वास्तु है सबके लिए (भाग 43) *भूकंप और वास्तु* लोग मकान गिरने से मरते हैं भूकंप से नहीं।

27Oct
वास्तु है सबके लिए भाग (43)
     *भूकंप और वास्तु*
*लोग भूकंप से नहीं भवनों के गिरने से मरते हैं*-पंडित शिवकुमार शर्मा
आजकल बड़े बड़े शहरों में मल्टी स्टोरी बिल्डिंग चारों तरफ पसरी पड़ी है। यह बहुत खतरनाक स्थिति है।वास्तु की दृष्टि से देखा जाए तो भी मानव जीवन के लिए शुभ नहीं है। भूकंप आने पर सबसे पहले खतरा इन्हीं को होता है ,क्योंकि पहले आरसीसी के कॉलम और बीम का फ्रेम खड़ा करते हैं। बाद में उसमें ईटों की दीवारें भर जाती है। ईट की दीवार ब्रूटल  अर्थात कठोर होती है। और आरसीसी कॉलम लचकदार  अर्थात डक्टाइल होते हैं। पृथ्वी में जब भूकंप से भवन कांपता है तो ईंट की दीवारें और आरसीसी कॉलम अलग-अलग फ्रीक्वेंसी में वाइब्रेट करते हैं और ताश के पत्तों की तरह गिर जाते हैं। आरसीसी और ब्रिक वर्क  /ईंटों का समन्वय होना आवश्यक है। इन दोनों का समन्वय वास्तु के सिद्धांतों द्वारा स्वत: ही हो जाता है ।वास्तु ग्रंथों में यह उल्लेख है कि पूरा भवन एक साथ बंधा हुआ होना चाहिए और एक जैसी भवन सामग्री से उसका निर्माण होना चाहिए अर्थात प्लिंथ/चबूतरा लेवल पर लिंटल (द्वार व खिड़की की चौखट  का ऊपरी भाग) के  लेवल पर और छत के लेवल पर इनको बांधने वाली बीम लगाई जाए । जिससे भवन स्वत :ही एक यूनिट की तरह कार्य करेगा और भूकंप आने पर पूरा भवन एक ही फ्रीक्वेंसी में  वाईव्रेट करता है। भवन हिलता तो है  परंतु गिरने से बच जाता है।
यद्यपि लोहे की अधिक मात्रा डालकर भवन को अधिक लचीला बनाया जा सकता है ,परंतु लोहे की मात्रा से ज्यादा आवश्यक है कि यह जानना कि लोहा कहां डाला जाए‌। ताकि भवन में डक्टिलिटी बनी रहे। डक्टाइल भवन ध्वस्त होने से पहले बचाव का पर्याप्त समय देता है जब की आवश्यकता से अधिक लोहे वाले बीम अचानक ध्वस्त हो जाती हैं। उपरोक्त सिद्धांतों से कुशल इंजीनियर और वास्तु विद की देख रेख मैं यदि भवन निर्माण कराएं तो भूकंप से काफी हद तक जीवन बचाया जा सकता है।
वास्तु के कुछ और सिद्धांत निम्नलिखित हैं जो  भूकंप से बचाव का कार्य करते हैं,:
*मकान बनाते समय सांस लेने वाली भवन सामग्री का प्रयोग करना।
*भवन की ऊंचाई के अनुपात को उसकी चौड़ाई  से दुगुने तक ही सीमित रखना।
*भवन की छत को सततलन  रखकर उसमें ज्यादा से ज्यादा झुकाव देना.।
*भवन में लचक होना बहुत आवश्यक है।
*भवनों के बीच में पर्याप्त स्थान या चौक छोड़ना।
*तिकोनी शेप, वाई शेप ,की शेप में भवनों का  न बनाना।
*भवनों की नींव को जमीन में वहां तक ले जाएं जहां पर कठोर मिट्टी या चट्टान हो।
पंडित शिवकुमार शर्मा आध्यात्मिक गुरु ज्योतिष रत्न 
अध्यक्ष- शिवशंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केंद्र, गाजियाबाद।

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