वास्तु है सबके लिए (भाग 28)
देशी फेंग शुई के अनोखे प्रयोग
फेंगशुई के नाम से आजकल बच्चा बच्चा परिचित है ।क्योंकि हमारे सारे बाजार चीनी आइटम से भरे पड़े हैं और फेंगशुई के सामान भी हमसे दूर नहीं है ।हमारे अत्याधुनिक कहे जाने वाले फेंगशुई विशेषज्ञ नए-नए तरीकों से फेंगशुई को परिभाषित कर रहे हैं ।लेकिन फेंगशुई भारत का वास्तु विज्ञान नहीं है वरन् वह चीन का वास्तु विज्ञान है। चीन और भारत की जलवायु और उच्चावच में बहुत अंतर है।इसलिए उसके उपाय यहां कारगर कैसे हो सकते हैं ।किंतु हम तो आधुनिकता की दौड़ में अंधे हो करके उसके पीछे भाग जा रहे हैं। किसी घर में गृह प्रवेश हो ,उसमें भगवान की मूर्ति के स्थान पर लाफिंग बुद्धा, मेंढक और पता नहीं क्या-क्या चीज उपहार में देते हैं।बड़े-बड़े परिवारों में मैंने फेंगशुई के महंगे महंगे चीनी आर्टिकल्स उपहार में देते हुए देखे हैं ।ये चाइनीस उपहार केवल एक भ्रम है ।क्योंकि वास्तविकता इससे कुछ अलग है।
हमारा भारत तो प्राचीन काल से ही बहुत से ऐसे अद्भुत एवं प्रभावशाली वस्तुओं का भंडार है जिसका उपयोग हमने फेंगशुई के चक्कर में आकर छोड़ दिया है या अपने आप को हीन मानने लगे हैं। आज मैं यह श्रृंखला आरम्भ कर रहा हूं। सबसे पहले मैं उन सब वास्तु प्रतीकों को बताऊंगा जो हम लोग भी करते हैं और हमारे लिए बहुत शुभ परिणाम देने वाला होता है ।सबसे पहले शंख, कलश, कमल का पुष्प, स्वास्तिक चिन्ह ,मछली का जोड़ा, पक्षियों का जोड़ा ,हंस का जोड़ा, विभिन्न प्रकार के पुष्प, प्रकाश, सुगंध ।इसके अलावा नारियल, एकाक्षी नारियल, गोमती चक्र, विभिन्न प्रकार की कौड़ियां, दक्षिणावर्ती शंख, विभिन्न तरह के स्टोंस /नग धातुओं के कच्छप, चक्र, चंदा सूरज बंदनवार चंदन मालाएं, रुद्राक्ष आदि आदि।
अब मैं आपको कुछ प्रतीकों के बारे में बताऊंगा इसके पश्चात के अंकों में क्रमश: सभी वास्तु प्रतीकों के बारे में बताऊंगा। इसका उपयोग करके फेंगशुई के उपकरणों से भी अधिक लाभ उठा सकते हैं।
शंख
हमारे देश में प्राचीन काल से ही शंखों का बड़ा महत्व है। कहा जाता है कि जिस घर में शंख की ध्वनि होती है। वहां पर बुरी आत्माओं या बुरी दृष्टि का प्रभाव कम हो जाता है ।ऐसा मैंने प्रत्यक्ष अनुभव किया है ।घर में शंख रखना बहुत श्रेष्ठ होता है ।शंखों के कई प्रकार हैं ।पांचजन्य शंख, विष्णु शंख, गणेश शंख ,मोती शंख ,लक्ष्मी शंख और दक्षिणावर्ती शंख ।सभी के अलग-अलग उपयोग हैं ।पांचजन्य शंख घर के वास्तु के पंचतत्वोंं का संतुलन करता है। घर के क्षेत्र में कोई वास्तु दोष हो तो उस स्थान पर इस
शंख की स्थापना कर सकते हैं। लक्ष्मी और विष्णु शंख लक्ष्मी जी की प्रसन्नता के लिए घर में मंदिर में स्थापित कर सकते हैं जिसका नित्य वादन और दर्शन बहुत लाभदायक है।
गणेश शंख घर की उन्नति में सहायक होता है।
चंद्रमा कमजोर और मन में घबराहट होती है तो मोती शंख में जल भरकर पीने से बहुत लाभ मिलता है।
दक्षिणावर्त शंख के कई उपयोग हैं :शाम को जल भरकर रख दें । प्रातः काल पूजा के पश्चात उस जल को सारे घर में छिड़क दें या
उस जल से आचमन कर लें। शंख को चावलों से भर कर पूजा में दाएं हाथ की ओर रखें और नित्य दर्शन करें ।लक्ष्मी जी से धन समृद्धि की कामना करें । शखों के इस प्रकार के प्रयोगों से बहुत लाभ होते देखा गया है। ध्यान रहे अपने मंदिर में दो शंख एक साथ न रखें। बजाने वाला सदैव साफ करके रखें और पूजा के आरम्भ में अवश्य बजाएं। शंख बजाने से घर में तो सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती है ।साथ में हमारे श्वास, प्रश्वास ,हृदय और फेफड़े स्वस्थ रहते हैं।
कलश
वास्तु में कलश का बहुत महत्व है। समुद्र मंथन के समय धन्वंतरी वैद्य अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे ।कलश पूर्णता का प्रतीक है। इसलिए इसकी स्थापना घर में करने से हर क्षेत्र में पूर्णता आने लगती है। कलश वास्तविक हो या प्रतीकात्मक हो ।बहुत ही शुभ रहते हैं ।घर के पूजा घर में उत्तर पूर्व दिशा के कोने में कलश में जल भरकर उस पर नारियल रखें। उसके जल को 1 सप्ताह में बदलते रहे। अपने व्यवसाय स्थल, ऑफिस या फैक्ट्री में भी उत्तर पूर्व में कलश का चित्र या कलश की स्थापना करने से बहुत ही सकारात्मक लाभ देखें गये हैं। हिंदुओं में पूजा के समय कलश पूजन और गृह प्रवेश के समय कलश को लेकर जो गृहिणी प्रवेश करती है ,तो घर में समृद्धि ,धन वृद्धि निरन्तर बढने का प्रतीक होती है ।
पंडित शिवकुमार शर्मा आध्यात्मिक गुरु एवं ज्योतिष रत्न अध्यक्ष शिवशंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केंद्र गाजियाबाद
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