नीवं रखने में शेषनाग/राहु की दिशाओं का विचार

27Oct
गृह निर्माण हेतु नींव खोदने का मुहूर्त
हर किसी की का सपना होता है कि उसके घर में सुख शांति बनी रहे. जीवन और परिवार सुखमय रहे. परन्तु भवन निर्माण के समय अनजाने में कुछ गलतियाँ हो जाती है जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
यदि आप घर निर्माण करा रहें हैं या बनाने की सोच रहें हैं तो राहू मुख का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए. नींव घर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है. जब भी घर का शिलान्यास या नींव की खुदाई प्रारंभ कर रहें हों तो राहू मुख का ध्यान रखने से आपको लाभ हो सकता है. इसके लिए आपको राहू का मुख, पेट व पूंछ के बारें में जानना आवश्यक होता है. सर्पाकार राहू हर जमीन पर अपना शरीर फैलाये लेटे हुए स्थिति में होता है.
वास्तु शास्त्र के अनुसार घर बनाते समय नींव खनन प्रारंभ करते समय राहू के शरीर के किस हस्से में खुदाई शुरू की जाए ताकि उसके शरीर के हिस्से में कोई प्रहार न हो इसकी जानकारी हम आपको दे रहें हैं.
राहू की स्थित का पता कैसे लगाएं
राहू किसी एक स्थित में नहीं रहता है सूर्य के साथ-साथ उसकी भी स्थित बदलती रहती है जिसे इस प्रकार समझ सकते हैं. जब वृष, मिथुन व कर्क राशि में होता है तो राहु का मुख भूमि के आग्नेय कोण में होता है और यदि सूर्य का स्थान सिंह, कन्या व तुला राशि में होने पर राहु का मुख ईशान कोण में एवं वृश्चिक, धनु व मकर राशि में सूर्य के रहने पर राहु का मुख वायव्य कोण में तथा कुम्भ, मीन व मेष राशि में सूर्य राशि के होने से राहु का मुख नैऋत्य कोण में होता है.
सरल भाषा में समझने के लिए राहू का मुख जिस दिशा में होता है उसके पिछले दो कोण पर पेट एवं पूंछ होती है. आप जब भी घर की नींव खुदाई प्रारंभ कर रहें हैं तो पूर्व, पश्चिम, उत्तर व दक्षिण दिशा में नहीं करना चाहिए.
इस दिशा से करें नींव खुदाई प्रारम्भ
जब सूर्य सिंह राशि में हो ,कन्या में या तुला में हो तो
   अग्निकोण [ दक्षिण पूर्व ] से नीव खोदना आरम्भ करना चाहिए।
जब सूर्य वृश्चिक धनु या मकर राशि से ऊपर हो
तो ईशानकोण [ उत्तर-पूर्व ] से नींव को खोदना चाहिए।
जब सूर्य कुम्भ मीन व मेष में हो तो
नींव वायव्यकोण [ उत्तर-पश्चिम ] से खोदना चाहिए।
जब सूर्य वृषभ मिथुन और कर्क में हो तो
नीव नैरित्या कोण [ दक्षिण-पश्चिम ] से शुरू करे।
जब सूर्य 5/6/7 राशि में हो तो राहु मुख ईशान पेट वायव्य और पूँछ नैरित्य कोण में होता है।
ऐसी दशा में अग्निकोण [ दक्षिण-पूर्व ] से खोदना शुरू करे।
इसीप्रकार
सूर्य की स्थिति को देखते हुए
राहु मुख को छोड़ कर
उपयुक्त दिशा से ही नींव खोदना चाहिए।
*विशेष जानकारी*
*जब भूमि सो रही हो तो नीव नही खोदना चाहिए।*
जब सूर्य नयी राशि में प्रवेश करता है [ संक्रांति ] उससे 5,7,9,10, 21 और 24वें दिन भूमि शयन की स्थिति में होती है अथवा जब किसी दिन चन्द्रमा का नक्षत्र सूर्य के नक्षत्र से 5,7,9,12,19,26वां हो तो भूमि उस दिन भी सोती है।
*गृह निर्माण हेतु नींव खोदने का मुहूर्त*
नींव खुदाई हेतु अधोमुखी नक्षत्र
मूला अश्लेषा विशाखा कृतिका पूर्वाफाल्गुनी पूर्वाषाढ़ा पूर्वभाद्रपद भरणी और मघा शुभ है।
*नीव खोदने की तिथि*
इस कार्य हेतु रविवार, मंगलवार व शनिवार के अलावा सभी शुभ दिन होता है।
Pt. Shiv Kumar Sharma

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