*ज्योतिष शास्त्र में गृहिणी का महत्व*
गृह ( घर) है ऋणी जिसका अर्थात् गृहिणी।
गृहिणी शब्द के विश्लेषण में घर की महिला का महत्व और उपयोगिता का पता चलता है। वास्तव में गृहिणी घर की शोभा होती है। उसके बिना घर सूना सूना लगता है।
शास्त्रों में महिला को गृह लक्ष्मी माना गया है।जैसा कि मनुस्मृति का वचन है-
* यत्र नार्यस्तु पूजयन्ते,रमन्ते तत्र देवता:.।
यत्रैतास्तु न पूजयन्ते,सर्वास्तत्राफला: क्रिया:।।”
अर्थात् जहां ,जिस घर व समाज में महिलाओं का सम्मान होता है वहां देवता निवास करते हैं,सुख समृद्धि लगातार बढ़ती रहती है,और जिस स्थान पर नारी का सम्मान नहीं होता है ,उस स्थान व घर की समस्त क्रियाएं निष्फल हो जाती है।
नारी के कई रूप हैं, बेटी, बहिन,पत्नी, माता ,बुआ,दादी,चाची ताई, भाभी आदि। ज्योतिष में नारी के इन रुपों को नवदुर्गा में परिभाषित किया गया है। क्योंकि नारी मानव की वह शक्ति होती है जो प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से उसको सम्बल प्रदान करती है।
ज्योतिष में पत्नी को गृहलक्ष्मी माना गया है। शुक्र नारी का प्रतिनिधि ग्रह है जो ज्योतिष मे वैभव ,सुख समृद्धि, विलासितापूर्ण जीवन प्रदान करने वाला है।
बेटी, बहिन,बुआ को बुध का प्रतीक माना गया है,इनको प्रसन्न करने से व्यवसाय में उत्तरोत्तर वृद्धि ,घर में बरकत रहती हैं।
भाभी,माता, दादी, चाची,ताई को मां दुर्गा का स्थान मिला है जिनका प्रतिनिधित्व ग्रह चन्द्रमा है ।इनको प्रसन्न करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती है , सम्मान मिलता है और घर ,सम्पत्ति वाहन आदि का सुख प्राप्त होता है।
80 प्रतिशत जन्मपत्रिकाओं के अध्ययन व प्रत्यक्ष जानकारी के आधार पर यह पाया गया है कि विवाह के पश्चात व्यक्ति की आर्थिक स्थिति में बहुत सुधार हुआ है। मैंने कई व्यक्तियों को तो विवाह के पश्चात आसमान छूते हुए देखा है। क्योंकि पत्नी के रूप में गृहलक्ष्मी के आने से शुक्र ग्रह को बल मिलता है।
जो व्यक्ति, समाज,देश उन्नति चाहता है नारी के इन रूपों का यथाशक्ति व यथासामर्थ्य सम्मान करें।
पं. शिवकुमार शर्मा,अध्यक्ष-
शिवशंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केन्द्र गाजियाबाद
9811893069
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