वास्तु है सबके लिए ( भाग 41)
* *परिवार में आपसी प्रेम के लिए अपनाएं ये वास्तु टिप्स*
आजकल टीवी सीरियल्स ,मोबाइल्स आदि के माध्यम से जो अश्लीलता, फूहडपन, कुरीतियां समाज में परोसी जा रही हैं, उनसे हमारा परिवार भी अछूता नहीं है। अधिकतर घरों में पारस्परिक कलह,विवाद यदा-कदा बना ही रहता है । भारतीय परिवारों कई सदस्य तो एक दूसरे के प्रति बहुत ही समर्पित होते हैं ।आपस में प्रेम से रहते हैं ।लेकिन पाश्चात्य की सोच ने हमारे संयुक्त परिवारों की सारी महत्ता व मर्यादा ही समाप्त कर दी है। भाई भाई को फूटी आंख नहीं सुहाता , सास बहू में खटपट रहती है। इसे हम जेनरेशन गैप भी नहीं कह सकते हैं ।आधुनिकता और हमारे परंपराओं के बीच इस दरार को डालने का कार्य पाश्चात्य शिक्षा और टीवी आदि के द्वारा प्रचलन में आया है।
अपने को खुला विचार के कहने वाले हमारे हिंदू युवा आजकल माता-पिता और बड़ों की बात मानने को ही राजी नहीं है ।वे सोचते हैं कि हमने तो बहुत डिग्री प्राप्त कर ली हैं, ऊंची ऊंची शिक्षाएं प्राप्त कर ली हैं, बड़ी बड़ी नौकरियां कर रहे हैं। यह धर्म कर्म , परंपराएं ,रीति रिवाज क्या होते हैं? इनसे हमें क्या लाभ है? आजकल के हिंदू युवाओं की यही मानसिकता हिंदू धर्म के लिए एक प्रकार से अभिशाप बन गई है।
सबसे पहले तो मेरा अभिभावकों से निवेदन है कि बचपन में ही अपने पुत्र पुत्रियों को ऐसे संस्कार देना शुरू करें, जिससे कि वह आगे चलकर आपकी बात का विरोध ना करें।
अपनी संस्कृति और अपने धर्म को ना भूलें। ईश्वर के प्रति आस्था, बड़ों का सम्मान और आदर , अतिथि सेवा आदि उनका संस्कार बन जाए।
अब बात करते हैं वास्तु के ऐसे टिप्स की, जिनके द्वारा बहके हुए बच्चे, परिवार में पड़ी दरार परस्पर कलह आदि शांत हो जाए ।
*सास बहू के झगड़ो का मुख्य कारण आपस का ईगो होता है, ध्यान रखें जब भी आप एक साथ बैठे ,सास ससुर अर्थात पति के माता पिता का स्थान दक्षिण पश्चिम में हो। और पुत्र और पुत्रवधू उनके दाएं दक्षिण या पश्चिम या उत्तर की ओर बैठे तो विवाद की संभावना कम रहती है ।
आप यह बात विशेष रुप से नोट करें जब सास बहू में झगड़े होते हैं। तो वे अक्सर किस स्थान पर बैठती अथवा खड़ी होती है और जब उस स्थान पर खड़ी होती हैं तो अनायास ही झगड़ा हो जाता है ।सास बहू की नहीं सुनती है और बहू सास की बात मानने को तैयार नहीं होती है। और ऐसा स्थान कौन सा है जहां पर बैठने से दोनों में तनाव तक नहीं होता ।यह भी एक शोध का विषय है। यदि लगातार आप निरन्तर नोट करेंगे तो पाएंगे कि कुछ घर के कमरे या स्थान ऐसे हैं ।जहां पर सास बहू आराम से बैठ जाती हैं ।सामान्य रूप से बात करती हैं । निरंतर ध्यान रखने पर आप अपने घर की महिलाओं की समस्याओं को उचित स्थान पर बैठाने के लिए आग्रह करें तो इससे आपको काफी सहायता मिलेगी।
यदि घर में पिता पुत्र या भाई भाई की आपस में नहीं बनती है उनको भी इसी प्रकार से विचार करना चाहिए।
*आपकी डाइनिंग टेबिल रिश्ते सुधारने का सबसे सुंदर स्थान है। आप प्रतिदिन एक समय / शाम के समय सभी सदस्य एक साथ बैठकर भोजन करें।
