*प्रैस विज्ञप्ति*
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*विशेष मुहूर्त में ही करें गणपति विराजमान*
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*इस बार गणेश चतुर्थी पर बन रहे हैं अशुभ योग*
शिवशंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केन्द्र गाजियाबाद
इस वर्ष गणेश /विनायक चतुर्थी 22 अगस्त दिन शनिवार को है।इस दिन दक्षिण भारत की देखा देखी उत्तर भारत में भी गणेश चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी तक लोग अपने अपने घरों में गणपति जी को लाकर विराजमान करते हैं तथा श्रद्धा पूर्वक पूजन, आरती, भोग, विसर्जन के कार्यक्रम होते हैं 2 से 10 दिन तक चलने वाला यह पर्व लोग श्रद्धा पूर्वक इसे मनाते हैं और गणेश जी की प्रतिमा लाकर अपने घरों में स्थापित करते हैं। ऐसा माना जाता है कि गणेश जी बुद्धि, विवेक ,धन-धान्य, रिद्धि-सिद्धि के स्वामी है उन को प्रसन्न करने से पूरे वर्ष घर में शुभ प्रभाव रहते हैं। किंतु इस वर्ष गणेश चतुर्थी पर अशुभ योग बन रहे हैं। शनिवार को हस्त नक्षत्र होने से ज्योतिष में मृत्यु योग बनता है इस योग को बहुत अशुभ और कार्य विनाशक माना गया है अतः शुभ कार्यों में इस योग का परित्याग करते हैं।
इस दिन चतुर्थी शाम 7:57 बजे तक है और हस्त नक्षत्र भी शाम 7:10 बजें तक है इसलिए पूरे दिन अशुभ मृत्यु योग रहेगा। किन्तु समस्त अनुष्ठान इसी दिन पूरे करने पड़ते हैं।इसके परिहार के लिए शास्त्रों में वर्णित चौघडिया मुहुर्त शुभता प्रदान करने वाला है।
22 अगस्त को दोपहर 12:22 बजे से शाम 4:48 बजे तक चर, लाभ व अमृत के चौघड़िया है।इस अवधि में गणपति जी को अपने घर लाकर विराजमान कर सकते हैं। इस अवधि में स्थिर व चर लग्न भी शुभ हैं।
वैसे भी मध्याह्न के पश्चात अशुभ व क्रूर योगों का प्रभाव कम हो जाता है।
*भाद्रपद शुक्ल द्वितीया को चन्द्रमा के दर्शन करना निषेध है।*
जनश्रुति के अनुसार भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को चांद के दर्शन करने से एक वर्ष में कोई कलंक या आक्षेप लग सकता है।कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण को भी इसका कलंक लग गया था ।यदि
भूलवश उस दिन चन्द्रमा के दर्शन हो जाए तो प्रात:काल सफेद वस्तुओं का दान किसी ब्राह्मणी को करना चाहिए। गणेश जी के किसी भी मंत्र का जाप करना चाहिए।
पं.शिवकुमार शर्मा,
अध्यक्ष- शिवशंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केन्द्र गाजियाबाद
9811893069
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