वास्तु है सबके लिए (भाग 16)
*ऑफिस /कार्यालय वास्तु विश्लेषण*
व्यावसायिक गतिविधियों को चलाने के लिए एक ऑफिस की आवश्यकता होती है ।ऑफिस आपके कार्य के अनुसार छोटा और बड़ा भी हो सकता है आज हम अपने ऑफिस अथवा कार्यालय के वास्तु का विश्लेषण करेंगे।
आज का युग कारपोरेट का युग है। हर व्यक्ति चाहता है उसका बड़ा व्यवसाय हो ,अच्छी कंपनी हो, फैक्ट्री हो और उसके संचालन के लिए एक सुंदर सा ऑफिस हो। सबसे पहले हम बड़े कार्यालय अथवा ऑफिस की बात करते हैं।
ऑफिस में सबसे पहले कंपनी के चेयरमैन या डायरेक्टर का कक्ष मुख्य रूप से बड़ा होना चाहिए ।कक्ष या केबिन हमेशा दक्षिण पश्चिम की ओर ही बनाना चाहिए इससे कंपनी के अंतर्गत आने वाले सभी कर्मचारियों पर दृष्टि रखी जा सके और उसका प्रभाव पूरे ऑफिस के स्टाफ पर पड़े। उसके पश्चात सहायक पार्टनर अथवा मेंटेनेंस अधिकारी का कक्ष होना चाहिए। उत्तर दिशा मैं अकाउंटेंट व्यवस्था करनी चाहिए तथा सभी वाणिज्यिक गतिविधियां उसी दिशा में होनी चाहिए ।ऑफिस में मार्केटिंग डिपार्टमेंट सक्रिय होगा तो कंपनी उत्तरोत्तर वृद्धि को प्राप्त करेगी। मार्केटिंग के लिए सबसे अच्छी दिशा नॉर्थवेस्ट / वायव्य है । इस दिशा में मार्केटिंग वर्ग के कर्मचारियों को बैठना चाहिए। कंपनी की मेंटेनेंस के लिए जो व्यक्ति जिम्मेदार होता है ,उसे पश्चिम दिशा में बैठना चाहिए । ऑफिस में विशिष्ट ग्राहकों के साथ वार्ता करने के लिए अथवा सेमिनार आदि करने के लिए एक बड़ा कक्ष भी होना चाहिए इसमें मुख्य रूप से ऑफिस के डायरेक्टर की कुर्सी अथवा सोफा दक्षिण की ओर होना चाहिए और जिन लोगों के साथ में मीटिंग कर रहे हैं ,वे उनके सामने होने चाहिए। मीटिंग रूम पूर्व अथवा उत्तर पूर्व में श्रेष्ठ माना गया है ।ऑफिस में पुराने रिकॉर्ड रहते हैं ,पुराने रिकॉर्ड को दक्षिण पश्चिम की ओर की सेफ में रखें। और नए रिकॉर्ड ,पंजी या कंपनी का डाटा यह सब उत्तर या पूर्व की ओर रखें ।ध्यान रहे उत्तर पूरब की ओर अधिक वजनी सामान न रखें ।
ऑफिस में पैंट्री भी होती है। जहां पर चाय आदि की व्यवस्था निरंतर चलती रहती है ।पैंट्री हमेशा दक्षिण और पूर्व के कोने पर बनानी चाहिए । पैंट्री को एक यूनिट मानते हुए उस के उत्तरी भाग में पानी रखें अथवा आ रो लगाएं।
ऑफिस में चेयरमैन या चेयरमैन कक्ष/ केबिन के उत्तर पूरब की ओर या पूरे ऑफिस के उत्तर पूर्व के समय एक छोटा सा मंदिर में लगाना चाहिए ताकि प्रातःकाल आकर सब लोग उनके दर्शन करें। धूप दीप आदि नियमित रूप से जलाएं। एक विशेष बात और अपने ऑफिस को अपनी रोटी रोजी मानते हुए उसको अपवित्र ना करें। शराब पीना ,नॉन वेज खाना ,डांस आदि की पार्टी करना ऑफिस में वर्जित हैं। यदि आप शौकीन मिजाज के व्यक्ति हैं, तो इन कार्यों को ऑफिस और घर के बाहर ही करें ।अपने ऑफिस के मुख्य द्वार पर शुभ लाभ अंकित करें ।लक्ष्मी गणेश जी की मूर्ति अपने मंदिर में रखें और यदि हो सके तो उत्तर दिशा में एक पवन घंटी टांग दें ,ताकि उसी मधुर आवाज से ऑफिस का वातावरण हमेशा चहचाहता रहे, हर समय गुंजित होता रहे। इससे ऑफिस में सद्भाव और परस्पर सहयोग का वातावरण निर्माण होता है ।ऑफिस में ध्यान रखें कि किसी भी चतुर्थ श्रेणी के व्यक्ति को डांटे डपटे नहीं।किसी महिला कर्मचारी का अपमान ना करें ।हो सके तो किसी विशेष उत्सव पर होली ,दिवाली आदि या उनके बर्थडे पर उनको कुछ उपहार देकर सम्मानित करें ,इससे कंपनी की तरक्की निरंतर बढ़ती है।
–पंडित शिवकुमार शर्मा आध्यात्मिक गुरु एवं ज्योतिष रत्न
अध्यक्ष- शिवशंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केंद्र गाजियाबाद
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