वास्तु है सबके लिए ( भाग 49)
*किस्मत के दरवाजे खोल देंगे ये वास्तु टिप्स*
वास्तु शास्त्र मात्र दिशाओं का ही वस्तु नहीं है। बल्कि मनुष्य के स्वास्थ्य, समृद्धि और विकास का सम्पूर्ण विज्ञान है।
*अपनाएं इन वास्तु टिप्स को*
– हमारे जीवन के लिए भोजन सबसे महत्वपूर्ण है। उचित दिनचर्या , सात्त्विक भोजन।
हमारी दिनचर्या जितनी सटीक होगी उतना ही हमारा वास्तु मजबूत होगा प्रातः काल जागने से लेकर सोने तक निश्चित दिनचर्या हमारे आत्मविश्वास को बल प्रदान करती है। यही आत्मविश्वास हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। यदि हमारे घर में हर व्यक्ति अनुशासित है। सबकी निश्चित दिनचर्या है ।उस घर में वास्तु दोष होते हुए भी कुछ बुरा प्रभाव नहीं डाल सकते हैं । उस परिवार में निरंतर वृद्धि होती रहती है। प्रगति के नए नए रास्ते खुलते हैं।
– सात्विक भोजन हमारे भारतीय परंपरा के अनुसार हमारे उत्तम स्वास्थ्य का निर्धारण करता है। यदि घर में भोजन को प्रसाद का मानकर ग्रहण किया जाए तो उसकी गुणवत्ता में अद्भुत वृद्धि हो जाती है। कई घरों में मैंने व्यक्तियों को भोजन का अपमान करते देखा है। किसी बात पर नाराज़ हो जाते हैं और भोजन करना छोड़ देते हैं या भोजन को फेंक कर मार देते हैं। ऐसे घर से अन्नपूर्णा माता शीघ्र ही विदा हो जाती है ।कई बार गृहिणी से भूलवश अधिक या कम नमक पड़ जाता है। उसको उल्टा सीधा बोलना शुरू कर देते हैं। इससे भी अन्नपूर्णा मां का अपमान होता है। ऐसी गलतियां सामान्य रूप से होती रहती हैं। इसलिए उसमें किसी का दोष न देकर आगे से ध्यान रखने के लिए बोल देना चाहिए।
जिन घरों में खाने पीने की वस्तुओं यह भोजन सामग्री का निरादर किया जाता है। वहां से शीघ्र ही बरकत समाप्त होने लगती है
इसलिए कभी भूल कर भी भोजन का अपमान ना करें।
जिस घर में भोजन का सम्मान होता है वहां पर अन्नपूर्णा माता स्वयं विराजमान रहती हैं।
-कभी भी कार्य को एक दूसरे के ऊपर ना टालें। यदि पिता ने अपने बड़े बेटे से किसी काम के लिए कहा, बड़े बेटे ने वह कार्य स्वयं न करके अपने छोटे भाई पर टाल दिया। छोटे भाई ने भी अपनी माता या बहन को वह कार्य पास कर दिया। यह कार्य को टालने की आदत उस घर को बर्बाद कर देती है।
हम सब एक ही परिवार के घटक हैं। जो भी कार्य करेंगे उसका परिणाम हम सब को मिलने वाला है। इसलिए जो भी कार्य मिले उसे अपनी सामर्थ्य अनुसार पूरा करें अथवा छोटे या बड़े भाई बहन की सहायता से करें ।किंतु उस कार्य को अपने ऊपर से टालकर दूसरों को ना बताएं।
आज्ञाकारिता, श्रमशीलता और सहयोग की भावना परिवार को स्वर्ग के समान बना देती है इसलिए कोई भी वास्तु दोष उस परिवार का कुछ नहीं बिगाड़ सकता है।
*कुछ लाभदायक वास्तु टिप्स*
– यदि आपको परिवार सहित कहीं जाना है तो घर को अकेला ना छोड़े। एक ना एक सदस्य घर में अवश्य रहे। घर अकेला छोड़ने से अदृश्य आत्मा का वास हो सकता है। इसके परिणाम स्वरूप घर में अनावश्यक तनाव , मानसिक व्याधियां जन्म लेने लगती हैं। वैसे भी आजकल घर अकेला छोड़ना खतरे से खाली नहीं होता।
– घर में अपेक्षित धन समृद्धि की प्राप्ति के लिए जब भी आप कहीं जॉब ,व्यापार या अन्य कार्य के लिए जाए। अपने प्रभु से मिलकर जाएं अर्थात घर में बने हुए पूजा स्थल के सामने भगवान को प्रणाम करके जाएं और शाम को घर आने पर उनको आकर धन्यवाद बोले।
ऐसा करने से ईश्वर और इष्टदेव का आशीर्वाद आपके साथ हमेशा रहता है।
– घर में अपने मृतक पूर्वजों अथवा पितरों का स्थान सुनिश्चित करें।
पितरों का स्थान दक्षिणी पश्चिम के कोने में शुभ माना गया है ।अपने पितरों को प्रतिदिन स्मरण करें। उनको नमन करें इससे भी घर में शांति बनी रहती है। और वह घर उन्नति की डगर पकड़ लेता है।
-ग्रामीण परिवेश से निकले हुए लोग अपने पितरों का स्थान खेतों में बनाते थे ।लेकिन कुछ लोग रोजगार के कारण शहरों में बस गए। गांव की जमीन बेच दी। ऐसे में वे अपने देवताओं का स्थान कहां पर बनाएं । देवता या पितर हमारे पूर्वज होते हैं। इसलिए वह घरों के अंदर रहना पसंद नहीं करते या तो उनका स्थान खेतों में अथवा अपने घर के बाहर किंतु बाउंड्री के अंदर बना सकते हैं।
उन्हें प्रतिदिन या विशेषकर रविवार को स्नान कराएं और त्योहारों के अवसर पर उनका यथोचित सम्मान करें। ऐसा करने से घर सदैव फलता फूलता है देवता और पितरों का आशीर्वाद मिलने से घर में वंश वृद्धि, धन वृद्धि और यशप्राप्ति निरंतर होती है।
पंडित शिवकुमार शर्मा -आध्यात्मिक गुरु एवं ज्योतिष रत्न
अध्यक्ष -शिव शंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केंद्र ,गाजियाबाद
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