वास्तु है सबके लिए ( भाग 48), जूते पहने जरा संभल के, जूते भी बिगाड़ सकते हैं आपके शरीर का वास्तु

27Oct
वास्तु है सबके लिए (भाग 48)
*जूते पहने जरा संभल के*
*जूते भी बिगाड़ सकते हैं आपके शरीर का वास्तु*
व्यक्ति की पहचान उसके कपड़े और जूतों से होती है। लेकिन कोई कितने भी अच्छे कपड़े पहन ले। अगर जूते ठीक नहीं है तो व्यक्ति को समाज में महत्व नहीं दिया जाता है।
 ज्योतिष शास्त्र में मानव जीवन की धुरी हर वस्तु पर किसी ने किसी ग्रह को संबध रखती  है। काल पुरुष सिद्धांत के अनुसार व्यक्ति की कुंडली का आठवां भाव पैरों के तलवों से संबंधित है और पैरों के जूते भी आठवें भाव को महत्व देते हैं।
कुछ  ऐसे जूते दुर्भाग्य का सूचक होते हैं ।इनको पहनने से व्यक्ति के जीवन में आर्थिक और कार्य क्षेत्र से संबंधित समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं। ऐसे जूतों के दोष के कारण कई काम बिगड़ जाते हैं। अब उनका क्रमशः वर्णन करूंगा।
-कभी भी उपहार में मिले हुए जूते नहीं पहनने चाहिए ।इसे शनिदेव कार्य मे बाधाएं  डालते हैं। वैसे भी सामान्य रूप से जूते किसी को उपहार में लेने अथवा  देने  नहीं चाहिए।
-चुराए हुए जूते कभी भी ना पहने। कई बार मंदिरों में ,कीर्तन आदि स्थानों से जूते अथवा चप्पल की चोरी जाती है। चोरी करने वाले ध्यान रखें कि चोरी के जूते चप्पल पहनने से वह अपने स्वास्थ्य और धन का विनाश कर रहा है।
-उधडें हुए अथवा फटे जूते पहनकर नौकरी ढूंढने अथवा महत्वपूर्ण कार्य के लिए न जाए, असफलता मिलेगी।
-ऑफिस या कार्यक्षेत्र में भूरे रंग के जूते पहनकर जाने से व्यक्ति के कार्यों में अक्सर बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं।
-चिकित्सा और लोहे से संबंधित व्यक्तियों को कभी भी सफेद जूते नहीं पहननी चाहिए।
-जल से संबंधित और आयुर्वेदिक कार्यों से जुड़े लोगों को नीले रंग के जूते नहीं पहनने चाहिए।
– कॉफी रंग के जूते बैंक के कर्मचारियों और अध्ययन क्षेत्र से जुड़े हुए लोगों को नहीं पहनी चाहिए। इससे आपकी कार्यशैली में दिक्कतें बनी रहती हैं। आपके कार्य को संदेह की दृष्टि से देखा जाता है।
-यह भी ध्यान रखें की अपने जूते अथवा चप्पल पर लगातार पाॅलिस और चमक सदैव बनी रहनी चाहिए। यह आपके व्यक्तित्व का प्रभाव दूसरे लोगों पर छोड़ती है।
– ज्योतिष और वास्तु में जूते चप्पल (मृत चर्म) शनि राहु के कारक हैं ।जब भी हम अपने बेडरूम में जूते रखते हैं तो पति पत्नी के बीच का लगाव व सम्मान धीरे धीरे कम हो जाता है।
– जो व्यक्ति बाहर से आकर अपने चप्पल, जूते, मोजे इधर-उधर फेंक देते हैं। उन्हें शत्रु बहुत परेशान करते हैं। कार्य में बाधा उत्पन्न होती हैं और उनकी कार्य योजना ठीक प्रकार से पूर्ण नहीं हो पाती।
– जूते पहनकर भोजन करने से शरीर में धीरे-धीरे नकारात्मकता आ जाती है और शरीर की पवित्रता भंग हो जाती है।
-घर में जूतों के लिए अलग स्थान रखें ।कभी भी मंदिर अथवा रसोई में जूते चप्पल पहनकर न जाएं। 
रसोई में महिलाएं अक्सर काम करती हैं रसोई के लिए अलग से प्लास्टिक चप्पल या कपड़े के जूते प्रयोग कर सकती हैं।  ये जूते चप्पल केवल रसोई में ही प्रयोग करें।
– भगवान को भोग लगाते समय अथवा खाना परोसने के समय  जूते निकाल कर उचित स्थान पर रखें।
 *जूतों की अशुद्धता का वैज्ञानिक कारण*
हॉस्टन यूनिवर्सिटी की रिसर्च के अनुसार 40 प्रतिशत सी.डिफ्सील नाम के बैक्टीरिया या जूतों के नीचे सोल में मौजूद रहते हैं। दवाइयों के उपयोग से अथवा अच्छी प्रकार धोने से भी ये बैक्टीरिया नहीं मरते। और जूते पहन कर खाना खाने से रिएक्ट कर शरीर के अंदर आते हैं ।हॉस्पिटल में आने जाने वाले मरीजों और उनके तामिरदादरों  में 35% लोग इस बैक्टीरिया से बीमार हो जाते  हैं।
वास्तु के अनुसार जूते चप्पल निकालने के लिए शुभ स्थान दक्षिण, दक्षिण -पश्चिम ,उत्तर- पश्चिम अथवा पश्चिम दिशा ठीक मानी गई है।
इन दिशा में उचित स्थान पर  शू रैक (shoe rack )बनाकर जूतों को उसमें ढक कर रखें।
यह भी ध्यान रहे कि मुख्य द्वार पर या मुख्य द्वार के सामने शू रैक (shoe rack) बनाना अच्छा नहीं होता है।
अक्सर सोसाइटीज में देखा  गया है कि घर के द्वार के सामने जीने के कोने में शू रैक  बने होते हैं, जो घर की उन्नति के लिए शुभ नहीं होते। हमें ऐसे स्थानों पर जूते  चप्पल रखने से बचना चाहिए।
पंडित शिवकुमार शर्मा, आध्यात्मिक गुरु व ज्योतिष रत्न
अध्यक्ष- शिवशंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केंद्र ,गाजियाबाद

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