*राहु मंगल के बीच सूर्य आने पर होती है वज्रपात की घटनाएं*
वर्तमान में गत कई दिनों से देशभर में आकाशीय बिजली गिरने से अनेक लोगों की मौतें हो रही हैं ।इस कारण आज का जनमानस डरा और सहमा हुआ है ।किंतु ज्योतिष शास्त्रों में पहले से ही यह वर्णित है।
घटना घटने के बाद ही ऐसे ज्योतिषीय शास्त्रों को खंगालने का विचार आता है क्योंकि ज्योतिष एक खोज का विषय है और मौसम के साथ-साथ उसे सत्यता से मिलान करने का भी विषय है ।ऐसी भविष्यवाणियां पहले से ही ज्योतिष शास्त्रों में लिखी हुई है।
ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार मौसम की भविष्यवाणी करते हुए कहा गया है:
*आगे मंगल पीछे राहु, मध्य विराजे भान।*
*नित आकाशीय उपद्रव हो, जाएं सैकड़ों जान।*
अर्थात जब मंगल सूर्य की राशि से आगे हो तथा राहु सूर्य की राशि से पीछे हो तो आकाशीय बिजली या वज्रपात से पृथ्वी कांप उठती है। अर्थात् आकाशीय बिजली से जन धन की हानि होती है।
इस समय सूर्य मिथुन राशि में , मंगल उससे आगे की राशि कर्क में चल रहे हैं और राहु वृषभ राशि में गोचर में चल रहे हैं।
ज्योतिष में राहु ,मंगल ,सूर्य तीनों ही अग्नि तत्व के कारक हैं ।राहु मंगल साथ होने से अंगारक योग बनता है। और जब तीनों लगातार एक ही राशि के अंतर से हो परम विध्वंसक योग बनता है। इससे आकाशीय बिजली व भयंकर अग्निकांड से जनधन की हानि होती है
सूर्य 16 जुलाई को कर्क राशि में आकर इस उपद्रव को शांत करेंगे।
वैसे लोक प्रचलन के आधार पर यह भी कहा जाता है कि श्रावण के बादल चुपचाप बरसते हैं और अन्य दिनों में गड़गड़ाहट और वज्रपात के साथ शोर मचाते हैं।
कर्क राशि में सूर्य आने पर श्रावण मास की औपचारिकताएं आरंभ हो जाएंगी। रिमझिम बरसात का मौसम आरंभ होगा।
पं. शिवकुमार शर्मा आध्यात्मिक गुरू ज्योतिषाचार्य।
अध्यक्ष- शिवशंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केंद्र गाजियाबाद
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