वास्तु है सबके लिए (भाग 38) सेप्टिक टैंक ,वाटर टैंक और ड्रेनेज सिस्टम का वास्तु विश्लेषण

27Oct
*वास्तु है सबके लिए (भाग 38) सेप्टिक टैंक और वाटर टैंक , ड्रेनेज सिस्टम का सही स्थान*
वास्तु शास्त्र में जल निकासी प्रबंधन अर्थात ड्रेनेज सिस्टम ,सेप्टिक टैंक और वाटर टैंक आदि का विस्तार से वर्णन है। आजकल महानगरीय सभ्यता के चलते और मोदी जी के स्वच्छ भारत स्वस्थ भारत के अभियान के अंतर्गत घर के अंदर ही शौचालय का स्थान दिया गया है। शहरों में तो पहले से ही यह व्यवस्था बनी हुई है। विकसित कॉलोनियों में सीवर पडे  हुए हैं ।इससे घर का सारा गंदा पानी उनसे होता हुआ नालों में पहुंच जाता है । शहरों में अविकसित कॉलोनियों या गांव में बने हुए शौचालय में सीवर व्यवस्था नहीं है। शौचालय के गंदे पानी को  इकट्ठा करने के लिए सेप्टिक टैंक की व्यवस्था  करनी पड़ती है।
सेप्टिक टैंक की सबसे उत्तम दिशा पश्चिमोत्तर (वायव्य), पश्चिम ,दक्षिण और अग्नि कोण है । सबसे अच्छी दिशा वायव्य होती  है।
इस दिशा में सेप्टिक टैंक बनाने से घर में कोई वास्तु दोष उत्पन्न नहीं होता है। यह अवश्य ध्यान रखना चाहिए कि उत्तर पश्चिम में द्वार के सामने या द्वार के अंदर सेप्टिक टैंक होना नहीं चाहिए ।क्योंकि उसके ऊपर से गुजर कर आने वाला व्यक्ति हमारे लिए शुभ नहीं होता ।मुख्य द्वार से दाएं बाएं  सैप्टिक टैंक बनाना श्रेयस्कर रहता है।
पश्चिम दिशा भी सैप्टिक टैंक के लिए शुभ है ।दक्षिण और दक्षिण पूर्व दिशा क्रमशः सेफ्टी टैंक का विकल्प हैं ।यद्यपि  वहां  सेप्टिक टैंक शुभ नहीं माना जाता ।किंतु दक्षिण या दक्षिण पूर्व में यह टैंक बनाना ज्यादा हानिकारक भी नहीं है। ध्यान यह रहे कि दक्षिण अथवा दक्षिण पूर्वी दीवार से मिलाकर सेप्टिक टैंक का निर्माण न करें।  दक्षिणी दीवार से कम से कम 3 से 4:50फुट तक की जगह छोड़कर सेप्टिक टैंक का निर्माण करें। एक बात और ध्यान रखने वाली है  कि इस सेप्टिक टैंक के ऊपर कोई कमरा ,रसोई का निर्माण नहीं करना चाहिए।
स्थानीय निकाय अथवा नगर निगम के द्वारा बनाए हुए कई भवनों मे देखा है कि आसपास के चार पांच घरों का सामूहिक सेप्टिक टैंक किसी एक भवन के अंदर होता है उसके ऊपर कमरा बना दिया जाता है ।ऐसे मकान में कभी भी उस गृह स्वामी का विकास नहीं हो पाता और कई बार तो गृह स्वामी के स्वास्थ्य के लिए लिए बहुत ही हानिकारक होता है। 
गाजियाबाद में चिरंजीव विहार कॉलोनी में बहुत से मकान ऐसे ही बने हुए हैं। उनके बेडरूम अथवा ड्राइंग रूम के नीचे कॉलोनी के चार पांच घरों का सामूहिक टैंक बना हुआ है और ऊपर कमरा बना दिया था।उसमें से कई व्यक्ति अकाल मृत्यु को प्राप्त हो चुके हैं ,कुछ लोग असाध्य बीमारी से पीड़ित हैं ।
उत्तर पूरब क्योंकि ईशान दिशा है, वहां पर सेफ्टी टैंक होना घर के प्रगति हो ग्रहण लगाना होता है ।यदि ऐसा हो तो घर में धनधान्य ,संतान आदि  के लिए शुभ नहीं होता है।
