*वास्तु है सबके लिए (भाग 36)*
*अपने घर का वास्तु निरीक्षण स्वयं करें*
इस अंक में वास्तु के अनुसार सही स्थान क्या होना चाहिए, बताया गया है ।आप स्वयं उस दिशा के अनुसार अपने घर का निरीक्षण कर सकते हैं। यदि आपके घर मैं तालिका के अनुसार 80 से 100% प्राप्तांक है तो आपके घर का वास्तु उत्तम श्रेणी का है।
यदि आपके घर का वास्तु 50 से 80% तक सही है ।तो वह मध्यम श्रेणी का है ।कुछ उपाय करने से वास्तु दोष दूर सकता है।
नीचे की तालिका के अनुसार आपके घर का वास्तु 20 से 50 % है या इससे कम है तो वह गृह स्वामी और परिवार के लिए अशुभ दायक होता है ।उसमें वास्तु दोष निवारण के विशेष उपाय करने से लाभ हो सकता है।
स्थान ___ _दिशा_________पूर्णांक
रसोई- आग्नेय———10
पूजाघर——ईशान———-10
जल स्थान-उत्तर,पूर्व———10
शौचालय–दक्षिण, पश्चिम—10
शयन कक्ष-नैऋत्य, दक्षिण–10
स्टडी रूम–ईशान,पूर्व, उत्तर-10
स्टोर—्दक्षिण,पश्चिम,नैऋत्य-10
जीना–द.,प.,नैऋत्य, वायव्य-10
ढलान—उत्तर, पूर्व———–10
प्लाट -आयताकार,चौकोर—10
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कुल पूर्णांक———100
आप अपने घर के वस्तु की वास्तु रिपोर्ट/पूर्णांक तालिका से प्राप्त कर सकते हैं ।
उपरोक्त विवरण के विपरीत यदि शौचालय ईशान दिशा में , रसोई ईशान दिशा में हो, पूजा घर साउथ वेस्ट /नैऋत्य दिशा में हो तो यह भयंकर दोष होता है। उसका परिणाम इस प्रकार है:
शौचालय या रसोई यदि ईशान दिशा में होगी तो उस घर में पुत्र संतान के लिए हानिकारक होगी।
पुत्र संतान को कोई न कोई परेशानी बनी रहेगी। आग्नेय दिशा में यदि रसोई न हो , उस दिशा में जल का स्थान हो तो उस घर में महिला सदस्यों को कुछ ना कुछ स्वास्थ्य संबंधी परेशानी रहती है।
यदि बच्चों का कमरा या स्टडी रूम नैऋत्य में है, तो वहां संतान उदंड एवं पढ़ाई में स्थिरता ही रहेगी।
संतान आज्ञाकारिता का भाव नहीं होगा।
इसलिए इन स्थानों का विशेष निरीक्षण करने की आवश्यकता है। क्योंकि यदि इन स्थानों पर ये दोष हैं तो बहुत अच्छा परिणाम नहीं देते हैं।
पंडित शिवकुमार शर्मा ,आध्यात्मिक गुरु एवं ज्योतिष रत्न,
अध्यक्ष -शिवशंकर ज्योतिष एवं वास्तु आनुसंधान केंद्र, गाजियाबाद
Very nice message