वास्तु है सबके लिए (भाग -9) नैऋत्य दिशा का वैज्ञानिक विश्लेषण

27Oct
*वास्तु है सब के लिए* (भाग 9)
*नैऋत्य दिशा के वास्तु का वैज्ञानिक विश्लेषण*
दक्षिण पश्चिम दिशा का कोना नैऋत्य कहलाता हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार इसका विस्तार  
202.5 अंशों से 247 .5 अंशों तक होता है। यह दिशा घर की महत्वपूर्ण दिशा होती है‌
 यह मुख्य रूप से ग्रह स्वामी की दिशा होती है ।जब तक गृह स्वामी की मन:स्थिति मजबूत एवं दृढ नहीं होगी, उसकी नेतृत्व क्षमता और उत्तम स्वास्थ्य नहीं होगा तो उस घर में धन का स्थायित्व नहीं आएगा, सारा घर इससे बुरी तरह से प्रभावित रहता है। अतः भवन के स्वामी को इसी दिशा में अपना कक्ष बनाना चाहिए ।नैऋत्य दिशा के स्वामी यम हैं ,जो मृत्यु के देवता हैं। इस दिशा में सबसे भारी सामान, ऊंचाई और बंद होना आवश्यक है ।भवन का यह भाग घर के अन्य भागों से यदि उन्नत होता है, तो घर में धन धान्य ,समृद्धि बढ़ती है ।गृह स्वामी प्रसन्न रहता है। उसका स्वास्थ्य अच्छा होता है। इस दिशा में गृह स्वामी का कक्ष, स्टोर, सीढ़ियां, सेफ ,भारी अलमारी ,सबसे ऊपर पानी की टंकी ,शौचालय, स्थाई संपत्ति के कागज ,जमीन की रजिस्ट्री,  बीमे के बॉन्ड ,एफ डी ,आरडी के डाक्यूमेंट्स आभूषण आदि रखें। इस दिशा में घर का द्वार कदापि न रखें और खिड़की, रोशनदान भी नहीं रखना चाहिए। यदि आपका मकान  इस स्थिति में है गृह स्वामी मजबूत इच्छाशक्ति वाला होता है । अति आवश्यक की स्थिति में इस दिशा में छोटा वेंटीलेशन ( रोशनदान) लगा सकते हैं यदि इस दिशा में घर का द्वार होता है तो गृहस्वामी के स्वास्थ्य पर असर डालता है। घर में क्लेश, धन की बरकत कम होती है ।अनावश्यक खर्चे, बीमारी पर खर्चे बढ़ जाते हैं मैंने कई मकानों में दक्षिण पश्चिम के द्वार वालों भवनों का भी निरीक्षण किया। इनमें 90% से अधिक भवनों में  गृह स्वामी का स्वास्थ्य अच्छा नहीं था ।कुछ असाध्य रोग से पीड़ित थे ।कुछ गृह स्वामी का घर में  प्रभाव  शून्य था ।ऐसा मैंने प्रत्यक्ष देखा है ,आप भी  अपने घर के आस-पास मित्रों आदि के घर के आसपास विश्लेषण करके पुष्टि कर सकते हैं। ऐसा 100% सत्य है ।यदि  नैऋत्य दिशा में घर का ढलान होगा तो घर का धन पानी की तरह बहेगा। खर्चा बढेगा। संतान स्वछन्द हो सकती  है। अतः इस दिशा  को सदैव ऊंचा व बंद रखें ।ढलान हमेशा दक्षिण पश्चिम से उत्तर पूरब की ओर रखें। घर का सबसे ऊंचा भाग इसी दिशा में   होना चाहिए। कार्यालयों में या ऑफिस में डायरेक्टर ,चेयरमैन आदि का कक्ष इसी दिशा में होना चाहिए ताकि सारा स्टाफ उनके कंट्रोल में रहें। फैक्ट्री या कारखाने में भारी मशीनरी हमेशा दक्षिण पश्चिमी दिशा में रखें ।एक बात और अपने घरों में (सर्वेंट रूम) सेवक का कक्ष इस दिशा में कभी भी भूलकर ना रखें ।वे हमेशा आप पर हावी रहेंगे ।उनके कार्य और  व्यवहार में कार्य में शिथिलता , ढिलाई आ जाएगी । मनमानी करेंगे।
पंडित शिवकुमार शर्मा, अध्यक्ष- शिव शंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केंद्र गाजियाबाद 
98 1189 3069
Pt. Shiv Kumar Sharma

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