*कालसर्प दोष के बारे में भ्रांति निवारण*
*सदैव हानिकारक नहीं होता है कालसर्प दोष*
*कालसर्प दोष में जन्मी बड़ी बडी हस्तियां*
*कालसर्प दोष की शांति हेतु कुछ उपाय*
ज्योतिष में कालसर्प दोष का प्रचलन कुछ दशकों से बढ़ा है। यद्यपि सर्प दोष तो शास्त्रों में पहले से ही वर्णित है। जन्म कुंडली में कालसर्प योग का निर्माण तब होता है जब लग्न कुंडली में 12 खानों में राहु और केतु के मध्य में सारे ग्रह एक और आ जाते हैं और दूसरी ओर सभी भाव खाली होते हैं।
क्योंकि कुंडली में राहु और केतु इसे अंग्रेजी में नॉर्थ पोल और साउथ पोल कहते हैं।
एक दूसरे से हमेशा 180 अंश दूर रहते हैं। इन दोनों ग्रहों के बीच 6 भावों का अंतर होता है और इन्हीं छ: भावों में एक और सभी ग्रह होते हैं तो कालसर्प दोष का निर्माण होता है ।
समाज में इस कालसर्प दोष के बारे में बहुत सी भ्रांतियां फैली हुई है।
इन भ्रान्तियों के अनुसार ऐसा माना जाता है कि कालसर्प दोष में जन्म लेने वाला बालक जीवन भर परेशान रहता है।
जीवन संघर्ष मय हो जाता है
जीवन के महत्वपूर्ण कार्य समय पर पूरे नहीं होते हैं।
जीवन में निराशा का भाव रहता है और बार-बार हानि और धोखा उठाना पड़ता है।
इसी प्रकार कई नकारात्मक धारणा इन लोगों के मन में फैलाई गई है।
जबकि यह अर्ध सत्य है।
कालसर्प दोष सदैव हानिकारक नहीं होता है।
राहु और केतु सदैव वक्री गति से चलते हैं । राहु को काल सर्प का मुख कहा गया है और केतु को काल सर्प की पूंछ।
जब राहु की ओर से कालसर्प योग बनता है तो कुछ हानिकारक होता है। किंतु जब केतु की ओर कालसर्प योग बनता है। तो यह श्रेष्ठ माना जाता है।
उदाहरण स्वरूप भारत के पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की जन्म कुंडली में कालसर्प दोष था। किन्तु राहु की दशा आने पर उन्हें वह सब कुछ मिला जो किसी के लिए भी असंभव होता है । राहु की महादशा में वे परमाणु वैज्ञानिक बनें, परमाणु परीक्षण किया ।भारत के राष्ट्रपति बने और भारत का सबसे बड़ी उपाधि भारत रत्न प्राप्त की।
सचिन तेंदुलकर,जवाहरलाल नेहरू, जॉर्ज बुश आदि बड़ी बड़ी हस्तियों की कुंडली में भी काल सर्प दोष था। जिसने उन्हें विश्व का सबसे श्रेष्ठ व्यक्ति बनाया।
इसीलिए कालसर्प दोष का नाम सुनकर घबराने की आवश्यकता नहीं है।
यदि आपकी कुंडली में कालसर्प दोष का निर्माण राहु की ओर से हो रहा है तो थोड़ा बहुत परेशान अवश्य करता है।
*कालसर्प दोष निवारण के उपाय*
कालसर्प दोष के निवारण के लिए सावन मास बहुत अच्छा है। श्रावण मास भगवान शिव को सबसे प्रिय है। कालसर्प दोष के बुरे प्रभाव को दूर करने के कुछ उपाय बता रहा हूं, जो सामान्य रूप से सभी लोग कर सकते हैं।
श्रावण के महीने में प्रतिदिन शिवलिंग पर जल व दूध का अभिषेक करना चाहिए।
श्रावण के सोमवार को विशेष रूप से भगवान शिव की आराधना करें। रुद्राभिषेक का भी आयोजन कर सकते हैं।
शिवरात्रि और नाग पंचमी पर्व सावन के महीने में आते हैं।इन पर्व में कालसर्प की शांति के लिए विशेष पूजा अर्चना , जाप आदि का आयोजन करके कालसर्प दोष के प्रभाव को दूर किया जा सकता है।
चांदी के सर्प का जोड़ा सोमवार , शिवरात्रि अथवा नाग पंचमी को दूध में रखकर शिवलिंग पर चढ़ाने से भी इस दोष से निवृत्ति हो सकती है।
सर्प गायत्री जाप अथवा महामृत्युंजय जाप भी इसके निवारण के बड़े उपाय हैं।
त्रंबकेश्वर नासिक या उज्जैन आदि तीर्थ क्षेत्रों में में सर्प पूजा कराने से
कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है।
कालसर्प दोष निवारण के लिए सामान्य उपायों में कुत्ते की सेवा करना, कुत्ता पालना , कुत्ते को दूध रोटी खिलाना बहुत अच्छा उपाय माना गया है।
कुष्ठ रोगियों,असहाय लोगों, श्रमिक वर्ग की सेवा करना राहु संबंधी दोषों को शांत करते हैं।
ऐसा भी माना जाना है जिन व्यक्तियों की जन्म कुंडली में कालसर्प दोष होता है और जब भी उनके जीवन में राहु अथवा केतु की महादशा आती है ।उस अवधि में उन्हें बहुत समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
उपरोक्त अवधि में कालसर्प दोष की शांति के उपाय अवश्य करते रहे।
वास्तव में कालसर्प दोष से डरने की आवश्यकता नहीं है ।किसी विद्वान आचार्य या ज्योतिषी से मिलकर कालसर्प दोष के स्वरूप को जानना चाहिए और उसके बारे में फैली अफवाहों का निराकरण करना चाहिए। यदि थोड़ा बहुत प्रभाव होता भी है तो उपरोक्त सामान्य उपाय स्वयं करते रहें।
पंडित शिवकुमार शर्मा, आध्यात्मिक गुरु और ज्योतिषाचार्य।
अध्यक्ष- शिवशंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केंद्र गाजियाबाद
No Comments yet!