वास्तु है सबके लिए (भाग 21) ( वास्तु के अनुसार दरवाजों और खिड़कियों की संख्या कितनी हो )

27Oct

 वास्तु है सबके लिए (भाग 21)

वास्तु के अनुसार दरवाजों और खिड़कियों  की संख्या कितनी हो।

हमारा भवन ,मकान ,दुकान, ऑफिस और फैक्ट्री चाहे कितनी भी सुंदर व भव्य हो किंतु जब तक द्वारों का समायोजन ठीक प्रकार से नहीं होगा ,

तब तक वहां पर लक्ष्मी का निवास नहीं हो सकता ।लेखमाला भाग 20 में मैंने वास्तु के 32 पदों के अनुसार द्वारों का स्थान बताया था ।अब हम बताते हैं कि द्वार अर्थात दरवाजे और खिड़कियां मकान में कितनी होनी चाहिए । समरांगण सूत्रधार आदि वास्तु ग्रंथों के अनुसार घरों में दरवाजे और खिड़कियां सम होनी चाहिए अर्थात 2, 4, 6 ,8 ,10 ,12 ,14… आदि आदि

प्रत्येक कमरे में कम से कम दो खिड़कियां दो दरवाजे अवश्य होनी चाहिए। प्राचीन काल में बिजली के साधन नहीं थे। पंखे, कूलर, एसी का जमाना नहीं था। लोग प्राकृतिक वातावरण पर निर्भर थे। इसलिए दो द्वारों अथवा दो खिड़कियों का आमने सामने होना हवा का वेंटिलेशन /प्रवाह ठीक प्रकार से बना रहे ,उसके लिए ऐसी योजनाएं थी ।किंतु आज बिजली के आविष्कार से हम सब वातानुकूलित वातावरण में रह रहे हैं ।खिड़कियों की संख्या चाहे दो हो या चार हो, पता नहीं चलता  क्योंकि दरवाजों के दाएं बाएं खिड़कियों में शीशे फिट करा दिए जाते हैं।एसी लगा है तो सारी खिड़कियां व दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं ।कूलर  होने से भी ऐसे ही सिस्टम होते  हैं तो प्राचीन ग्रंथों के नियमों का कोई औचित्य नहीं रह गया है ।प्राचीन काल में घर का मुख्य दरवाजा चौखट के रूप में हुआ करता था। अब मैं चौखट के बारे में विस्तार से बताऊंगा ।

आने जाने का द्वार ,उसके ऊपर लकड़ी का लोहे का चौकोर फ्रेम जिससे किवाड जुड़े होते हैं। किंतु अब अधिकतर मकानों में चौखट का रिवाज खत्म हो गया है चौखट का मतलब चारों ओर से लकड़ी या  लोहे का फ्रेम होता था।

 किंतु अब तो चौखट के स्थान पर त्रिखट का जमाना है अर्थात नीचे वाली साइड में जो देहली का स्थान है ,उसका हिस्सा खत्म कर दिया गया है। इससे भी बहुत सारी नेगेटिव एनर्जी हमारे घर में आ गई है ।पहले देहली को सबसे पवित्र मानते थे ।इसके बारे में कई मुहावरे भी प्रचलित हैं जैसे देहली लांघना अर्थात मर्यादा विहीन

 होना, देहली के अंदर होना अर्थात मर्यादा में रहना ।जब विवाह होकर लड़की अपनी ससुराल जाती थी तो उसकी मां कहती थी बेटा उस घर की देहली से तेरी अर्थी ही जानी चाहिए। कितना मर्यादित था वह जमाना। किंतु आज इन सब का अर्थ बदल गया है । देहली हमारे घर का महत्वपूर्ण हिस्सा होता था, किंतु आज के वातावरण में नए नए आविष्कारों ने देहली का स्थान खत्म कर दिया  है ।द्वार पर हम बहुत सुंदर सुंदर बंदनवार टांगते हैं जो चौखट के ऊपर होते हैं। देहली से हमारे घर की पॉजिटिव ऊर्जा बाहर नहीं जा सकती और नेगेटिव एनर्जी अंदर नहीं आ सकती। ऐसा शास्त्रों में लिखा है। घर का द्वार ही समृद्धि का विशेष स्थान है । देहली अवश्य ही बनवानी चाहिए  कुछ लोग कहते हैं कि बार बार ठोकर लगती है। ठीक है ,किंतु वर्तमान संदर्भ में देहली को नीचे फर्श के अंदर भी समाहित कर सकते हैं ।इससे उसका प्रभाव कम नहीं होता है। दिल्ली पर दीपक जलाना भी हमारी संस्कृति में बहुत शुभ माना गया है ।शुभ अवसरों पर या उत्सव पर या रोजाना घर के देहली के पास दिया जलाना सकारात्मक ऊर्जा को निमंत्रण देना होता है‌ इसलिए प्राचीन काल में हमारे माताएं ,बहने देहली और तुलसी पर दिया जलाया करती थी। 

