वास्तु है सबके लिए (भाग-4,)

27Oct
सबके लिए है वास्तु,(भाग -4)
Vastu for Everyone
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दक्षिण दिशा का महत्व
Importance of South direction in vastu.
वास्तु शास्त्र के अनुसार दक्षिण दिशा का विस्तार 157.5 अंश से 202.5 अंश तक होता है। दक्षिण दिशा के स्वामी मंगल है ।इस दिशा पर मृत्यु के देवता यम का अधिपत्य माना जाता है।
वास्तु के नियमों के अनुसार इस दिशा में जितना भारी और ऊंचा निर्माण होगा ,उतना है श्रेष्ठ रहता है।यह दिशा स्थायित्व देने वाली है। दक्षिण दिशा में गृह स्वामी का शयन कक्ष,स्टोर, जीना,शौचालय,भारी वस्तुएं जैसे अलमारी, फैक्ट्रियों में भारी मशीनरी, आफिस में पुराना रिकार्ड आदि रखना वास्तु अनुरूप होता है।इस दिशा में जो अधिक रहेगा , परिवार पर उसका दबदबा रहेगा। इसलिए माता-पिता के रहते पुत्र का कक्ष इस दिशा में नहीं होना चाहिए। मकान के ऊपर भी अधिक व ऊंचा निर्माण ,ममटी का निर्माण अच्छा होता है, यदि आपका पुराना मकान है ऊपर दक्षिण दिशा खाली है तो उस दिशा में कपि ध्वज लगा देना चाहिए।
कुछ लोग दक्षिण दिशा में दरवाजा बनाना अशुभ मानते हैं।ऐसा मानना ठीक नहीं है,मेरा अनुभव है कि दक्षिण पश्चिम (नैऋत्य) दिशा में दरवाजा बनाना गृह स्वामी के लिए अशुभ होता है।जिनका मूलांक या भाग्यांक 9 होता है अर्थात जिनका जन्म किसी भी मास की  9,18,27  तारीख को हुआ है या जन्म कुंडली में मंगल उत्तम अवस्था में हो,उनके लिए दक्षिण दिशा का दरवाजा बहुत शुभ होता है।
पं.शिवकुमार शर्मा,अध्यक्ष- शिवशंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केन्द्र 281, अंसल सुमंगलम बिल्डिंग, आर डी सी राजनगर गाजियाबाद (निकट नया गाजियाबाद रेलवे स्टेशन)
9811893069
Pt. Shiv Kumar Sharma

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