वास्तु है सबके लिए,( भाग 47) अपने वास्तु को अपने अनुकूल बनाएं

27Oct
वास्तु है सबके लिए (भाग 47)
*अपने वास्तु को अपने अनुकूल बनाएं*
हमारे एक विद्वान मित्र ने लिखा था कि घर की दशा कोई भी हो ,निर्माण कैसा भी हो। वास्तु दोष लगभग सब घरों में होता है। 
प्रत्येक घर में वास्तु दोष पूरी तरह से समाप्त नहीं हो सकता है। किंतु कुछ विशेष उपाय करने से 99 प्रतिशत स्वयं ही समाप्त हो जाएगा।
1. घर में रहने वाले व्यक्ति अपने घर व प्रत्येक सदस्य के प्रति स्नेह ,प्रेम, और सद्भावना रखें।
2. जिस घर में शांति होती है और लोग अपने संबंधो को महत्व देता है जैसे माता पिता ,भाई बहन, पति पत्नी, भाई भाई आदि संबंधों में समर्पण भाव रखेंगे तो उस घर में वास्तु दोष स्वयं ही  समाप्त हो जाएगा।
3. *घर एक मंदिर* की अवधारणा हमें बनानी होगी। जो बिना समर्पण के संभव नहीं है,।
4. जब भी आप कहीं से आए  वो घर में प्रवेश करें तो एक दृष्टि घर की ओर डालें और ऐसी धारणा बनाएं कि घर हमारा स्वागत कर रहा है।
घर में प्रवेश करते ही सकारात्मक विचार अपने मस्तिष्क में रखेंं।
5. घर में कमाने वाले पुरुष सदस्य
जब भी घर में आए अपने साथ कुछ ना कुछ फल ,मिष्ठान ,फूल अथवा कोई सामान लेकर आए।
6. घर की महिला सदस्य अपना आलस्य त्याग करें। केवल नौकरों के भरोसे ही ना रहे। यदि कभी नौकर नहीं आते अथवा विलम्ब से आते हैं तो घर का कार्य करने में अपने आप को असहज महसूस ना करें। स्वयं ही थोड़ा-थोड़ा करके घर की सफाई प्रातः काल ही कर दें। कई घरों में मैंने देखा है कि 12:00 बजे तक भी नौकरों के भरोसे घर की सफाई नहीं होती ।रसोई में बर्तन  जूठे  ही पड़े रहते हैं। ऐसे घर में वास्तु दोष अवश्य होगा ,वातावरण में नकारात्मकता आ जाएगी और भविष्य में उस घर में पारस्परिक संबंधों में विस्फोट होने से कोई नहीं रोक सकता।
7. घर का दरवाजा चाहे किसी भी दिशा में हो, प्रातः काल उठकर घर का दरवाजा अवश्य ही साफ करना चाहिए ।फर्श है तो पानी धो दें ।कच्चा है तो मिट्टी व गोबर से लीप  दें।
8. आपने महसूस किया होगा घर में गंदगी मुख्य द्वार या कमरों में कम होती है, कोनों में अवश्य होती है। क्योंकि हम सबका ध्यान भी कोनों में नहीं जाता और वह गन्दगी कहीं बाहर से नहीं आती  है।घर के अंदर में ही जाले, छिपकली, मकड़ी आदि के कारण होती है । घर की सफाई के समय हमें वह ध्यान नहीं आती। कोनों में बने हुए जाले अथवा गंदगी घर में बहुत भयंकर नकारात्मकता उत्पन्न करते हैं ।इसलिए सबसे पहले सप्ताह में एक बार या दो बार घर के कोनों का ध्यान करते हुए सफाई करें।
8. घर के सभी सदस्य ईश्वर का धन्यवाद अवश्य करें। सप्ताह में सामूहिक रूप से भजन ,कीर्तन अथवा सुंदरकांड का पाठ अवश्य करें ।इससे घर आपका हमेशा ऊर्जावान  बना रहेगा।
