वास्तु है सबके लिए (भाग 31 )पक्षियों का जोड़ा, नारियल ,एकाक्षी नारियल और श्रीफल का महत्व

27Oct
वास्तु है सबके लिए (भाग 31)
*देसी फेंगशुई के अनोखे प्रयोग*
*पक्षियों का जोड़ा, नारियल, एकाक्षी नारियल और श्रीफल का महत्व*
वास्तु शास्त्र एवं पौराणिक मान्यताओं के अनुसार पक्षियों के जोड़े, नारियल, एकाक्षी नारियल और श्रीफल सुख समृद्धि के विकास में बहुत ही उपयोगी माने गए हैं। इन वस्तुओं का प्रयोग मानव की समृद्धि विकास और शांति के लिए कैसे उपयोग कर सकते हैं मैं आपको बताऊंगा।
*पक्षियों का जोड़ा*
पक्षियों का जोड़ा प्राचीन काल से ही भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग रहा है और पक्षियों का नहीं सृष्टि के आरंभ से ही नर और मादा के जोड़े की अवधारणा चली आ रही है। बिना इनके  सृष्टि का संचालन संभव नहीं है।
पक्षियों के जोड़े का इतिहास हमें महर्षि वाल्मीकि के युग से प्राप्त होता है ।जब वे तमसा नदी में स्नान कर रहे थे, तब एक क्रोंच पक्षी का जोड़ा  जलविहार कर रहा था किसी शिकारी ने अपने बाण से एक पक्षी को मार दिया ।दूसरा पक्षी अपने साथी के वियोग में तड़प तड़प कर मर गया तो महर्षि वाल्मीकि के मन से अचानक बहेलिये के प्रति उदगार निकल पड़े, संस्कृत में प्रकट किए गए उन उदगारो़ से महर्षि वाल्मीकि संस्कृत के आदि कवि बन गये।
सुंदर पक्षियों का जोड़ा वास्तु के अनुसार भी बहुत शुभ होता है।
 हंस, तोता, मोर, चकवा -चकवी आदि शुभ पक्षियों के जोड़े की तस्वीर या मूर्ति घर में लगाने से घर के सदस्यों में परस्पर प्रेम का भाव जागृत होता है। नव दंपत्ति के कक्ष में या बेडरूम में ऐसे पक्षियों का जोड़ा रखना शुभ माना गया है। ध्यान रहे कि  चित्र में पक्षियों का जोड़ा उस कक्ष में पानी के अंदर दिखाई ना पड़े। पक्षियों का जोड़ा हमेशा उत्तर अथवा पूर्व दीवार पर रखें ताकि सोते समय और जागते समय सामने दिखाई पड़े ,इससे पति-पत्नी के बीच में  संबंध मधुर होते हैं।
घर के ड्राइंग रूम में भी इन पक्षियों के जोड़े रखे जा सकते हैं। ड्राइंग रूम में इन जोड़ों को रखने से हमारे सामाजिक संबंध बहुत अच्छे और मधुर हो जाते हैं ।विवाह योग्य कन्या के कक्ष में भी ऐसे जोड़े रखने से शीघ्र ही उनका विवाह संबंध तय हो जाता है।
*नारियल*
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नारियल कई रूपों में मिलता है।
*साधारण नारियल* : 
यह नारियल ऊपर से जटा से युक्त कठोर परत वाला नारियल पूर्णता का प्रतीक है। इसे हम ब्रह्मांड की परिकल्पना भी कर सकते हैं ।
नारियल प्रत्येक शुभ कार्य में उपयोग किया जाता है ।विवाह शादियों में वर को अपनाना हो या  सगाईं के समय ,गोद भराई के समय और इसके साथ-साथ पूजा में कलश के ऊपर स्थापित करने के समय नारियल बहुत ही उपयोग में आता है। कहते हैं कि बिना नारियल के कोई भी शुभ कार्य पूर्ण नहीं होता है।  हवन के बाद पूर्णाहुति के समय
गोला गिरि की आहुति से ही हवन की पूर्णता मानी जाती है।
