*कृषि और मौसम विज्ञान पर घाघ की कहावतें, कितनी सार्थक*
*पौष मास की कुछ कहावतें*
घाघ कवि कृषि और मौसम वैज्ञानिक के रूप में बहुत प्रसिद्ध हैं। शकुन ,अपशकुन, बादल ,हवा की चाल आदि लक्षणों के द्वारा उन्होंने जो भी भविष्यवाणी की वैसे ही निकलती थी ।सन 1753 में जन्मे घाघ कवि अकबर के राज दरबार के मौसम वैज्ञानिक थे।
आज हम उनकी पौष माह के बारे में मौसम संबंधी कहावतों पर विचार करेंगे
*शुक्रवार की बादरी ,रही शनिश्चर छाय*।
*कह घाघ सुन भड्डरी बिन बरसे ना जाय।।*
अर्थात शुक्रवार को आकाश में बादल हो और शनिवार तक बादल छाए रहे तो बिना वरसे नहीं जाते हैं।
*पूस मास दशमी अधियारी*।
*बदली घोर होय अधिकारी।*
*सावन बदि दशमी के दिवसे।*
*भरे मेघ चारों दिशि बरसे।*।
अर्थात पौष महीने की दशमी को बादल छाए रहे तो अगले वर्ष श्रावण कृष्ण दशमी को घनघोर वर्षा होती है।
कल दिनांक 8 जनवरी 2021 को पौष माह की दशमी है। आप लिख लीजिए।
*पानी बरसे आधे पूष, आधा गेहूं आधा फूस*।
अर्थात पौष मास में अमावस्या के आसपास बरसात हो तो अगले रबी के सीजन में गेहूं अधिक मात्रा में पैदा होते हैं।
वैसे भी जबसे पौष मास लगा है वर्षा हो रही है। इसका अर्थ यह हुआ कि गेहूं की अगली फसल बहुत अच्छी होने वाली है।
*पूस उजेली सप्तमी, अष्टमी और नवमी जाज।*
*मेघ होय तो जान लो अब शुभ होइहि काज।*
अर्थात पौष मास के शुक्ल पक्ष की भी सप्तमी, अष्टमी और नवमी को यदि आसमान में बादल छाए रहे। तो आगे का समय बहुत अच्छा आने वाला है ,धन-धान्य की कमी नहीं रहेगी।
इस पौष माह में शुक्ल पक्ष की सप्तमी ,अष्टमी और नवमी 20, 21 और 22 जनवरी को आएगी। आप इन तिथियों पर को भी अंकित कर लेंगे।
इस प्रकार घाघ कवि की हजारों कहावतें मौसम और खेती-बाड़ी के बारे में हैं। आगे के लेखों में उनकी भी चर्चा करेंगे।
पंडित शिवकुमार शर्मा, आध्यात्मिक गुरु और ज्योतिष रत्न।
अध्यक्ष- शिवशंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केंद्र ,गाजियाबाद
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