वास्तु है सबके लिए ( भाग 18) द्वार वेध का वास्तु विश्लेषण

27Oct
वास्तु है सब के लिए ( भाग- 18)
*द्वार वेध का वास्तु विश्लेषण*             जब कोई व्यक्ति अपना मकान बनाता है या कोई भवन ,फैक्ट्री, कार्यालय खोलता है तो शुभ मुहूर्त के साथ-साथ स्थानीय रूप से सुंदर जमीन का चयन करता है। इसके आसपास कोई नकारात्मक वस्तुएं ना हो ।किंतु कभी-कभी  अनचाहे में कुछ नकारात्मक वस्तुएं हमारे घर ,मकान ,कार्यालय ,दुकान  या फैक्ट्री के आस-पास दिखाई पड़ती है। इसका कालांतर में घर के लोगों के स्वास्थ्य  एवं व्यवसाय आदि पर बहुत नकारात्मक प्रभाव पड़ता है‌। कुछ नकारात्मक वस्तुएं ऐसी होती हैं, जो हमारे घर अथवा अन्य संस्थानों के द्वार के सामने होती हैं जो कदापि भी शुभ नहीं होती है ,इसे द्वार वेध कहते हैं।
सबसे पहले द्वार वेध  *टी प्वाइंट* के कारण होता है।  जब कोई सड़क घर के ठीक सामने से आकर द्वार पर मिलती है  , जो दाएं बाएं मुड़ कर जाती है ।इससे जितने भी  वाहन वहां  से आते हैं उनकी तेज लाइट घर पर पड़ती है, जो नकारात्मक प्रभाव छोड़ती है। ऐसे घर का विकास ठीक प्रकार से नहीं हो पाता कार्यों  में रुकावट , स्वास्थ्य और धन का अभाव रहता है। 70 से 90% ऐसे मकानों में कभी भी शुभ 
 संकेत नहीं देखे हैं ।इसीलिए  टी पाइन्ट के मकान लेने से या बनवाने से बचना चाहिए। यदि आपका मकान टी पॉइंट पर है, तो कुछ उपाय कर सकते हैं घर का द्वार  पश्चिम या दक्षिण में है तो द्वार की बाउंड्री के बाहर या अंदर बड़े-बड़े पेड़ अशोक, बोतल पाम, नीम आदि लगा सकते हैं। ताकि सामने से आने वाली नेगेटिव ऊर्जा घर को दूषित ना करें ।घर के मुख्य द्वार पर एक पाकुआ मिरर लगा सकते हैं। पाकुआ  मिरर में चारों तरफ की नेगेटिव एनर्जी डिस्पोज करने की क्षमता होती है ।उत्तर पूर्व  दिशा वाले मकान में पाकुआ मिरर/ शीशा लगा सकते हैं।
*द्वार वेध में दूसरा स्थान  घर के द्वार के सामने बिजली का खंभा, कोई भारी पेड़ ,किसी  के मकान का कोना होने पर घर के द्वार का वेध  हो जाता है ।ऐसे घरों में आर्थिक  विषमताएं देखी गई है। यदि घर के सामने ऐसा है तो आप एक बड़ा शीशा अर्थात् पाकवा मिरर द्वार के बाहर  की ओर देखता हुआ लगाएं। इससे उस खंभे, पेड़ अथवा घर के कोने की नकारात्मक ऊर्जा उससे टकराकर हट सकती है ।यदि आपके घर के सामने बरगद या पीपल का पेड़ है  तो वह अशुभ होता है ।
द्वार वेध का तीसरा कारण घर के द्वार के सामने कोई धार्मिक स्थान जैसे मंदिर ,मस्जिद , मजार आदि होता है ,वह तो बहुत ही भयानक होता है ।मैंने कई स्थानों पर देखा है कि घर के द्वार के ठीक सामने मंदिर का द्वार खुलता है तो गृह स्वामी का स्वास्थ्य बहुत ही खराब रहता है। कई गृह स्वामी तो असाध्य रोग से पीड़ित है। मेरे पास गाजियाबाद के  ही 5  उदाहरण हैं ।
घर के द्वार के सामने दायें-बायें, पीछे श्मशान क,ब्रिस्तान आदि होने से घर अशुभ रहता है। घर में आकस्मिक घटनाएं घटती रहती हैं ।घर के सदस्यों का स्वास्थ्य अच्छा नही रहता  है और वहां पर डर का माहौल हमेशा रहता है। इसलिए श्मशान व कब्रिस्तान के स्थान से तो घर बनाने से बचना ही चाहिए। उपरोक्त द्वार वेध के कारणों के द्वारा उत्पन्न दोषों को दूर करने के लिए  आप अपने घर की बाह्य एनर्जी बढ़ाएं ,जैसे घर के चारों ओर तांबे की तार लगा दे । द्वार पर हनुमान जी के चरणों का सिंदूर का द्वार के दोनों  ओर 9  * 9 इंच का स्वास्तिक बनाए।
घर के द्वार/ चौखट के ऊपर बाहर  और अंदर की तरफ समान आकार के दक्षिणावर्ती गणेश की मूर्ति लगाएं। दक्षिणावर्ती का अर्थ होता है ,जिन गणेश जी की सूंड दाहिने हाथ की ओर होती है ।
एक और उपाय- तीर के आकार की लोहे तीन या पांच   लोहे या तांबे की छड़ें बनाएं और उनका नुकीला  हिस्सा द्वार के बाहर की और देखता हुआ लगा दे, ताकि बाहर से आने वाली एनर्जी उन तीर के नुकीले भागों का सामना न कर सके।
 घर के द्वार पर पर्याप्त प्रकाश रखें और सायंकाल से लेकर  सोने तक वह प्रकाश होता रहे, तो उस भवन  नेगेटिव एनर्जी कम हो आएगी । घर के द्वार  या छत के ऊपर कपिध्वज भी लगा सकते हैं।
पंडित शिवकुमार शर्मा, आध्यात्मिक गुरु एवं ज्योतिष रत्न 
अध्यक्ष- शिवशंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केंद्र गाजियाबाद
Pt. Shiv Kumar Sharma

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