धनतेरस और छोटी दीपावली ( रूप चतुर्दशी )के पूजन के मुहूर्त

27Oct
*धनतेरस और छोटी दीपावली ( रूप चतुर्दशी )के पूजन का मुहूर्त और महत्व*
इस वर्ष धनतेरस और रूप चतुर्दशी अर्थात छोटी दीपावली का पर्व एक ही दिन पड़ रहा है। धनतेरस के दिन आयुर्वेद के जनक महाराज धनवंतरी अमृत कलश लेकर के सागर से उत्पन्न हुए थे ।
अच्छे स्वास्थ्य की कामना से इस दिन उनका पूजन और हवन प्रत्येक प्राणी के लिए लाभदायक है ।आयुर्वेद के जानकार इस दिन भगवान धनवंतरी का विधि विधान से पूजन करते हैं ।किसी विशेष रोग की दवाई लेना आरंभ करने के लिए यह दिन बहुत शुभ माना गया है।
प्रात काल उठकर नित्य क्रियाओं से निवृत्त होकर भगवान धनवंतरी का ध्यान, पूजन आदि करें धूप ,दीप, पुष्प ,नैवैद्य से भगवान की पूजा करें। खीर का भोग लगाएं और  इस मंत्र को बोलकर प्रार्थना करें।
ॐ सत्यम् च येन निरतं रोगं विधूतं अन्वेषितं च सविधि आरोग्यमस्य।
गूढ़ निगूढ़ं औषध्यरूपमं धन्वन्तरि च सत्यं प्रणमामि नित्यम्।
और भगवान धन्वंतरी से प्रार्थना करें कि मेरे परिवार का स्वास्थ्य ठीक रहे। पूरे वर्ष भर आपके अमृत कलश की बौछार मेरे परिवार पर होती रहे। भगवान धन्वंतरी जयंती व धनतेरस  इन दोनों पर्व को मनाने के लिए शुभ मुहूर्त इस प्रकार से हैं।
धन्वंतरी पूजन मुहूर्त
प्रातः 6:58 बजे से 9:16 बजे तक वृश्चिक लग्न (स्थिर लग्न)
13:02 से 14:30  बजे तक कुंभ लग्न( स्थिर लग्न) 
इन शुभ मुहूर्त में धनवंतरी महाराज का पूजन सर्वश्रेष्ठ और आरोग्य वर्धक रहेगा। शाम को आभूषण, वस्त्र, बर्तन आदि खरीदारी के लिए शुभ मुहूर्त।
शाम 17:31 बजे से 19:27 बजे तक वृषभ लग्न (स्थिर लग्न)अति श्रेष्ठ है ।इसके पश्चात रात्रि 20:45 से 22:25 तक लाभ के चौघड़िया।
इन शुभ मुहूर्त में सोने चांदी के आभूषण, चांदी का सिक्का ,लक्ष्मी गणेश जी की मूर्ति, बर्तन, वस्त्र, गिफ्ट आइटम आदि खरीदना बहुत ही उत्तम रहता है।।
*रूप चतुर्दशी पूजन*
इस बार से धनतेरस के दिन ही प्रदोष काल में चतुर्दशी तिथि आ रही है। इसलिए रूप चतुर्दशी ,हनुमान पूजन  ,यमदीप दान इसी  दिन होगा। ऐसी मान्यता है कि रूप चतुर्दशी को प्रातः काल उपरोक्त बताए गए मुहूर्त में ही उबटन, लेपन आदि के बाद स्नान करने से व्यक्ति के रूप व व्यक्तित्व में निखार आता है।
शाम को अनिष्ट के विनाश और आयु प्रदान हेतु सरसों के तेल का चार मुखी दिया जला कर के पूरे घर में घुमा कर किसी  चौराहे पर या अन्य सुनसान स्थान पर रखने का विधान है।
 ऐसा माना जाता है कि इस दीपदान से घर के सारे अनिष्ट समाप्त जाते हैं। हनुमान जी का पूजन भी इसी दिन के आता है ऊपर जो मुहुर्त दिए गए हैं ,उन मुहूर्त में सभी पूजन , खरीदारी आदि करनी उत्तम रहेगी।
पंडित शिवकुमार शर्मा ,आध्यात्मिक गुरु एवं ज्योतिष रत्न ।
अध्यक्ष -शिवशंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केंद्र गाजियाबाद

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