वास्तु है सबके लिए (भाग 33) देशी फेंगशुई के अनोखे प्रयोग: गुंजा ,राई और काली हल्दी के लाभकारी उपयोग

27Oct
वास्तु है सबके लिए (भाग 33) 
*देशी फेंगशुई के अनोखे प्रयोग* *गुंजा ,राई ,पीली सरसों ,काली हल्दी के लाभकारी उपयोग*
हमारी प्रकृति में इतने आयुर्वेदिक औषधियां और ऐसी दुर्लभ वस्तुएं विराजमान हैं ,जिनका उपयोग हम मानव जीवन के कल्याण के लिए कर सकते हैं ।लेकिन हम तो फेंगशुई के नाम से इतने प्रभावित हो चुके हैं कि अपने ब्रह्मा ,विष्णु ,महेश  जैसे सर्वशक्तिमान देवों को छोड़ चीन के 3 देवताओं को घर में रखने  लगे। जिन प्राणियों को चीनी लोग खाते हैं जैसे मेंढक, मछली, चमगादड़ ,उल्लू आदि उनकी तस्वीर अपने घर में सजाने लगे, कितने मन्दबुद्धि हैं हम।  अच्छे बुरे का ज्ञान ही नहीं है।
 कुछ लोगों ने अपने हित लाभ के लिए फेंगशुई  की 2-4 पुस्तकें लिखदी और उन्हें पढ़कर हम फेंगशुई के प्रशंसक हो गये । अपने वैदिक और पौराणिक ग्रंथों का अध्ययन ही नहीं किया।क्या  फेंगशुई के प्रयोग से किसी को  लाभ हुआ है? नहीं ,लाभ नहीं हुआ है। क्योंकि हमें भरमाया गया। घरों से भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन को उपदेश देते हुए के फोटो उतरवा दिए गए, मानव धर्म व निष्काम कर्म का उपदेश देने वाली श्रीमद्भगवद्गीता को लोग अपने घर से इसलिए निकालने लगे कि उन्हें बताया गया कि इससे अर्जुन युद्ध के लिए तैयार हुए थे 
 इस  उदाहरण का  मैं स्वयं भुक्तभोगी हूं। एक दिन दोपहर को मैं अपने एक रिश्तेदार के यहां पहुंचा, घर के आंगन में कबाड़ी को देने के लिए बहुत ही पुरानी किताब कापियां रखी थी ।उसमें श्री रामसुखदास जी द्वारा लिखित गीता संजीवनी  दुर्लभ ग्रंथ इसका वजन भी कम से कम पांच किलो से ज्यादा होगा ।बड़े आकार वाली पुस्तक रखी थी। मैंने पूछा है भाभी  जी यह तो गीता की पुस्तक है, आप इसे कबाड़ी को क्यों दे रही हैं ? जानते हो उन्होंने  क्या कहा? उन्होंने  कहा, हमारे यहां पड़ोसन आई थी ।फेंगशुई की 1-2 किताब पढ़ रखी थी। बोली तुम्हारे घर का क्लेश जाएगा ही नहीं। गीता की किताब घर में आग लगाती है, इसे तुरंत बाहर निकालिए। गीता ग्रन्थ का यह अपमान देखकर मेरा दिल रो उठा।
मैंने कहा भाभी जी यह पुस्तक मैं ले जाता हूं और मैं उस ग्रन्थ को  ले आया। मेरे पास आज तक रखी है, घर में न तनाव है,न क्लेश है, परिवार में सुख शांति है। और वह मेरा रिश्तेदार जिसके घर से दो दो व्यक्ति जीडीए जैसे संस्थान में खूब पैसा कमाकर पाॅस कालौनी मे बड़े-बड़े मकान बना लिए हो, सबसे ज्यादा परेशान हैं , परिवार आज बर्बादी की कगार पर है। दोनों ही असमय  काल कवलित हो गए हैं।
 कितने बेवकूफ बन जाते हैं  हम लोग।शर्म आती है ऐसे लोगों पर। हम  हिंदू भाई अपनी अवनति का कारण  स्वयं  है । मनुष्य को जीवन का सार  बताने वाली निष्काम कर्म को करने के लिए प्रेरित करने वाली श्रीमद्भगवद्गीता ग्रंथ का इतना अपमान कौन कर सकता है।
हम हिंदुओं का चरित्र इतना गिर चुका है कि हमारे घर में रखे  देवी देवताओं की मूर्तियां, बड़े-बड़े मंदिरों में प्रतिष्ठित ईश्वर की मूर्तियां छोड़ देते हैं साईं बाबा और पीर मजार के चक्कर में ।वास्तव में यह  ही हमारी संस्कृति का दुर्भाग्य है ।
कितना दुष्प्रचार किया गया चीनी फेंगशुई  के माध्यम से। और हम अपने मूल ग्रंथों से दूर होते जा रहे है़। 
हमारे देश में ही ऐसी अद्भुत वस्तुओं का भंडार है ,जिसे प्रयोग करने से हम अनेकों कष्टों से मुक्ति पा सकते हैं।
