स्वर शकुन से मानव कल्याण के उपाय

27Oct
*स्वर शकुन से मानव कल्याण के उपाय*
ज्योतिष विज्ञान में स्वर शकुन का बहुत ही महत्व है। स्वर दो होते हैं चंद्र स्वर और सूर्य  स्वर ।
नासिका के दाहिने छिद्र से आने वाली सांस को सूर्य स्वर कहते हैं‌। और बांयी ओर के छिद्र से आने वाली श्वांस को चंद्र स्वर कहते हैं।
इसे हम स्वर विज्ञान भी कहते हैं। यात्रा करते समय या अन्य किसी महत्वपूर्ण कार्य के समय यदि हमें कहीं जाना होता है तो इस शकुन को आप अपना सकते हैं।
**जेहिं स्वर चले, ताहीं पग दीजे*।
*भद्रा  या भरणी, कोई   न लीजे*।*
अर्थात् बाहर जाते समय  या यात्रा करते समय या किसी महत्वपूर्ण काम के लिए बाहर निकलते समय अपनी नाक पर हथेली  रखे। और महसूस करें कि नाथ के कौन से  छिद्र से अधिक गहरी सांस आ रही है।
दाहिने छिद्र से या बांये छिद्र  से।
जिस तरफ की सांस तेज चल रही हो, उसे स्वर चलना कहते हैं।
जैसे कि आपकी नाक से दाहिने छिद्र मे़  सांस तेज चल रहीहै तो आप घर की देहरी  को दाहिने पैर से लांघकर बाहर निकलेंगे। आपकी यात्रा, आपका कार्य होने की बहुत अधिक सफल होने की संभावनाएं बन जाती हैं।
इसी प्रकार यदि आपकी नाक का बांया स्वर अधिक तेज चल रहा हो तो आप सबसे पहले बांया पैर ही बाहर निकाले ।
इसके अलावा स्वर विज्ञान के बहुत से उपयोग हैं ।भोजन करते समय आपका सूर्य स्वर नासिका के दाहिने छिद्र से तेज सांस आ रहा हो तो आपको  भोजन के संपूर्ण रस मिलेंगे। और वह आपकी पाचन क्रियाएं चुस्त दुरुस्त रहेंगी। भोजन जल्दी  हजम होगा । क्योंकि दाहिना स्वर सूर्य स्वर माना जाता है। इसका स्वभाव गर्म होता है और यह पेट की जठराग्नि को तेज कर देता है, जिससे खाया हुआ समस्त भोजन ठीक प्रकार से पच जाता है।
 चंद्र स्वर अर्थात नाक के बाएं छिद्र से सांस आने के समय भोजन करने से भोजन को पचने में देर लगती है कभी-कभी तो कब्ज  की भी शिकायत हो जाती है।
किसी राजनेता , अधिकारी, वरिष्ठ जन ,आदि से मिलते समय ध्यान रखें आपका चंद्र स्वर चलना चाहिए। इससे आपके कार्य विनम्रता पूर्वक पूर्ण हो सके ।क्योंकि चंद्र स्वर चलने के समय हमारा व्यवहार बहुत ही विनम्र होता है और अधिकारियों के साथ विनम्रता से ,प्रेम पूर्वक बात करने से कार्य जल्दी बनता है।जोश, हिम्मत, आवेश, शीघ्रता आदि काम में सूर्य स्वर महत्वपूर्ण है। सूर्य स्वर चलने से खेलकूद ,भागदौड़ ,किसी विरोधी से बात करना, मेहनत और परिश्रम के कार्य  आदि ऐसे कार्य सूर्य स्वर के चलने में सफल होते हैं।
यदि हमारे स्वर कार्य के अनुसार नहीं चल रहा है तो स्वर को बदला भी जा सकता है।
मान लीजिए हमें किसी अधिकारी के पास जाकर बात करनी है और हमारा दाहिना स्वर यानी कि सूर्य स्वर चल रहा है तो वहां कार्य की संभावना क्षीण हो जाती है। इसलिए स्वर  को बदलने के लिए भी एक उपक्रम  है। यदि आपका दाहिना स्वर चल रहा है तो आप अंगूठे से अनुलोम विलोम प्रक्रिया के तरह अपनी नाक का दाहिना  छिद्र  दबाएंगे  और बाएं छिद्र से बार-बार सांस लेंगे। धीरे धीरे आपका स्वर बदल जाएगा और चंद्र स्वर चलना आरंभ हो जाएगा।
इस प्रकार शकुन शास्त्र में हमारी भलाई की कल्पना ही की गई है। किस किस प्रकार से मानव कल्याण हो सकता है, हमारे ऋषि-मुनियों ने सारे पक्षों पर विचार करते हुए मानव कल्याण की दृष्टि से विविध शोधों के आधार पर काम किया है।
पंडित शिवकुमार शर्मा आध्यात्मिक गुरु एवं ज्योतिष रत्न 
अध्यक्ष -शिवशंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केंद्र, गाजियाबाद
Pt. Shiv Kumar Sharma

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