से 300 मीटर की गहराई से निकलता है ऊपर  आते आते इसका प्रभाव कम हो जाता है। और यह इतना हानिकारक नहीं होता है। और यदि 100,150 फीट के नीचे से चलता है तो इसका प्रभाव 
अधिक हानिकारक होता है।
कई बार आप देखते होंगे मेरे तो कई घरों में देखा है  ।आपने सुना भी होगा कि अमुक व्यक्ति या कोई महिला रात को सोते सोते ही अचानक मृत्यु को प्राप्त हो गई। दिन में जब वह देर तक नहीं उठी देखा गया कि वह परलोक सिधार  चुका/चुकी है। इसका कारण और कुछ भी हो सकता है ।किंतु  तीव्र जिओपैथिक स्ट्रेस से भी ऐसा 70% तक संभव है।
इसलिए आप सब जियोपैथिक स्ट्रैस से घबराए नहीं ।
अगर आपको उपरोक्त बातें महसूस होती हो तो उसे किसी अनुभवी वास्तु एक्सपर्ट से सलाह लें या खुद अपने आप भी उपरोक्त उपाय कर सकते हैं।
पंडित शिवकुमार शर्मा ,आध्यात्मिक गुरु और ज्योतिष रत्न
अध्यक्ष- शिवशंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केंद्र, गाजियाबाद

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