*खगोल चर्चा*
*सौरमंडल की गति का वैदिक संबंध*
खगोल चर्चा के अंतर्गत हमने गत अंक में श्याम ऊर्जा की चर्चा की थी। इसमें बताया गया था कि अंतरिक्ष में अदृश्य और बहुत ही प्रभावशाली उर्जा जो ग्रह नक्षत्रों तारों को परिक्रमण और परिभ्रमण के लिए बहुत आवश्यक है, श्याम उर्जा कहलाती है।
उसी प्रकार हमारे वैदिक साहित्य विशेषकर वेद पूरी खगोल मंडल प्रक्रिया, सूक्ष्म गति, ग्रहों उपग्रहों का आपसी संबंध है उनके परिक्रमण और परिभ्रमण का रहस्य अपनी रचनाओं में समाए हुए हैं।
आज हम चर्चा करते हैं सूर्य आदि तारों और ग्रहों की परिक्रमा का वेदों से संबंध।
सूर्य स्वयं 7 .75 लाख किलोमीटर प्रति घंटे की गति से सुपर ब्लैक होल की परिक्रमा कर रहा है। भागवत महापुराण के अनुसार सूर्य एक महा सूर्य की परिक्रमा कर रहा है।
ऋग्वेद में लिखा है कि सूर्य ने पृथ्वी और अन्य ग्रहों को आकर्षण के माध्यम से बांधा है और उन्हें अपने चारों ओर ऐसे घूमाता है जैसे कि कोई प्रशिक्षक नए प्रशिक्षित घोड़ों को चलाता है।
*सविता यन्त्रै: पृथिवीरम्नदस्कम्भने सविता दमयन्ध।*
*अश्विनधुक्षधुनिमन्तर मिशनमतौरते बद्ध: सविता समुद्रम् क्ष।।*
ऋग्वेद 10:14:9:1
हमारे वैदिक ऋषियों को पता था कि पृथ्वी, मंगल, बुध ,गुरु ,शुक्र, शनि आदि सभी ग्रह सूर्य की परिक्रमा कर रहे हैं। ऋग्वेद में एक दूसरा भी उल्लेख है कि पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा कर रही है।
ऋग्वेद में कहा गया है कि यह पृथ्वी हाथ और पैरों से रहित है, फिर भी आगे बढ़ती है, सतत गतिमान है। अपनी कक्षा में निरंतर घूमती रहती है। पृथ्वी की सभी वस्तुएं भी इसके साथ चलती है और यह पृथ्वी सूर्य के चारों ओर घूमती है।
*अहिस्ता यदपदी वर्धत क्षा:शचिभिर्वेदस्याणाम्।*
*शुष्णं परिदक्षिणिद्विश्वायवे शिव शिशनथ: क्ष।।**सूर्य से प्रकाश के धरती पर पहुंचने की सटीक वैदिक गणना*
सूर्य से पृथ्वी की दूरी लगभग 15 करोड किलोमीटर है ।3 लाख किलोमीटर प्रति सैकेंड की गति से सूर्य से पृथ्वी पर प्रकाश पहुंचने में लगभग 8 मिनट लगते हैं।
*त्रिर्यद्दिव:परि मुहुर्तमागात् स्वै:*
ऋग्वेद 3:53:8
अर्थात् एक मुहूर्त या 48 मिनट में सूर्य का प्रकाश तीन बार पृथ्वी पर आकर सूर्य तक वापस जा सकता है। अर्थात सूर्य के प्रकाश को पृथ्वी तक पहुंचने में 48 ÷ 6 अर्थात 8 मिनट लगते हैं। जो आज का विज्ञान सिद्ध कर चुका है ।
पृथ्वी की भ्रमण की कक्षा की परिधि भी लगभग 15 करोड़ किलोमीटर है। इसे लगभग 1. 08 लाख किलोमीटर प्रति घंटे की गति से भ्रमण करते हुए वर्षभर में पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा पूरी करती है।
सूर्य का व्यास 13 .92 किलोमीटर है । सूर्य के व्यास से 108 गुणा सूर्य से पृथ्वी की दूरी है।
इसी प्रकार पृथ्वी से चंद्रमा की दूरी चंद्रमा की व्यास के लगभग 108 हुई है। इसका अर्थ यह हुआ कि पृथ्वी से चंद्रमा की दूरी में 108 चंद्रमा समा जाएंगे।
वेदों में वर्णित इसी ग्रहों की गति की गणना के अनुसार ही जाप की माला में 108 मनकों का निर्धारण किया गया है।
ग्रहों की गति यदि 0.01% का कुसमायोजन हो जाए तो या तो पृथ्वी सूरज से टकरा जाएगी या सूर्य की कक्षा से बाहर निकल जाएगी। गत अंक में जिस श्याम ऊर्जा का विवरण दिया था उसी श्याम ऊर्जा के द्वारा ही ग्रह, पृथ्वी चंद्रमा ,सूर्य आदि नक्षत्र और ग्रह इतने संतुलित रूप से परिक्रमण और परिभ्रमण करते हैं कि 1 डिग्री का लाखवां हिस्सा भी इधर से उधर नहीं होता है।
*पृथ्वी के घूमने और अक्ष पर झुके होने का ऋग्वेद में उल्लेख*
पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती है। ऋग्वेद के अनुसार पृथ्वी अपने अक्ष पर 23.43920 डिग्री झुकी हुई है. इससे धरती पर ऋतुओं का परिवर्तन होता है ।इसका उल्लेख ऋग्वेद में इस प्रकार है।
*यो अक्षेणेव चक्रियो पृथिवी भूतधाम्*
ऋग्वेद में पृथ्वी तथा अन्य ग्रहों की एक साथ तीन वैज्ञानिक विशेषताओं का उल्लेख किया गया है। इसमें *अक्षेणेव चक्रियो* अर्थात अक्ष पर घूमते हुए पहिये की उपमा दी गई है। साथ ही *पृथिवी तस्तम्भ* कहकर आकर्षण सिद्धांत का रहस्य उद्घाटन किया गया है। इस प्रकार वैदिक साहित्य में सौरमंडल , पृथ्वी ,मौसम परिवर्तन आदि विज्ञान की विवेचना है।
इस पर अब में शोध करने की आवश्यकता है ।तो आओ वेदों की ओर चलो और अपने गौरवशाली इतिहास एवं भूगोल की परंपरा को जानो।
पं.शिवकुमार शर्मा, आध्यात्मिक गुरु एवं ज्योतिष रत्न
अध्यक्ष -शिवशंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केंद्र ,गाजियाबाद
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