*अगस्त्य तारे के उदय के बाद भी होती रहेगी वर्षा*(शोध लेख)
शिवशंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केन्द्र गाजियाबाद
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भारतीय ज्योतिष में नवग्रहों,तारे, उपग्रहों के उदय अस्त, राशि परिवर्तन के योग से पर्यावरण, प्राकृतिक, धार्मिक , आर्थिक गतिविधियों पर प्रभाव पड़ता है।
जिस प्रकार सूर्य के आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश के समय मानसून (बर्षा)
के आगमन का संकेत होता है जो प्रतिवर्ष 22 जून के आसपास का समय होता है।इसी प्रकार वर्षा के समापन होने के संकेत भी भारतीय ज्योतिष के तत्त्वदर्शी ऋषि मुनियों ने किया।
अगस्त्य ऋषि के नाम से प्रसिद्ध अगस्त्य तारा प्रतिवर्ष सिंह संक्रांति के 17 अंशों के आस पास उदय होता है। जो सूर्यास्त के पश्चात दक्षिण पूर्व दिशा में दिखाई पड़ेंगे।
ऐसी मान्यता है कि अगस्त्य तारे के उदय के पश्चात वरूण देव अपने लाव लश्कर (बादलों) को समेटना आरंभ कर देते हैं। अर्थात् वर्षाकाल समाप्त हो जाता है। किंतु इस बार अगस्त्य तारे के उदय के पश्चात भी वर्षा होती रहेगी। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य व चन्द्र के नक्षत्रों के अनुसार वर्षा दिवसों का भी निर्धारण किया गया है।27 नक्षत्रों को लिंग के अनुसार स्त्री, पुरुष व नपुंसक लिंग में वर्गीकरण किया गया है। जब सूर्य व चन्द्रमा स्त्री-पुरुष नक्षत्रों में होते हैं तब भारी वर्षा के योग बनते हैं,स्त्री – स्त्री नक्षत्रों के योग से बादलों का आवागमन रहता है वर्षा नाममात्र को होती है। सूर्य व चन्द्रमा पुरुष-पुरूष व पुरुष-नपुंसक नक्षत्रों में होते हैं तब वर्षा , बादल आदि नहीं होते हैं।
अगस्त्य तारे का उदय 29अगस्त को होगा । किंतु सितंबर माह में कई बार सूर्य व चन्द्रमा स्त्री- पुरुष में आएंगे। इससे पूरे माह वर्षा होती रहेगी।
पं.शिवकुमार शर्मा
अध्यक्ष- शिवशंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केन्द्र गाजियाबाद
9811893069
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