9. घर में यदि कोई व्यक्ति बीमार हो जाए, उसके प्रति सहानुभूति रखना, प्रत्येक सदस्य का कर्तव्य है ।उचित चिकित्सा व ,खानपान का प्रबंध करना प्रत्येक सदस्य की जिम्मेदारी बनती है। इससे घर से राहु का नकारात्मक प्रभाव घर से समाप्त हो जाता है।घर में बड़ों का आशीर्वाद मिलता है इससे हमारा घर फलता फूलता है।
10. मैंने कई घर ऐसे देखे हैं जहां के हर सदस्य सेवाभावी हैं चाहे घर के सदस्यों की सेवा हो चाहे अतिथि  सेवा, हर समय अग्रणी रहते हैं। बड़े उत्साह से आगंतुक का स्वागत करते हैं। उन घरों में ईश्वर की कृपा से कोई अभाव नहीं है।
तुलसीदास ने भी अपने दोहे में कहा है:
*आये को आदर देत हैं जात नवावत शीश।*
 *तुलसी ऐसे मित्र से मिलिए विश्वाबीस ।।*
अर्थात जिस घर में अतिथियों का स्वागत होता है और सम्मान पूर्वक बिदाई होती है वहां देवता भी अतिथि के रूप में आने को आतुर रहते हैं।
11.शास्त्रों में कहा गया है:
 *यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते ,रमन्ते तत्र देवता:*
अर्थात जिस घर में नारियों का सम्मान होता है, उनसे उचित रूप से व्यवहार किया जाता है, वहां देवता वास करते हैं अर्थात सुख समृद्धि निरंतर बढ़ती है ।वैसे भी महिला को गृहलक्ष्मी कहा गया है ।उसका सम्मान करने से हर कार्य में सफलता मिलती है।
मैंने प्रत्यक्ष रूप से कई पुरुषों को देखा है और बात की है कि घर में अपनी पत्नी का सम्मान किया करो। प्रत्येक कार्य करने से पहले उनकी सलाह लिया करो ।किंतु उनके अंदर इतनी इगो होती है कि वे अपनी पत्नी की बात मानने को तैयार ही नहीं होते ।और उनके 100 में से 90 कार्य पूर्ण नहीं हो पाते।
कुछ लोगों को मेरी बात अच्छी लगी और अप्लाई किया उनमें से 80 पर्सेंट लोग अपने कार्य में सफलता प्राप्त कर रहे हैं। धीरे-धीरे उनके कार्य में गतिशीलता बन रही है।
12. यदि आपको घर में गुस्सा आ रहा है तो एकांत में जाकर  शीशा देखकर उसका निवारण करले ,किंतु घर के किसी सदस्य के सामने, बच्चों अथवा पत्नी पर उस गुस्से को ने उतारे। इससे भी घर के अंदर नकारात्मकता फैलती है।
13. घर में सभी लोग एक समय भोजन एक साथ बैठकर करें। यदि ऐसा संभव ना हो सप्ताह में दो बार अवश्य किया करें ।आपसी वार्तालाप और भोजन  साथ-साथ करने पर घर में सद्भाव का माहौल रहता है।
14. घर की महिला सदस्य भी अपने पति ,सास ,ससुर अथवा बच्चों के साथ अच्छा व्यवहार करें क्रोध के समय शांत हो जाएं। 
15. घर में सबको कम खर्च अर्थात मितव्ययिता का अभ्यास होना चाहिए। अभी घर में आवश्यक ना हो तो फालतू सामान नहीं लाना चाहिए। भविष्य के लिए धन संग्रह करना भी घर के आदर्श गृहस्थी का कर्तव्य होता है
उपरोक्त नियमों और कर्तव्य के अलावा भी बहुत सारे अच्छे कदम उठाए जा सकते हैं ।ऐसे घर में कोई भी वास्तु दोष देर तक नहीं टिक पाएगा ।घर में खुशहाली बनी रहेगी, घर एकता स्नेह सद्भाव में बंध रहेगा।
पंडित शिवकुमार शर्मा ,आध्यात्मिक गुरु एवं ज्योतिष रत्न ।
अध्यक्ष -शिवशंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केंद्र ,गाजियाबाद

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