ग्रहों के गुण प्रवृत्ति और स्वभाव
शुक्र ग्रह
शुक्र ग्रह सबसे चमकीला ग्रह है जो सूर्य के निकटवर्ती राशि में रहता है। इसीलिए सूर्य उदय से पहले पूर्व दिशा में और सूर्यास्त के बाद पश्चिम दिशा में चमकता हुआ देदीप्यमान प्रकाश पुंज यह ग्रह है। शुक्र ग्रह का रंग श्वेत है। यह वृषभ और तुला राशि का स्वामी है। कन्या इसकी नीच राशि है ।मीन राशि इसकी उच्च राशि है। तुला के 15 अंशों तक यह मूलत्रिकोण में रहता है। शुक्र की मित्र राशियां मिथुन, कन्या, मकर और कुंभ है। शत्रु राशियां कर्क और सिंह हैं ।इसी प्रकार बुध, शनि और राहु शुक्र के मित्र ग्रह हैं। सूर्य और चंद्र शत्रु ग्रह हैं । मंगल और केतु सम हैं ।यह स्त्री ग्रह है। पुरुष की कुंडली में यह सप्तम का कारक है यह एक राजसी ग्रह है ,इसका स्वभाव सौम्य, तत्व वायु और इसके नक्षत्र भरणी ,पूर्वाफाल्गुनी और पूर्वाषाढ हैं। प्रथम भाव में शुक्र अच्छा फल देने वाला होता है। शुक्र भौतिक ऐश्वर्य और विलासिता का ग्रह है ।
वास्तु चक्र के अनुसार यह आग्नेय दिशा का स्वामी है । यदि आपके भवन में आग्नेय कोण बढ़ा हुआ हो या कटा हुआ हो दोनों ही अशुभ होते हैं। घर की महिला सदस्य अस्वस्थ हो सकती हैं या असंतुष्ट हो सकती हैं। इसलिए शुक्र के कृपा पाने के लिए अपने भवन के आग्नेय कोण को ठीक रखना चाहिए ।जिन व्यक्तियों की कुंडली में शुक्र उच्च राशि का , मित्र राशि या स्वराशि का हो तो बहुत शुभ फलदायक है। उसे सभी भौतिक सुख मिलते हैं ।घर बंगला , गाड़ी, नौकर चाकर आदि सुविधाएं प्राप्त होती हैं । यदि किसी भाव में सूर्य के साथ में पूर्ण अस्त होता है तो यह गृहस्थ जीवन को नष्ट कर देता है, संतान विलंब से होती है, कभी-कभी होती भी नहीं है ।
शुक्र के स्वामी इंद्रदेव है ।सफेद रंग इनका प्रिय रंग है। स्वाद खट्टा है। जिनकी कुंडली में शुक्र अच्छा होता है ऐसी महिलाएं खट्टी चटपटी वस्तुएं खाने की शौकीन होती है ।शुक्र अपने स्थान से सप्तम भाव को पूर्ण दृष्टि से देखता है। जिसकी सप्तम भाव पर शुक्य की दृष्टि हो उस व्यक्ति का चरित्र अच्छा नहीं होता है। मंगल के साथ शुक्र होना प्रेम प्रसंगों की अधिकता देता है।
पंडित शिवकुमार शर्मा आध्यात्मिक गुरु एवं ज्योतिष रत्न
अध्यक्ष -शिवशंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केंद्र गाजियाबाद
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