वास्तु है सबके लिए (भाग 14) *सीढ़ियों का वास्तु विश्लेषण*
वास्तु शास्त्र के अनुसार भवन में सीढियों का बहुत महत्व है ।वैसे भी प्राचीन काल से ही सीढ़ियों का महत्व अनेक ग्रंथों में दर्शाया गया है सीढ़ियों के ऊपर कई मुहावरे भी बन गए हैं जैसे कि सफलता की सीढ़ी चढ़ना,। वास्तु नियमों के अनुसार सीढ़ियां घर के ईशान कोण और ब्रह्म स्थान को छोड़कर किसी भी दिशा में बनाई जा सकती हैं सबसे पहले सीढ़ियों का सबसे उपयुक्त स्थान साउथवेस्ट अर्थात नैऋत्य कोण है ।इसके पश्चात क्रमशः दक्षिण, पश्चिम ,आग्नेय ,वायव्य,पूरब और उत्तर दिशा है।
नैऋत्य दिशा को छोड़कर उपरोक्त सभी दिशाएं उनका विकल्प है। यदि नैऋत्य में आपको सीढ़ियों का स्थान नहीं मिल रहा है, तो दक्षिण में बना सकते हैं। द्वितीय विकल्प पश्चिम मे बना सकते हैं,ं तृतीय विकल्प आग्नेय कोण में चतुर्थ विकल्प वायव्य में पंचम विकल्प पूरब में और अंतिम विकल्प उत्तर में सीढ़ियों का निर्माण करा सकते हैं।
क्योंकि सीढ़ियां भारी होती है और ऊंची होती हैं तो उसे उसी स्थान को चुनते हैं जो वास्तु के अनुसार इसके लिए निश्चित है अर्थात दक्षिण पश्चिम कोना, यदि यहां पर सीढ़ियां होगी तो घर की उन्नति और विकास आगे ही आगे बढ़ेगा। दक्षिण और पश्चिम में भी सीढियां बनाना वास्तु के अनुकूल है ।उत्तर और पूर्व में सीढ़ियां बनाना अंतिम विकल्प है भूलकर भी सीढ़ियां ईशान दिशा में या ब्रह्मस्थान में ना बनाएं।
ईशान दिशा में वास्तुपुरूष का मस्तिष्क माना गया है। यदि वहां पर भारी वस्तु अथवा सीढ़ियां बनायेंगे , उस घर का विकास रुक जाएगा, संतान अपेक्षित उन्नति नहीं कर पाएगी। ब्रह्मस्थान वास्तु पुरुष की नाभि होती है यदि किसी व्यक्ति की नाभि पर वजन रख दिया जाए तो उसके पेट का सिस्टम बिगड़ जाता है, इस प्रकार वास्तु में भी यदि ब्रह्म स्थान पर कोई भारी निर्माण या सीढ़ियां हो तो उस घर का वास्तु ठीक हो ही नहीं सकता। चाहे उस व्यक्ति काकार्य कितना भी प्रोग्रेस पर है ,धीरे धीरे निम्न स्तर में पहुंच जाएगा। इन दोनों का परिणाम मैंने प्रत्यक्ष देखा है ।
एक सज्जन जो मेरे पड़ोसी थे। बहुत ही शानदार कोठी ली । बड़े उत्साह से गृह प्रवेश कराया ।किंतु उनसे एक भूल हो गई उन्होंने कोठी लेते समय किसी वास्तु वाले को नहीं दिखाया। ईशान दिशा में अर्थात 40 से50 डिग्री पर घर का जीना था ।उस कोठी में प्रवेश के कुछ समय बाद उस व्यक्ति के छोटे बेटे का एक्सीडेंट हुआ ।वह आज भी विकलांग ही है ।बड़ा बेटा ,उसके कोई पुत्र नहीं है। केवल एक पुत्री है। करोड़ों का बिजनेस था ,धीरे धीरे 15 सालों में अर्श से फर्श पर आ गया। आखिरकार बैंक के लोन में दब गया और उस कोठी को ओने पौने दाम पर बेच करके इस समय किराए पर रह रहे हैं।