घर में कुछ लोग जल्दी आ जाते हैं। कुछ देर में आते हैं, कुछ खाना जल्दी खाते हैं, कुछ देर में खाते हैं। किंतु जब आपके घर का अंतिम व्यक्ति आता है और खाना खाए तो उस पांच दस मिनट के लिए आप भी सब उस डाइनिंग टेबल पर बैठ जाएं ।चाहे आप खाना खाएं अथवा न खाएं और अपनी दिन भर के छोटी मोटी चर्चा करें। इससे भी वास्तु हमारा ठीक हो जाएगा और परस्पर संबंध मजबूत होंगे।
कुछ लोग डाइनिंग टेबल पर बैठकर खाना खाते समय टीवी देखते हैं। टीवी में कई बार तो अश्लील दृश्य, समाचार सुन रहे हैं तो मारधाड़ अथवा रक्त पात की घटनाएं और ऐड आ रहा है तो कई ऐड तो अच्छे नहीं होते हैं।जो खाना खाते मे
समय आप ऐसे दृश्य देखेंगे तो खाने के साथ वे अशुभ दृश्य भी आपके पेट व मस्तिष्क के अंदर जाएंगे। इससे आपका मानसिक विकार बढ़ेगा।मानसिक विचार बदलने शुरू हो जाएंगे। इसीलिए खाने के समय टीवी ना देखें और मोबाइल भी ना चलाएं। आवश्यक होने पर फोन सुन सकते हैं ,लेकिन फोन की अपडेट्स, फेसबुक, व्हाट्सएप ,इंस्टाग्राम आदि बिल्कुल ना देखें। भोजन के समय सात्त्विक आहार और विचार और सकारात्मक संवाद हमारे घर के संबंधों में मिश्री डाल देगा।
*जब परिवार के सदस्य एक साथ डाइनिंग टेबल पर भोजन कर रहे हो तो भाइयों में परस्पर तनाव रहता हो तो भोजन के समय डाइनिंग टेबल पर ठीक आमने सामने ना बैठे। कुर्सियों को दाएं बाएं कर के बैठे । ऐसे ही सास बहू, बहू और ननद, पिता व पुत्र आदि रिश्तो में खटास आ रही है तो डाइनिंग टेबल पर आमने सामने बिल्कुल न बैठे । इससे भी आपको बहुत लाभ मिलेगा।
जब दिन में सास बहू और बेटी आदि महिला सदस्य दिन में टीवी देख रही हैं तो ऐसे धारावाहिक न देखें ,जिनसे पारिवारिक परेशानियां उत्पन्न होती हो जैसे क्राइम पेट्रोल, सास बहू की लड़ाई, अन्य उटपटांग सीरियल ना देखें ।यदि देखना है तो धार्मिक सीरियल, सामाजिक कार्यों की चर्चाएं, डिस्कवरी चैनल ,समाचार आदि देखें। इससे हमारे मन पर सकारात्मक असर आएगा और परिवार में स्नेह प्रेम का जागरण होगा।
वास्तु के अनुसार घर में नुकीली वस्तुएं जैसे चाकू, छुरी, कैंची, ब्लेड आदि अस्त-व्यस्त रूप से ना रखें। इससे भी घर में पारस्परिक संबंधों में दरार आती हैं। कई बार डाइनिंग टेबल पर अव्यवस्थित रूप से समान पडा होता है या आपके ड्राइंग रूम में सामान अस्त-व्यस्त पड़ा है। या बेडरूम में भी कोई सामान रखने का कोई तारतम्य नहीं है तो भी आपसी संबंधों में दिक्कत आती हैं।
इन छोटी-छोटी बातों को विशेष रुप से ध्यान रखें। और समय-समय पर उनको ठीक करते रहे ,घर में अस्त व्यस्तता से बचें। समान को सही स्थान पर रखें ।
विशेषकर जूतों का स्थान ,कपड़ों का स्थान आदि का ठीक होना भी बहुत आवश्यक है। जूतों का दक्षिण अथवा पश्चिम दीवार की ओर शू रैक में ढक कर रखें तो शुभ रहता है।
पंडित शिवकुमार शर्मा आध्यात्मिक गुरु और ज्योतिष रत्न।
अध्यक्ष- शिवशंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केंद्र ,गाजियाबाद
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