दक्षिण पश्चिम  अर्थात नैऋत्य कोण में सेप्टिक टैंक बनाना बहुत ही हानिकारक है क्योंकि यह दिशा ऊंची और भारी होनी चाहिए। इसलिए वहां पर सीवर का गड्ढा होने से गृह स्वामी के लिए बहुत ही हानिकारक है ।मैंने  ऐसे कुछ मकानों में गृह स्वामी और उनके पुत्र को आपस में द्वन्द्व करते देखा। आखिरकार पिता या पुत्र में से एक को घर छोड़ना ही पड़ता है। या पिता को पुत्र  या परिवार के अन्य सदस्यों द्वारा अपमानित  जीवन जीना पड़ता है।
उपरोक्त मेरे व्यक्तिगत अनुभव है। जिन्हें मैंने आपके सामने साझा किया। 
यदि आपके घर में सेफ्टी टैंक गलत दिशा में बना हुआ है तो उसके ढक्कन को नीचे की ओर तांबे की प्लेट  से कवर कर दें और उसके ऊपर हरे पौधों के गमले रखे दें। तो वहां का वास्तु दोष कुछ सीमा तक  कम हो जाएगा।
*स्वच्छ वॉटर टैंक*
स्वच्छ वाटर टैंक पानी पीने के पानी का संग्रह करना। ऐसे  भूमिगत वाटर टैंक के लिए केवल  तीन ही दिशाएं श्रेष्ठ मानी गई है। उत्तर दिशा उत्तर पूर्व दिशा और पूर्व दिशा। इसी दिशा में ही पीने के पानी का अंडर ग्राउंड टैंक होना चाहिए।
*ड्रेनेज सिस्टम /नाली निकासी व्यवस्था*
वास्तु शास्त्र में पानी का ढलान या घर के फर्श का ढलान उत्तर ,उत्तर- पूर्व, पूर्व की ओर ही श्रेष्ठ माना गया है ।इसलिए अपने घर की नालियों का भी निर्माण उसी प्रकार से करना चाहिए जिससे कि उत्तर या पूर्व में पानी एकत्र होकर बाहर निकल जाएं। उत्तर पश्चिम अर्थात वायव्य कोण से भी गंदा जल बाहर निकालने के लिए नाली बनाई जा सकती है। नालियां सदैव ढक कर रखें क्योंकि  खुली नाली होने से घर में बरकत खत्म हो जाती है।घर की खुशियां खुली नालियों के बहाने बाहर निकल जाती है। पश्चिम में खुलने वाली खुली नालियां अशुभ मानी गई है।मैंने कई घरों में देखा है, जहां पर नालियां खुली हैं और पश्चिम की निकल रही हैं, उस घर में संतान का अभाव रहता है। दक्षिण अथवा दक्षिण पश्चिमी  क्षेत्र में नाली का ढलान या नाली का निकासी अधिक शुभ नहीं मानी गई है ।हां, घर के अंदर रसोई, शौचालय, बाथरूम से निकलने वाला गंदा पानी पाइपों या बंद नालियों के सहारे बाहर सीवर  तक अंडरग्राउंड  ले जा सकते हैं। खुली नालियों सौभाग्य खत्म कर देती है।
कई बार घर के अंदर चारों ओर कमरे बने होते हैं बीच में खाली स्थान होता है, उस खाली स्थान के चारों ओर मकान के अंदर स्थित सारे कमरे आदि को छूते हुए चारों और नाली बनी होती है। ऐसी खुली नाली घर को बर्बाद कर देती है।यदि ऐसी नाली की आवश्यकता हो तो उसको पाइप के द्वारा ही अंडर ग्राउंड कर दें। बाहर से उसका पानी दिखाई नही देना चाहिए ।ऐसी व्यवस्था मैंने पुराने बने हुए मकानों में देखी है, जो उस घर के लिए अभिशाप साबित हुई।
इसी प्रकार यदि आपके घर के चारों और खुला स्थान हैं और घर के चारों और नाली बह रही है विशेष करके दक्षिण और पश्चिम की ओर भी। तो भी वह घर के लिए अशुभ ही होती है। प्रयास करना चाहिए कि अपने घर के बाहर की नालियों को भी ढक कर रखें ।क्योंकि  खुली नालियों में से निकलता पानी अगर घर के अंदर या बाहर दिखाई देता है  तो घर की सारी चमक, सारा charm ,सारी सुंदरता, कल्पनाओं को नष्ट करता है ।
पंडित शिवकुमार शर्मा आध्यात्मिक गुरु एवं ज्योतिष रत्न।
अध्यक्ष- शिवशंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केंद्र ,गाजियाबाद।

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