वास्तु है सबके लिए (भाग 39) फ्लैट्स में वास्तु दोष विश्लेषण

27Oct
*वास्तु है सबके लिए (भाग 39) फ्लैट्स में वास्तु दोष विश्लेषण*
पाश्चात्य संस्कृति का  एकल परिवारवाद और बढ़ती जनसंख्या के कारण संस्कृति का उदय हुआ  है।
आजकल महानगरों में कई कई मंजिल फ्लैट्स ,सोसाइटी का निर्माण चल रहा है और लोग बड़े शौक से वहां पर अपना आशियाना बना रहे है।
फ्लैट सोसाइटी में सब कुछ वास्तु शास्त्र के अनुरूप नहीं होता एक ही बिल्डिंग में दो जुड़वा मकान प्राय: एक दूसरे के विपरीत होते हैं इनका वास्तु सदैव ठीक नही रहता है।
फ्लैट्स देते समय सबसे पहले हमें यह ध्यान करना होगा कि भवन के निर्माण सामग्री कैसी है, ऐसी भवन सामग्री जो सांस लेती हो ,उसका इस्तेमाल किया जाए घर के अंदर का तापक्रम और बाहर के तापक्रम से संतुलित।रहेगी। चूना और ईंट सीमेंट से अधिक सांस लेते हैं,सीमेंट पॉलिथीन से अधिक सांस लेता है और लकड़ी  इन सबसे अधिक सांस लेती है।
इसलिए जब भी आप मकान ढूंढ रहे हैं, ध्यान रहे चूना ,ईट, सीमेंट आदि से बना हुआ मकान शुभ रहता है प्लास्टर के ऊपर पीओपी करा देने से भी मकान सांस लेता है, किंतु यदि आप पी ओ पी के ऊपर प्लास्टिक पेंट कराते हैं तो उस मकान या कमरे की सांस लेने की प्रक्रिया खत्म हो जाती है यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है।
फ्लैट्स में सीढियों के साथ-साथ लिफ्ट भी लगी होती है, अधिक ऊंचाई के लिए हम लिफ्ट का उपयोग करते हैं ,लिफ्ट के निकासी के सामने आपके मकान का द्वार नहीं होना चाहिए । यह विशेष ध्यान रखना होगा।
क्योंकि मकान दरवाजे के सामने खुलती लिफ्ट सदैव हानिकारक ही रही है ।कई बार तो ऐसे मकान में रहने वाले लोग भयंकर षडयन्त्रों में फंसते पाए गए हैं ,यह एक अनुभव का विषय है।
कभी-कभी देखने में आता है  प्रवेश द्वार ही संपूर्ण फ्रन्ट  रहता है बाकी सारा हिस्सा पीछे चौड़ा हो जाता है। अर्थात फ्रंट के लिए केवल द्वार ही रहता है। ऐसे ऐसे फ्लैट में वायु का प्रवाह उचित रूप से नहीं हो पाता और वहां  नकारात्मक ऊर्जा का दबाव अधिक हो जाता है, इससे कुछ ही समय में मकान मालिक या उसके सदस्य ऊबने लगते हैं और अंत में उसको रिसेल करना पड़ता है या किराए पर  देना पड़ता है ।
फ्लैट प्रक्रिया में यह देखा गया है कि कोई भी मकान आयताकार अथवा वर्गाकार नहीं होता है। मकान की डिजाइन बहुभुजाकार होती हैं। जो गृह स्वामी के लिए शुभ नहीं होती है।बालकनी भी अलग अलग से निकली हुई होती हैं। एक बालकोनी से दूसरी बालकोनी के बीच  खाली स्थान होता है। बालकोनी का इस प्रकार से कटना या अधूरा होना अपूर्णता की निशानी है। यह ध्यान रखें कि दो फ्लैट जुड़वा न हो । उदाहरण स्वरूप एक फ्लैट जिसके दक्षिण की ओर शौचालय बना हुआ है तो उसके जुड़वा मकान में हमेशा उत्तर की और  ही शौचालय बनेगा जो एक घर के  लिए  तो ठीक है और दूसरे घर के लिए बहुत अशुभ है। दूसरा उदाहरण यदि किसी के फ्लैटमें दक्षिण पूर्व में रसोई बनी हुई है और उसके जुड़वा मकान में उत्तर और पूर्व के कोने में रसोई बनी होती है तो यह  स्थिति भी दूसरे मकान के लिए अशुभ सहोती है। ऐसा इसलिए होता है कि पाईप आदि के डालने में बिल्डर्स को सुविधा हो जाती है ।किंतु यह उनकी सुविधा मकान मालिकों के लिए असुविधा बन जाती है।यद्यपि आजकल बिल्डर  ऐसी सावधानियां बरतने लगे है किंतु कभी-कभी हम अनजाने में धोखा खा जाते हैं ,इसलिए सावधान रहे । आज हमने फ्लैट के बाह्य स्वरूप का वर्णन किया है  आगामी अंक में फ्लैट के अंदर के भाग का वास्तु दोष निवारण हेतु उपाय बताएंगे।
पंडित शिवकुमार शर्मा ,आध्यात्मिक गुरु एवं ज्योतिष रत्न।
अध्यक्ष शिवशंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केंद्र, गाजियाबाद
Pt. Shiv Kumar Sharma

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