शस्त्र और शास्त्र त्यागने का नतीजा है हिंदुओं की कायरता

27Oct
*शस्त्र और शास्त्र त्यागने का नतीजा है हिंदुओं की कायरता*
चाणक्य नीति में लिखा हुआ है जिस देश में शस्त्रों को जंग नहीं लगते उस देश को कोई जीत नहीं सकता।
वेदों में आदेश है :
शास्त्रणामध्ययनं एव धर्मसाधनं थर्मरक्षणम् च।
शास्त्रों के अध्ययन से हमें धर्म का साधन अर्थात धर्म का उचित ज्ञान और धर्म को रक्षा करने की प्रेरणा मिलती है।
संसार में केवल हिंदू धर्म ही ऐसा है जिसमें  हम लोग अपने शास्त्र और शास्त्रों से निरंतर विमुख होते चले जा रहे हैं।
आधुनिकता की दौड़ में और मैकाले की अंग्रेजी शिक्षा के चकाचौंध में हम अपने शास्त्रों को भूल गए हैं। प्राचीन काल में गुरुकुलों में शास्त्र और शस्त्रों व का पर्याप्त ज्ञान कराया जाता था।आज हम और हमारे बच्चों को वेदों  युगों  आदि के सही नाम भी पता नहीं है। शास्त्रों की सही जानकारी नहीं है ।भारतीय इतिहास का ज्ञान नहीं है।
और दुर्भाग्य तो इस बात का है कि हम इस पीढी के लोग भी अपने बच्चों को इस पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं।
कई लोग मेरे पास आते हैं ।कहते हैं कि बच्चा बिगड़ रहा है , कहना नहीं मानता है ,पूजा पाठ नहीं करता है और नास्तिक होता जा रहा है ।वह कहता है कि पूजा पाठ से कुछ नहीं होने वाला है और हम अपने बालकों से इन बातों को इसको सुनकर व देखकर उपेक्षा किए जा रहे हैं।इसके लिए हम कठोर निर्णय नहीं ले पाते क्योंकि हमारे  तो एक या दो ही  तो संतान होती है ।उसको खोने का डर होता है।। ऐसा कब तक चलेगा ।जहां एक और अन्य धर्म के लोग अपनी पूजा पद्धतियों पर बचपन से ही ध्यान देते हैं । वे हथियार  व शस्त्रों ज्ञान प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष रूप में सिखाते हैं ,तो वे  अपने धर्म के प्रति इतने कठोर हो जाते हैं कि आज विश्व एक अराजक वातावरण में रह रहा है।और हम व हमारे बालक सॉफ्ट कोर्नर लिए ,रोजगार की तलाश में दर  दर भटकते फिर रहे हैं। भारत के लघु उद्योग ,छोटे-मोटे कार्यो पर एक ही धर्म के लोगों का आधिपत्य होता जा रहा है । क्यों नहीं हम अपने बच्चों को इन छोटे-छोटे कार्य  करने व सीखने की प्रेरणा देते हैं?
हम दोष देते हैं सरकारों को और अपने भाग्य को। न तो हमारी  इस युवा पीढी को धर्म का ज्ञान है और न अपने हिंदू होने का गर्व है। 
लार्ड मैकाले ने हमारे युवाओं से संस्कृत और हिंदी भाषा का  गौरव छीन लिया। भारतीय युवकों पर अंग्रेजी का इतना भूत सवार हुआ कि वे अपने हिंदी व संस्कृत के साहित्य को भूल गए ‌अपने हिंदू और हिंदुत्व के गौरव को भूल गए। भटक गए अंग्रेजी की मृगतृष्णा में।
अहिंसा का उपदेश देकर गांधी जी  ने हमारा मन शस्त्रों से हटा दिया है । शांति शांति करते करते गांधी ने भारत में विद्वेष का बीज बोया। भारत को खण्डित कर दिया।
हमारे प्राचीन गुरुकुल में विद्यार्थियों को शस्त्र और शास्त्र का ज्ञान कराया जाता था। गुरुकुलों से युवा विद्यार्थी एक धर्म व कर्म योद्धा होकर निकलता था ।देश और राष्ट्र के प्रति निष्ठावान, धर्म के प्रति जागरूक, चरित्र निर्माण का पोषक ,अपनी संस्कृति और अपने देश को सर्वोपरि मानता था।
सन 1000 ईस्वी से और अंग्रेजों के आगमन तक विदेशी आक्रांताओं के भारत भूमि कितने आक्रमण हुए ।भारतीय वीरों ने सामना किया और हिंदू धर्म पर आंच नहीं आने दी। क्योंकि उस समय गुरुकुलों की संख्या बहुत अधिक थी ।युवाओं में देशभक्ति व धर्म रक्षा का उत्साह था ।
किंतु  अंग्रेजों ने भारतीय भाषाओं पर प्रहार किया और गांधी जी ने अहिंसा का  प्रचार कर देश को कायर बना दिया।
हां, एक प्रश्न उठता है क्या देश में स्वतंत्रता गांधीजी के शांति प्रयासों से आई । नहीं ,लाखों देशभक्तों का रक्त बहा था आजादी को प्राप्त करने में।
गांधीजी के अहिंसा के प्रचार से भारत का युवा कायर बन गया और विधर्मी अपने धर्म के लिए खतरा  बन गए और हम तथाकथित धर्मनिरपेक्षता की आड़ में कायर और कायर होते चले गये और भारत की सीमाएं संकीर्ण होती चली गई ।आज परिणाम  सामने है कि हमारी हिंदू भाई तथाकथित राजनीति और तथाकथित धर्मनिरपेक्षता के चक्कर में अपने धर्म से भी नफरत करने लगे है ।राष्ट्र भक्ति का लोप सा हो चला है।हमें सुला दिया गया है तथाकथित धर्मनिरपेक्षता की नींद में।
मैं आज सभी से यह आह्वान करता हूं कि पैसा तो जिंदगी में बहुत आएगा। लेकिन उस पैसे को खर्च कहां करोगे ? एक तरफ भयानक कट्टरवाद है और एक तरफ हमारी तथाकथित धर्मनिरपेक्षता और कायरता।
*हमें क्या* इस मानसिकता को आज ही  दूर करना पड़ेगा। क्या तुम कट्टरवाद के  सामने टिक पाओगे। यह पैसा, यह प्रॉपर्टी  सब यहीं रह जाएगा।
समय रहते खुद भी बदलो और अपने बच्चों को संस्कारित करो तथा हिंदुत्व का प्रचंड भाव उनके अंदर जगाओ ।
हर घर में गीता ,रामायण, महाभारत वेद आदि ग्रंथ अवश्य चाहिए और नियमित उनका अध्ययन होना चाहिए।
प्रत्येक घर में नियमित पूजा पाठ की व्यवस्था हो ।गायत्री मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र अथवा अपने इष्ट देव का मंत्र हमेशा जाप करते रहो।
अपने इतिहास, संस्कारों ,परंपराओं, पूजा पद्धतियों को अपनी भावी पीढ़ियों में  हस्तांतरित करते रहो।
हिंदुओं ,आप मनु की संतान हो।
कायर मत बनो, अपने बालकों में कट्टर हिंदू होने का भाव जागृत करो।
 शास्त्रों की ओर लौटो,
 शस्त्रों को अपनाओ ।
अपनी संतान को अपने  पारिवारिक संस्कार दो। उन्हें आदर्श नागरिक बनाओ।
पंडित शिवकुमार शर्मा ,आध्यात्मिक गुरु एवं ज्योतिषाचार्य

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