आज हम बात करते हैं गुंजा, राई, पीली सरसों और काली हल्दी के लाभकारी प्रयोग के बारे में।
*गुंजा के लाभकारी उपयोग*
गुंजा को आयुर्वेद में घुंघची या रत्ती भी कहते हैं।
गुंजा तीन प्रकार की होती है। लाल गुंजा ,सफेद गुंजा और काली गुंजा।
लाल गुंजा ग्रामीण अंचलों में झाड़ी वाले स्थान पर  पायी जाती हैं।इसकी छोटी-छोटी पत्ती वाली बेल होती है और आसानी से मिल जाती है गांवों में इसे चोंटली बोलते हैं। इसके बारे में कहावत है कि यदि कुछ लाल गुंजा लेकर किसी घर में डाल दो तो वहां लड़ाई हो जाती है। किंतु उसके बहुत से लाभकारी उपयोग भी हैं ।लाल गुंजा 11 या 21 दाने लेकर बीमार व्यक्ति के ऊपर से 21 बार उल्टा उतारे तथा तथा बाहर जाकर किसी तालाब या सुनसान स्थान पर डाल दें ।तीन बार ऐसा करने से बीमार व्यक्ति ठीक होना शुरू हो जाएगा।
 यदि किसी व्यक्ति  , बालक  या संस्थान को बुरी नजर लग जाती है, तो पांच गुंजा या ग्यारह गुंजा लेकर उनके ऊपर से 5 बार उल्टा उतारे और बाहर किसी अंगारी या कपूर पर जला दें। 3 दिन लगातार शाम के समय करें। बुरी से बुरी नजर भी उतर जाएगी।
यदि कोई आपका पैसा वापस नहीं कर रहा है अथवा कोई आप से दुश्मनी स्वरूप हानि पहुंचाना चाहता है तो कुछ गुंजा लेकर महामृत्युंजय की एक माला का जाप करके उस व्यक्ति के घर के आसपास दबा दें। उसका आपसे विरोधाभास समाप्त होगा तथा आपके पैसे भी लौटाने  की सोचेगा।
*सफेद गुंजा की लाभकारी प्रयोग*
सफेद गुंजा लोभिया के दानों की तरह सफेद होते हैं। इनका उपयोग ज्योतिष के उपाय और वास्तु के उपाय में होता है। यदि आपके घर का उत्तरी भाग दूषित है। धन आता है ,चला जाता है ,बरकत नहीं होती तो आप 10 ग्राम सफेद गुंजा लेकर सफेद कपड़े में बांधकर उत्तर की दीवार पर टांग दें या किसी कांच की कटोरी में रख दें अथवा अपने घर की छत पर किसी बड़े गमले में सफेद गुंजा को उगा सकते हैं। इससे लक्ष्मी कुबेर आकर्षित होते हैं और घर में धन वृद्धि होती है।
घर में परस्पर शांति के लिए, कलह  और मनमुटाव को दूर करने के लिए किसी कांच की कटोरी में 25 ग्राम सफेद गुंजा रखे  और 
*या देवी सर्वभूतेषु शांति रूपेण संस्थिता।*
 *नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः*।।*
इस मंत्र से सिद्ध करें। अपने घर के दक्षिण पूर्व दिशा के कोने में रख दें।
सफेद गुंजा लक्ष्मी के आकर्षण करती है ।दिवाली के दिन सफेद गुंजा के 10 ग्राम या 20 ग्राम बीज लेकर दिवाली के समय पूजा करें। और अगले दिन अपने संस्थान, दुकान ,तिजोरी या पैसे रखने वाली अलमारी रखे। धन वृद्धि आपके मन मुताबिक होगी ।कार्य ठीक प्रकार से चल निकलेगा और लक्ष्मी  की कृपा बनी रहेगी।
*काली गुंजा के लाभकारी उपयोग*
उड़द के दानों जैसी काली गुंजा बहुत दुर्लभ होती है। यह तंत्र के कार्य में अधिक प्रयोग होती है। किंतु हमारा उद्देश्य है मानव कल्याण। इसलिए मानव कल्याण के लिए जो भी होगा मैं आपको लिखता रहूंगा।
 शत्रु विद्वेषण में काली गुंजा बहुत अधिक प्रयोग की जाती है ।यदि आपके शत्रु अधिक हो रहे हैं और आप को हानि पहुंचाने की चेष्टा कर रहे हैं तो आप 11 दाने काली गुंजा लेकर बगलामुखी के मंत्र का एक माला जाप करके उनके घर के आसपास गाड़ दें ।उनकी वाणी उनके कर्म आपके अनुकूल हो जाएंगे ।आपको हानि नहीं पहुंचा सकेंगे।
