वास्तु है सबके लिए (भाग 50)
*इंद्र ,यम ,राज का रहस्य*
वास्तु विज्ञान प्राचीन काल से ही मानव कल्याण करता चला आ रहा है ।वास्तु के प्राचीन सूत्र तब प्रत्येक गांव के निवासियों विशेषकर बड़े बुजुर्गों को कंठस्थ रहा करते थे। हमेशा से प्रयोग भी होते चले आए हैं। 90 के दशक से वास्तु का बहुत अधिक प्रचार प्रसार हुआ है। वर्तमान में हर व्यक्ति वास्तु के सिद्धांतों का प्रयोग करने लगा है। किंतु प्राचीन काल में तो भी हमारे बुजुर्ग व्यक्तियों के कुछ सूत्र तो याद थे ।यूं तो हमने उनका अर्थ अपनी आवश्यकता के अनुसार लगा लिया था। समरांगण सूत्रधार का एक वस्तु का सूत्र है *वायव्ये पशु मंदिरम्*
अर्थात घर के वायव्य कोण में पशुओं को रखने का स्थान होना चाहिए। वर्तमान में इस स्थान को गाड़ियां आदि रखने का स्थान बना दिया गया ।क्योंकि जिस कार्य के लिए आजकल गाड़ियों का प्रयोग होता है ,उसी कार्य के लिए पहले पशुओं का प्रयोग होता था जैसे :गाय ,भैंस ,घोड़ा आदि।
*ऐशान्ये ईश: वासम्* अर्थात वास्तु के नियम अनुसार उत्तर पूर्व (ईशान दिशा) में ईश्वर का वास होता है। इसलिए पूजा स्थल उसी स्थान में निर्माण करना चाहिए।
*सौख्यमिच्छन् गृहस्थिन:स्थापयेत् गुरूत्वं निऋतिम्।*
अर्थात सुख जाने वाले गृहस्थजनों को अपने घरों में दक्षिण पश्चिम दिशा (नैऋत्य कोण) को भारी रखना चाहिए।
ऐसे अनेक सूत्र हमें प्राचीन ग्रंथों में उपलब्ध है।
एक विशेष बात है जो हमने बड़े बुजुर्गों से सुनी है, वे कहा करते थे, -इंद्र, यम,राज यह तीन पद किसी भी गणना किए जाने वाले निर्माण में शुभ अशुभ फल प्रदान करते हैं।
जैसे इंद्र और राज पद बहुत शुभ माने गए हैं। जबकि यम का पद हानिकारक और मृत्यु कारक है।
कुछ लोगों की धारणा हैं कि जीने में सीढियां यम स्थान पर समाप्त नहीं होनी चाहिए अर्थात उपरोक्त गणना के अनुसार 2,5,8 ,11, 14, 17 ,20 ,23 …..आदि।
किंतु वास्तु के प्राचीन ग्रंथों में ऐसा उल्लेख सीढ़ियों के लिए नहीं है।
सीढ़ियों के पैड़ियों के लिए तो स्पष्ट निर्देश यह है कि सबसे उत्तम वह संख्या होती है जो विषम भी हो और 3 से भाग करने पर 2 शेष बचे अर्थात 17 ,23, 29..आदि।
किंतु सीढियों की पैडियों की संख्या का विषम होना ही पर्याप्त होता है।
किन्तु इंद्र यम,राज की गणना करने से वास्तु ग्रंथों में कहे जाने वाले सर्वश्रेष्ठ सूत्र 17, 23,29 पैडियों वाले सिद्धांत तो यम पद पर ही बैठते हैं।जो कि व्यावहारिक नहीं हैं।
वास्तु ग्रन्थों के अनुसार इंद्र ,यम,राज पदों का विवरण मकान की छत में प्रयोग होने वाली कड़ियों,शहतीर, बीम की संख्या पर प्रयोग होता है ।
यदि किसी कमरे की कड़ियां,बीम,शहतीर उपरोक्त गणना के अनुसार 2,5,8 ,11,14 ,17 ,20 ,23 आदि पर समाप्त हो तो वह अशुभ मानी जाती है ।इसलिए ऐसी अवस्था में एक कड़ी, बीम या शहतीर को कम या अधिक करके शुभ किया जा सकता है।
यद्यपि आजकल प्राय:घरों में कड़ी, शहतीर और बीम डालने की प्रक्रिया समाप्त हो चुकी है। अब तो पूरी छत पर एक ही लैन्टर डाल देते हैं।
किंतु बड़े बड़े शोरूम, मैरिज होम या अन्य बड़े बड़े संस्थानों में बीम डालने का प्रचलन अभी भी है। इसीलिए इंद्र, यम और राज के सिद्धांतों का प्रयोग सीढ़ियों में ना होकर घरों , संस्थानों या बडी बडी बिल्डिंग्स की छतों में होता है।
पंडित शिवकुमार शर्मा आध्यात्मिक गुरु एवं ज्योतिष रत्न ।
अध्यक्ष -शिवशंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केंद्र गाजियाबाद।
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