*ओ३म् पूर्णमिद:पूर्णमिदं पूर्णाद्  पूर्णमुदच्यते।*
*पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते।।*
इस मंत्र की अवधारणा के अनुसार नारियल को पूर्णता का प्रतीक माना गया है। दिवाली आदि के पुण्य अवहर पर हम रंगोली बनाते हैं। महालक्ष्मी के स्वागत के लिए द्वार पर कलश भर कर आम्रपल्लव डाल कर उसके ऊपर नारियल सजाते हैं। ऐसा माना जाता है कि लक्ष्मी जी को  पूर्ण कलश बहुत प्रिय है और वे उस घर में निवास के लिए तत्पर रहती हैं। इसीलिए सभी हिंदू परिवारों में शुभ अवसर पर  सज्जा के समय नारियल युक्त कलश का चित्र और नारियल का चित्र बनाकर सकारात्मक उर्जा का निर्माण किया जा सकता है।
*एकाक्षी  लघु नारियल*
सामान्य रूप से जब हम नारियल के जटाओं को हटाते हैं उसकी कठोर परत पर तीन काले बिंदु दिखाई देते हैं। जिसमें दो बिंदु आंखों के रूप में और एक बिंदु मुंह के रूप में माना गया है।
कभी-कभी हजारों में कोई एक नारियल ऐसा निकलता है जिसमें केवल 2 बिंदु होते हैं ।इसे एक आंख और एक मुंह माना जाता है । ऐसे नारियल  को तांत्रिक लोग एकाक्षी नारियल बोलते हैं ‌। य‌द्यपि यह बहुत दुर्लभ होता है यदि आपको कहीं मिल जाए ,इसकी घर में स्थापना करें, दैनिक पूजा करें और मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए किसी विशेष मंत्र के द्वारा इस को अभिमंत्रित करें। तंत्र में यह नारियल बहुत ही उपयोगी माना गया है‌ इससे घर में धन-धान्य प्रेम और इच्छापूर्ति तक की संभावनाएं होती हैं।
आजकल कुछ लघु आकार के नारियल भी आ रहे हैं ।जिस में केवल एक ही छिद्र होता है उसे लघु एकाक्षी नारियल का जाता है। दिवाली ,होली आकर्षण तृतीया आदि पर्वों के समय उस पर कुछ विशेष मंत्रों का आह्वान करके अपने पूजन स्थल में रखने से घर में धन समृद्धि बढ़ने के अवसर आते रहते हैं।
*श्रीफल*
श्रीफल एक  कंचे के आकार का नारियल की तरह एक फल होता है। इसे अति लघु नारियल या श्रीफल कहते हैं ।श्री फल लक्ष्मी जी अर्थात लक्ष्मी जी को प्रसन्न करने का फल माना गया है। दीपावली के पर्व पर 5 या 11 श्रीफल लेकर दीपावली पूजन के समय चौकी पर रखें और लक्ष्मी जी के मंत्रों से ही उन पर अक्षत, पुष्प, नैवेद्य आदि  से पूजन करें ।अगले दिन अपनी तिजोरी या मंदिर में स्थापित कर दें।
 घर का उत्तर पूरब कोना यदि दूषित हो या कटा हुआ हो तो 11 श्रीफल 11 पीली  कौड़ियां पीले वस्त्र  में बांध कर टांगे  या किसी पात्र में रख दें।
श्रीफल को अपनी जेब  या व्यापार स्थान में या तिजोरी में रखने से भी लक्ष्मी जी कृपा बनी रहती है।
वास्तव में ये अनोखी वस्तुएं 
भारत के दिव्यता और भव्यता के दर्शन कराती हैं गिरी के उपयोग से मानव सुख समृद्धि की राह पर चल पड़ता है।
पं. शिवकुमार शर्मा,आध्यात्मिक गुरु एवं ज्योतिष रत्न।
अध्यक्ष -शिवशंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केंद्र गाजियाबाद.
Pt. Shiv Kumar Sharma

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