*मंगलवार को होगा दुर्गा सप्तमी का व्रत*
*बुधवार को दुर्गा अष्टमी में कंजकों को भोग लगेगा।*
इस वर्ष नवरात्रि में चतुर्थी तिथि का छय होने के कारण एक नवरात्र कम हो गया है। इसलिए दुर्गा मां 8 दिनों में ही विदा हो जाएंगी। इस कारण जिन साधकों के यहां अष्टमी पूजन होता है। वे मंगलवार को दुर्गा सप्तमी का व्रत रखेंगे। अगले दिन दुर्गा अष्टमी को दुर्गा माता का कलश के जल को सूर्य को अर्घ्य देकर और नारियल को कन्याओं में बांट देंगे। कन्याओं को खाना खिलाएंगे।
कन्याओं के भोग में हलवा ,पूरी और चने का विशेष महत्व है।
*कन्याओं को भोग लगाने की विधि*
प्रातः काल उठकर घर की महिलाएं स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ रसोई में दुर्गा मां के लिए भोग सामग्री बनाएं ।इसमें हलवा, पूरी और काले चने का प्रसाद बनता है। कोई कोई आलू की सब्जी बना देते हैं।
सबसे पहले मां दुर्गा की ज्योत करें और मां को आठ पूरी हलवा और चने का भोग लगाएं ।तत्पश्चात कन्याओं को भोजन कराएं। इसमें नौ कन्याओं को भोजन कराने का विधान है। कभी-कभी कन्याओं कम पड़ जाती हैं ,इसलिए उनकी थाली अवश्य निकालें और सौभाग्य से कुछ कन्या अथवा बालक अतिरिक्त आ जाते हैं तो आपके सौभाग्य का विषय है। कन्या भोजन समाप्ति के पश्चात कन्याओं को तिलक लगाए और उनको कुछ उपहार अथवा धन अवश्य दें व उनके पैर जरूर छुएं।
ऐसा करने से दुर्गा मां के व्रत का परायण होता है।
जिन साधकों के यहां नवमी पूजी जाती है ।वे साधक 13 अक्टूबर , बुधवार को अष्टमी का व्रत रखेंगे। और अगले दिन 14 अक्टूबर को दुर्गा नवमी में कंजक जिमाएंगे।इस वर्ष दुर्गा सप्तमी, दुर्गा अष्टमी, दुर्गा नवमी व दशहरा छत्र, श्रीवत्स ,सौम्य और धाता आदि शुभ योगों में आ रहे हैं ।जो भक्तों के कल्याण और विश्व के कल्याण के लिए उत्तम माने गए हैं।
*दशहरा पूजन और रावण दहन का समय*
घर में दशहरा पूजन 15 अक्टूबर दिन शुक्रवार को अभिजित मुहूर्त 11:36 बजे से 12 :24 बजे तक बहुत शुभ है।किन्तु इस मुहूर्त में 10:30 से 12:00 तक राहुकाल को त्यागना चाहिए।
इसके अतिरिक्त स्थिर लग्न अर्थात वृश्चिक लग्न प्रातः 8:53 बजे से आरंभ होकर 10:30 बजे तक रहेगा। इसमें भी दशहरा पूजन कर सकते हैं।
इसके पश्चात 14:57 बजे से 16:25 बजे तक स्थिर लग्न कुंभ लग्न में भी शुभ मुहूर्त है।
*रावण दहन का शुभ मुहूर्त*
यद्यपि प्रशासन की गाइड लाइन के अनुसार इस वर्ष रामलीलाओं का आयोजन नहीं हो रहा है, किन्तु कुछ लोग प्रतीकात्मक रूप से रावण का दहन करेंगे । रावण दहन का शुभ समय 19:26 बजे से 21: 22 बजे तक श्रेष्ठ है। यह भी स्थिर लग्न वृषभ लग्न है।
पं.शिवकुमार शर्मा
आध्यात्मिक गुरु एवं ज्योतिषाचार्य, गाजियाबाद
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