-कविता-
*हमारे भव्य मंदिर , हमारी विरासत*
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हमें उलझाएं रखा ताज महल,
लाल किले के दीदार में।
सौ गुना भव्य है हमारे मंदिर,
दुर्ग ,किले इस संसार में।।
हूंमायू के तुच्छ मकबरे को,
बढ़ा चढ़ा कर पढ़ाया गया।
दिलवाड़ा जैन मन्दिर जैसे,
भव्य भवनों को छुपाया गया।।
पिछली सरकारों ने देश को,
पक्षपाती सेक्यूलरिज्म परोसा था।
जिन्हें केवल मुस्लिम वामपंथी
इतिहासकारों पर ही भरोसा था।।
हम वामपंथियों के दुष्चक्रों में,
ही लगातार फंसते चले गए।
छद्मवेशी पंथनिरपेक्षता के
भ्रम में हम बार बार ठगे गये।
मंदिरों की भव्यता को देखकर ,
गर्व है अपनी संस्कृति पर।
क्रोध आता है इतिहास बिगाड़ने ,
वालों की मानसिक विकृति पर।।
अब श्रीराम मंदिर जैसी भव्यता में,
मुगल स्मारक कहां टिक पाएंगे।
देखना ये सारे गुलामी के चिन्ह
अंधेरे के गर्त में खो जाएंगे ।।
भारत गौरव के नवद्वार
अब पर्यटन स्थल बन जाएंगे।
बनकर भारत की भव्य धरोहर,
समस्त विश्व को लुभाएंगे।।
शिवकुमार शर्मा,
उप प्रधानाचार्य -सरस्वती शिशु मंदिर नेहरू नगर गाजियाबाद
9811893069
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