अब बात करते हैं हमारी चौखट में लगे दरवाजों की वास्तु शास्त्र के अनुसार तो दरवाजों का जोड़ा ही शुभ मानते हैं ।उन दरवाजों में एक स्त्री ,एक पुरूष की मान्यता दी गई है ।जो घर के सदस्यों की स्वास्थ्य  एवं खुशियों का प्रतीक है ।किंतु आज दो किवाड़ों का जमाना खत्म हो गया है। अब हम केवल एक ही किवाड़ लगाते हैं। वास्तु की दृष्टि से शुभ तो नहीं है लेकिन उसकी आवश्यकता भी है। एक ही किवाड लगाने से घर में एक पक्षीय ही उन्नति होती है सर्वांगीण उन्नति नहीं हो पाती है।

आपने देखा होगा किसी घर में धन की प्रचुरता है ,किसी घर में कलेश की बहुलता है, किसी घर में संतान नन्ने मुन्ने बच्चे बहुत हैं,कोई घर सन्तानविहीन है। किसी घर में अतिथियों का आवागमन बहुत लगा रहता है। यह सब द्वार की शुभता पर निर्भर करता है ।इसका विस्तार से आगे के भागों में  बताएंगे । घर के अंदर जितने भी खिड़कियां व दरवाजे हो ,सब सम होने चाहिए। आमने सामने द्वार या खिड़कियां होने से घर में वायु का प्रभाव अच्छी प्रकार से होता है। घर के सदस्य स्वस्थ रहते हैं ।रोशनदान और एग्जास्ट फैन खिड़कियों की श्रेणी में नहीं आते  हैं ,किन्तु वायु के संचरण में बहुत अधिक सहायता करते हैं। घर के किसी भी कमरे में खिड़कियों की अधिकता नहीं होनी चाहिए हां उत्तर और पूर्व की ओर दो अथवा दो से अधिक खिड़कियां लगा सकते हैं ।इससे वह स्थान प्रकाश पर वायु से युक्त हो जाए। खिड़कियां तो हमने बहुत सी बनवा ली हैं किंतु हर खिड़की में शीशा लगवा दिया ,जाली लगवा दी। यद्यपि आज की आवश्यकता है किंतु वास्तु शास्त्र के अनुसार  खिड़की अर्थात वातायन का महत्व ही खत्म हो गया। जब उन खिड़कियों से वायु अंदर नहीं आएगी तो उसका औचित्य ही क्या रहा। आजकल हम वातानुकूलित कमरों में सब खिड़कियां दरवाजे बंद कर देते हैं। केवल एसी या कूलर चलता है। इसलिए  लोग आजकल अस्वस्थ बहुत रहते हैं। कोई ना कोई बीमारी लगी रहती है ।उचित रूप से हवा का संचार हमारे घर में कमरों में नहीं हो पाता ।अतः ध्यान रखें कि खिड़की को खिड़की रखें, शीशा लगाकर ब्लॉक ना करें।

कुछ ऑफिसों में या घरों में स्लाइड वाले दरवाजे होते हैं। इनको दाएं बाएं सरका देते हैं। यह यह परंपरा वास्तु के अनुसार नहीं है ।किंतु पिछले 15-20 वर्षों से चली आ रही है। इसमें वास्तु दोष होता है, किंतु स्थान अभाव कारण इसे लगाना आवश्यक है। इसलिए ध्यान रखें कि स्लाइड  वाले दरवाजे उत्तम क्वालिटी के होने चाहिए उनमें ग्रीसिंग निरंतर करते रहना चाहिए ,ताकि वह आवाज न करें।

 वास्तव में हमारा वास्तु शास्त्र इतना वैज्ञानिक है कि यदि हम प्रॉपर रूप से इसका प्रयोग करते हैं ।इसका अपने जीवन में उतारते हैं तो हम अपने जीवन को सुंदर और उत्तम बना सकते हैं ।लंबी आयु ,स्वस्थ जीवन और समृद्धि की प्रचुरता हमारे घर में हमेशा रह सकती है ।

पंडित शिवकुमार शर्मा आध्यात्मिक गुरु एवं ज्योतिष रत्न 

अध्यक्ष -शिवशंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केंद्र गाजियाबाद

Pt. Shiv Kumar Sharma

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