आज से शुरू हो रहा है पुरुषोत्तम मास

27Oct
*आज से शुरू हो रहा है पुरुषोत्तम मास*
 भारतीय काल गणना के अनुसार दो प्रकार के वर्ष प्रचलित  हैं: सौर वर्ष और चांद्र वर्ष ।सौर वर्ष में 365 दिन और 6 घंटे होते हैं है चौथे वर्ष फरवरी 28 दिन के स्थान पर 29 दिन की होती है तो उस वर्ष को अधिवर्ष कहते हैं ।चांद्र  वर्ष में 354 दिन होते हैं प्रत्येक वर्ष लगभग 10 से 11 दिन का अंतर आता है जो तीसरे वर्ष में अर्थात 32 माह 16 दिन 8 घंटे बाद 1 माह को अधिक करके उस समय अवधि का समायोजन कर लेते हैं। इसी को अधिक मास, लौंद का महीना ,मलमास या पुरुषोत्तम मास कहते हैं । इस वर्ष आश्विन मास पुरुषोत्तम मास है। इसमें विशेष ध्यान देने योग्य बात है कि इस पुरुषोत्तम मास में प्रथम पक्ष और चतुर्थ पक्ष शुद्ध होते हैं बीच के दोनों पक्षों अशुद्ध होते हैं जिनमें शादी ,विवाह ,गृह प्रवेश आदि वर्जित होते हैं।जबकि दैनिक पूजा- पाठ ,मंत्र जाप, अनुष्ठान, दान आदि का 10 गुना प्रभाव होता है ।अधिक मास में अर्थात शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से कृष्ण पक्ष की अमावस्या तक इन 30 दिनों में कोई सक्रांति नहीं होती ।इसलिए भी इसे अशुद्ध मास कहा जाता है। यह पुरुषोत्तम मास  आज 18 सितंबर से आरंभ होकर के 17 अक्टूबर तक रहेगा ।इन दिनों में पूजा ,पाठ, मंत्र जाप, विशेष अनुष्ठान आदि बहुत फलदायक हैं। इस मास को पुरुषोत्तम मास कहने का एक और कारण है। पुराणों के आख्यानों के अनुसार जब आदिकाल में कालगणना और मासों का निर्धारण  हुआ था तो प्रत्येक मास का स्वामी कोई न कोई देवता था ।लेकिन जब तृतीय वर्ष में पुरुषोत्तम मास की परिकल्पना की गई ,तो उसके मास के लिए उसका स्वामी बनने के लिए कोई देवता तैयार नहीं हुए।तब भगवान विष्णु जी ने अपने आप को इस मास का देवता घोषित कर दिया। तभी से इसको पुरुषोत्तम आज कहते हैं ।इस मास में किया हुआ दान, जप, पूजा पाठ 10 गुना अधिक फलदाई होता है।*आश्विन मास प्रत्येक उन्नीस वर्ष बाद आता है। ऐसा भी देखा गया है की आश्विन मास के अधिकमास होने के एक या 2 साल के बीच में प्रकृति , देश व समाज पर बहुत ही अशुभ प्रभाव पड़ता है। क्योंकि राहु का वृष राशि में संचरण इसी मास के बाद होता है तो आगामी डेढ़ से दो बार से विशेष सावधानी बरतें अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें, व्यसनों से दूर रहें और लोक कल्याण की भावना से इस मास  में  विशेष यज्ञ ,हवन ,पूजा पाठ करते रहें।
पं. शिवकुमार शर्मा, आध्यात्मिक गुरु एवं ज्योतिष रत्न
अध्यक्ष शिवशंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केन्द्र गाजियाबाद
Pt. Shiv Kumar Sharma

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