ग्रहों के गुण ,प्रवृत्ति और स्वभाव : शनि ग्रह
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विश्व में शनि के भय का आतंक है। जबकि वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत है ।शनिदेव न्यायाधीश हैं हमारे कर्मों के। यदि कोई व्यक्ति शुभ कर्म करता है व नैतिक कार्य करता है कठिन परिश्रम करता है उसके लिए शनि बहुत ही शुभ दायक हैं। अपनी महादशा अंतर्दशा या साढेसती में उसको अर्श पर पहुंचने में देर नहीं लगती। रिश्वत लेने वाले ,अनैतिक कार्य करने वाले, बुरे विचारों वाले व्यक्तियों को ही शनिदेव से डरना चाहिए । शनि वास्तव में हमारे न्यायाधीश हैं। वे निष्पक्ष न्याय करते हैं। हमारे प्ररब्ध में जो भी बुरे कर्म हैं , उनका दुष्परिणाम शनिदेव अपनी महादशा अंतर्दशा में प्रदान करते हैं। शनि मकर और कुंभ राशि के स्वामी हैं। इनकी उच्च राशि तुला है और नीच राशि मेष राशि के होते हैं। शुक्र बुध और राहु उनके मित्र हैं ।सूर्य, चंद्रमा और मंगल शनि के शत्रु ग्रह हैं। गुरु और केतु सम ग्रह है।शनी को नपुंसक ग्रह माना गया है। इनका रंग काला है। इनके देवता यमराज होते हैं। शनि कुंभ राशि के 20 अंशों तक मूलत्रिकोण में होते हैं। यह क्रूर ग्रह कहलाते हैं ।शूद्र वर्ण है और पश्चिम दिशा पर इनका स्वामित्व है ।शनि की अपने स्थान से तीसरे, सातवें और दसवें स्थान पर पूर्ण दृष्टि होती है ।पुष्य, अनुराधा, उत्तराभाद्रपद नक्षत्र पर इनका आधिपत्य है। इनका तत्व पृथ्वी है। शनि का रत्न नीलम होता है। नीली, नील मणि, लाजवर्त, काला हकीक इसके उपरत्न है। यदि कुंडली में शनि शुभ भाव का स्वामी होकर अशुभ होने पर इनको धारण कर सकते हैं । कुंडली में शनिदेव की उत्तम अवस्था व्यक्ति को वकील, न्यायाधीश तक देता है। स्टील, इस्पात ,लोहा ,ऑटोमोबाइल्स में यह व्यक्ति को बहुत ऊंचाई तक ले जाता है। शनि यदि शुभ हो तो अपनी महादशा तशया साढ़ेसाती में व्यक्ति को फर्श से अर्श पर जाता है। और अशुभ है तो ऐसे व्यक्ति को अर्श से फर्श पर आने में देर नहीं लगती। मैंने कई लोगों को देखा है। अष्टम भाव का शनि दीर्घायु कारक होता है। कन्या की जन्मकुंडली में यदि शनि सप्तम भाव पर अशुभ प्रभाव में हो तो शादी में बहुत विलंब होता है।वैवाहिक जीवन में परेशानी हो जाती है ।शनि को प्रसन्न करने के लिए मजदूर ,कामगार और गरीबों की सहायता करनी चाहिए ।उन्हें भोजन कराएं ।शनिवार को सरसों के तेल में चेहरा देखकर दान करना चाहिए ।
शनि के दान के लिए शास्त्रों में काली उड़द, काले तिल, काला कपड़ा ,सरसों का तेल और सतनजा दान वस्तुएं हैं ।लोहे का दान भी शनिवार को शुभ रहता है। यदि आपकी कुंडली में शनि की अशुभ दशा या साढ़ेसाती चल रही हो तो उपरोक्त उपाय कर सकते हैं ।
शनि के तांत्रिक मंत्र का जाप ओम् प्रां प्रीं प्रौं स : शनैश्चराय नम:या ओम् शं शनैश्चराय नमः अथवा वैदिक मंत्र का जाप निश्चित मात्रा में कर सकते हैं ।या किसी विद्वान आचार्य से करा सकते हैं ।
पंडित शिवकुमार शर्मा आध्यात्मिक गुरु एवं ज्योतिष रत्न
अध्यक्ष- शिवशंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केंद्र ,गाजियाबाद
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