कभी-कभी हमारे पड़ोसी या अन्य कोई और हमारी उन्नति प्रगति वैभव ता देखकर जल जाते हैं और वे कदम – कदम पर हानि पहुंचाने का प्रयास करते हैं‌ तरह-तरह के घर पर तांत्रिक प्रयोग, उल्टे सीधे टोटके कराते हैं। जिससे हमारा कार्य उस गति से नहीं चल पाता जो गति हम चाहते हैं ।इसके निवारण के लिए काली गुंजा को
 *सर्वाबाधा विनिर्मुक्तो धनधान्य:सुतान्वित:।*
*मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशय:*
इस मंत्र से दो या पांच माला से अभिमंत्रित करके काले कपड़े में बांधकर अपने घर के द्वार की चौखट में या दुकान या ऑफिस के चोखट में लटका दें। इसके बाद कोई भी किया कराया ,ऊपरी कर्म आपको हानि नहीं पहुंचेगा।
*राई और पीली सरसों के लाभकारी उपाय*
राई और सरसों हमारी रसोई की शान है  जो मसालों में प्रयोग होते हैं। किंतु मानव कल्याण के लिए इनके कई प्रयोग हमें लाभ पहुंचा सकते हैं।
यदि किसी बच्चे  या किसी बड़े व्यक्ति को नजर लग गई है और उसका स्वास्थ्य खराब हो गया है। पीली सरसों और राई को मिलाकर एक कांच की कटोरी में रखें अपने घर के मंदिर में रखकर गायत्री मंत्र अथवा महामृत्युंजय मंत्र से उसे रविवार के दिन अभिमंत्रित कर लें‌। उसके पश्चात उसमें से कुछ दाने उठाकर नजर लगे हुए व्यक्ति के ऊपर से उल्टा 11 बार उल्टा  उतारें और  द्वार के बाहर फेंक दें।
यदि आपको रात में सपने अच्छे नहीं आते  हैं ,डर लगता है ,कभी ऐसा लगता है कि कोई व्यक्ति या कोई वस्तु आपका गला दबा रही है हाथ, पैर, वाणी निस्तेज हो गए हैं। ऐसी अवस्था में हम असहाय से हो जाते हैं हमारा शरीर अकड़ जाता है।
इससे छुटकारा पाने के लिए आमंत्रित किए हुए राई और पीली सरसों के दाने रात्रि को लेकर अपने बिस्तर के चारों डाल दें और सदैव कुछ  दाने अपनी जेब में रखें। इसके बाद आपको ऐसे सपने नहीं आएंगे ना ही लगेगा।
कभी-कभी छोटा बच्चा नींद में चौंकता  है। उसके  लिए भी यही उपाय करें तो लाभ मिलता है। यह मेरे अनुभूत प्रयोग हैं।
*काली हल्दी के लाभकारी प्रयोग*
हल्दी की भी कई प्रजातियां होती हैं: पीली हल्दी, जिसे हम मसालों में प्रयोग करते हैं । दारू हल्दी जो एक लकड़ी की तरह होती है और मधुमेह रोग में काम आती है ।
काली हल्दी जो तांत्रिक कार्यों में अथवा असाध्य रोगों में काम आती है।
यदि कोई व्यक्ति असाध्य बीमारी से पीड़ित है तो काली हल्दी  की 11 गांठ लेकर (गांठ साबुत होनी चाहिए) क्योंकि महंगी होने कारण बहुत से लोग इसके टुकड़े करके बेचते हैं।इन  काली हल्दी की गांठों को  महामृत्युंजय मंत्र की 11 माला से रविवार को अभिमंत्रित करें और उन्हें काले कपड़े में बांधकर रोगी की सिराहने रख दे ।धीरे-धीरे आराम लगना आरंभ हो जाएगा। दवाइयां भी असर करने लगेगी।
यदि आपका कार्य नहीं बन रहा है, या बाधा आ रही हैं ,आप परेशान हो चुके हैं ।इंटरव्यू में सफलता नहीं मिल रही है ,तो आप काली हल्दी की  दो गांठ काले कपड़े में सिलकर अपनी जेब में रख ले। बाधाएं दूर होनी शुरू हो जाएंगी।
यदि घर के पश्चिम क्षेत्र में कोई वास्तु समस्या है या कोई वास्तु दोष है तो उस क्षेत्र में 21 काली हल्दी गांठ किसी कांच के कटोरे में रखें और नित्य प्रति वहां पर धूप जलाएं। पश्चिम दिशा का वास्तु संतुलन ठीक हो जाएगा।
पंडित शिवकुमार शर्मा ,आध्यात्मिक गुरु एवं ज्योतिष रत्न,
 अध्यक्ष- शिव शंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केंद्र ,गाजियाबाद

No Comments yet!

Your Email address will not be published.