दूसरे भी मेरे मित्र हैं राजनगर में कोठी है। अब से 25 साल पहले उस कोठी बनाई थी। भव्य कोठी में ब्रह्म स्थान में मंदिर बना दिया बड़ा शानदार मंदिर था। कोठी की सुंदरता को चार चांद लगा रहा था। लेकिन वास्तु पुरुष की नाभि होने कारण वह क्षेत्र दब गया और धीरे-धीरे गृह स्वामी सड़क पर आ गया।
आज वह भी मजबूर हैं लोन बहुत हो गया है ,वे सज्जन इस उहापोह में है कोठी बेचे या अन्य प्रॉपर्टी।
वास्तु शास्त्र में सीढ़ियों की संख्या पर भी गहन अध्यन हुआ है सीढ़ियां हमेशा विषम संख्या में होनी चाहिए, जैसे 3 ,5, 7, 9 ,11, 13, 15 ,17 ,19, 21 ,23 ,25 आदि ।इसमें एक और विशेष फार्मूला है यदि सीढ़ियों की संख्या विषम भी हो और 3 से भाग देने पर 2 शेष बचे ,वह संख्या अति उत्तम मानी गई है जैसे 17, 23, 29, आदि
सीढ़ियों के नीचे रसोईघर, स्नानघर ,शौचालय, मंदिर आदि बिल्कुल न बनाएं। यदि सीढ़ियां दक्षिण- पश्चिम, दक्षिण या पश्चिम में होती हैं तो उसके नीचे केवल स्टोर बना सकते हैं यदि घर की सीढ़ियां उत्तर और पूर्व में हो तो सीढ़ियों के नीचे खाली स्थान रखना आवश्यक होता है।सीढ़ियां प्रगति का द्वार होती हैं ।इसलिए इस सीढ़ियों को सीधा ले जाना अच्छा नहीं रहता। सीढियों का घुमाव क्लॉक वाइज होना चाहिए, अर्थात सीधे हाथ की ओर से उसका घुमाव हो । एंटी क्लॉक वाइज अर्थात बाएं हाथ को घूमने वाली सीढ़ियां बनाने से बचें।इसमें एक स्वास्थ्य संबंधी कारण भी है हमारा हृदय बायीं और होता है। यदि हम दिन में कई बार ऊपर चढेंगे तो हमारे हृदय पर अधिक दबाव बढ़ेगा ,इससे हमें कालांतर में हृदय रोग होने की संभावना बढ़ जाएंगी।
यदि आपके घर में सीढ़ियां एंटीक्लाकवाइज हैं तो उसका वास्तु दोष दूर करने के लिए कुछ सामान्य उपाय इस प्रकार हैं:
सीढ़ियों के नीचे की स्टेप पर तांबे की 1 इंच जोड़ी पट्टी लगवा दें।
घूमने के स्थान पर एक शीशा अवश्य लगाएं शीशा इतना बड़ा हो इसमें कि आपका पूरा शरीर दिखे।
सीढियों के दाएं बाएं कलात्मक रूप से क्रिस्टल बॉल सजा दें।
सीढ़ियां निर्माण के समय यह ध्यान रखें यदि सीढ़ियां दक्षिण या पश्चिम क्षेत्र में हैं तो वहां ममटी अवश्य बनाएं और यदि पूर्व या उत्तर क्षेत्र में है वहां पर ममटी न बनाएं।
कभी-कभी बड़े मकानों में अंदर की सीढ़ियां ऐसी बनाई जाती हैं जो किसी कमरे के दरवाजे के ऊपर से होकर गुजरती है। यह भी अशुभ होती है इसलिए घर के अंदर प्रथम अथवा द्वितीय तल पर जाने के लिए सीढ़ियां इस प्रकार बनाएं जो घर के किसी एक कमरे के दरवाजे के ऊपर से न होकर जाए।
पंडित शिवकुमार शर्मा, आध्यात्मिक गुरु एवं ज्योतिष रत्न
अध्यक्ष- शिव शंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केंद्र गाजियाबाद
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