ध्रुव और अरुंधती दर्शन से बढ़ता है नव दंपत्ति में समर्पण का भाव

27Oct

*ध्रुव व अरुंधति तारे का दर्शन करने से बढ़ता है नव दंपत्ति में समर्पण का भाव*
16 नवंबर को वृश्चिक ने संक्रांति में सूर्यागमन से वैवाहिक मुहुर्त आरंभ हो गए हैं। विवाह के समय नव दंपति तो अपने गृहस्थ जीवन में मधुरता समर्पण, स्थिरता लाने के लिए कुछ प्राकृतिक और वैदिक नियमों का पालन भी करना चाहिए।
आकाश में स्थित सप्त ऋषि मंडल सात तारों का समूह है। यह सप्त ऋषि मंडल प्रश्नवाचक चिन्ह की तरह दिखाई देता है और यह ध्रुवतारे की परिक्रमा करता है जैसा कि चित्र में दिखाई दे रहा है।
नीचे से आरंभ करने पर सबसे पहले मरीचि, अत्रि ,अंगिरा, पुलस्त्य ,पुलह क्रतु और वशिष्ठ। इन 7 ऋषियों के नाम से यह सप्त ऋषि मंडल जाना जाता है।
खगोल विज्ञान के अनुसार मरीचि तारे से सीधे कुछ दूरी पर एक चमकता हुआ तारा है जिसे ध्रुव तारा कहते हैं।
ध्रुव तारा अपनी अक्ष पर स्थित व अटल है। सप्त ऋषि मंडल इसी ध्रुवतारे के चारों ओर परिक्रमा करता है।
विवाह के समय ध्रुव तारा दर्शन भी एक वैवाहिक प्रक्रिया होती है पुरोहित नव दंपत्ति को सिंदूरदान के पूर्व ध्रुव दर्शन करने के लिए उत्तर की ओर देखने के लिए कहते हैं।
ध्रुव तारा किसे अंग्रेजी में नॉर्थ पोल कहते हैं, यह उत्तर दिशा की ओर अपनी धुरी पर अटल है। यह पृथ्वी के साथ साथ ही घूमता है इसीलिए वह हमेशा उत्तर की ओर ही दिखाई पड़ता है। पुरोहित ध्रुव दर्शन की व्याख्या करते हुए कहता है।
*ॐ ध्रुवमसि ध्रुवं त्वा पश्यामि ध्रुवैधि पोष्या मयि।मह्यं त्वऽदात् बृहस्पतिर्मया पत्या प्रजावती संजीव शरद: शतम्।।*
अर्थात हे प्रिय भार्या, तुम ध्रुव तारे की तरह स्थिर हो, मैं तुम्हें (ध्रुव) स्थिर रूप में देखता हूं। आप मेरे साथ स्थिर हो जाओ ।बृहस्पति ने तुम्हें मुझे दिया है ,इसीलिए आप संतान उत्पन्न करती हुई मेरे साथ 100 वर्षों तक जीवित रहो।
इस वैदिक मंत्र के साथ ही पुरोहित नव दंपति के गृहस्थ जीवन को स्थिर करने की कामना करता है।
इसी प्रकार विवाह उपरांत जब वधू का पति के घर में प्रथम बार आगमन होता है। रात्रि को पति अपनी पत्नी का हाथ पकड़ कर खुले आकाश में अथवा छत पर ले जाए और स्वच्छ आकाश में उत्तर की ओर देखें। वहां सबसे ऊपर वशिष्ठ तारे के पास मद्धिम प्रकाश लिए हुए छोटा तारा दिखा देता है, इसे अरुंधति कहते हैं, अरुंधति तारा हमेशा वशिष्ठ तारे के पास ही चमकता है। अरुंधति वशिष्ठ ऋषि की पत्नी थी और वे पतिव्रता महिला थी। उनका पतिव्रत्य धर्म अखंड था। इसलिए नव दंपति को प्रथम दिवस रात्रि के समय अरुंधति तारे का दर्शन करके नवगृहस्थ जीवन का प्रारंभ करना चाहिए।
ध्रुव तारे के दर्शन से गृहस्थ जीवन में स्थिरता आती है।रात्रि मेंअरुंधति अरुंधति तारे का दर्शन करने से पति पत्नी मे एक दूसरे के प्रति समर्पण का भाव ,अखंड पतिव्रता धर्म और जीवन में स्थिरता का भाव पैदा होता है। इससे कुल की वृद्धि, सौभाग्य ,सन्तान, समृद्धि सभी का आगमन एक साथ होता है।
पंडित शिवकुमार शर्मा आध्यात्मिक गुरु एवं ज्योतिषाचार्य गाजियाबाद।

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