नवरात्रों में मां भगवती को किस वस्तु का भोग लगाएं
दिनांक 17 अक्टूबर 2020 दिन शनिवार को शारदीय नवरात्रि आरंभ हो रहे हैं ।पहले नवरात्रे से अंतिम नवरात्रि तक मां भगवती को किन-किन वस्तुओं का भोग लगाना चाहिए। इस लेख के माध्यम से आपको बताऊंगा।
1. पहला नवरात्र की अधिष्ठात्री माता शैलपुत्री है। उनको गाय के शुद्ध घी से भोग लगाना उत्तम होता है ।देसी घी से बने हुए वस्तुओं का भी भोग लगा सकते हैं। ऐसा करने से साधक को आरोग्य स्वास्थ्य का लाभ मिलता है।
2. द्वितीय नवरात्र की अधिष्ठात्री मां ब्रह्मचारिणी है ।इनको घी, शक्कर, बुरा अथवा दूध ,दही, शहद ,गंगाजल अर्थात पंचामृत का भोग लगाना चाहिए । इन वस्तुओं का भोग लगाने से साधक को दीर्घायु प्राप्त होती है।
3. तीसरे नवरात्रि की अधिष्ठात्री मां चंद्रघंटा है ।दूध या दूध से बनी हुई वस्तुएं :मलाई ,मिष्ठान, खीर आदि का भोग लगा सकते हैं। इससे साधक को धन और ऐश्वर्य एवं सुख शांति का लाभ मिलता है।
4. चौथे नवरात्रि की अधिष्ठात्री माता कुष्मांडा है ।जिनको मालपुए बहुत पसंद है ।इसलिए कुष्मांडा माता को देसी घी के बने हुए मालपुए अथवा पुडों का भोग लगा सकते हैं। इससे साधक की बुद्धि तीव्र होती है और परिवार में बच्चों के बुद्धि का विकास होता है।
5. पांचवें नवरात्रि की अधिष्ठात्री माता स्कंदमाता होती है इस दिन माता को केले का भोग लगाना चाहिए ।मां को केला बहुत प्रिय है। केला अथवा केले से बनी वस्तुएं मां के लिए प्रिय व्यंजन है। इससे शारीरिक विकास होता है कैरियर और आर्थिक लाभ की आशा बनती है ।निराशा दूर होती हैं।
6. षष्ठी के नवरात्र की अधिष्ठात्री मां कात्यायनी है।इनको शहद और मीठे पान से भोग लगाना चाहिए। इससे हमारे अंदर अर्थात साधक को आकर्षण शक्ति का विकास होता है और नकारात्मक शक्तियां हमारे घर से दूर जाती हैं।
7. सप्तमी के नवरात्र की अधिष्ठात्री मां कालरात्रि हैं ।गुड से निर्मित वस्तुओं का भोग लगाने से घर से रोग ,शोक आदि का विनाश होता है ।जीवन में संघर्षों की स्थिति कम होती है।
8. अष्टमी के नवरात्र की अधिष्ठात्री मां महागौरी हैं। महागौरी सबका कल्याण करती हैं। इनको नारियल बहुत प्रिय है। इसलिए नारियल या नारियल से बनी हुई वस्तुओं का भोग लगाना बहुत शुभ रहता है ।इससे साधक में इच्छापूर्ति का गुण आता है और वह समाज व संसार में प्रसिद्धि प्राप्त करता है।
9. नवमी और अंतिम नवरात्रि की अधिष्ठात्री मां सिद्धिदात्री है ।इस दिन माता को हलवा ,पूरी ,खीर, चना आदि का भोग लगा जाता है और कंजक जिमाए जाती हैं। इससे नवरात्रि व्रत की पूर्णता होती है। इससे मां का आशीर्वाद मिलता है और अनहोनी समस्याओं से निजात मिलती है।
जिन लोगों के यहां अष्टमी का पूजन होता है तो उनको भी हलवा, पूड़ी,चना,खीर आदि का भोग लगाते हैं ।
पंडित शिवकुमार शर्मा आध्यात्मिक गुरु और ज्योतिष रत्न
अध्यक्ष- शिवशंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केंद्र गाजियाबाद
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