*जीवन शैली को बदलने से बदल जाते हैं कई ग्रहों के प्रभाव*
ज्योतिष शास्त्र में आपकी कुंडली के अनुसार कुछ ग्रह शुभ होते हैं, कुछ अशुभ होते हैं। कई लोग साधारण सा प्रयास करते ही विद्या अध्ययन और नौकरी आदि में बहुत आगे बढ़ जाते हैं। जबकि बहुत से व्यक्ति कितना भी प्रयास करें ,पढ़ाई में सफल नहीं हो पाते, आगे जॉब लगने में अथवा धन कमाने में अपना लक्ष्य पूरा नहीं कर पाते और वह अपने भाग्य को कोसते रहते हैं ।
ज्योतिष शास्त्र में यद्यपि ग्रहों के बहुत से उपाय हैं जैसे मंत्र जाप ,अनुष्ठान, रत्न धारण ,ग्रहों का दान आदि करना।
उपरोक्त उपायों में से कई उपाय अधिक व्ययसाध्य होते हैं ।साधारण व्यक्ति ऐसे उपाय करने में असमर्थ रहता है। किंतु शास्त्रों में बताया गया है कि यदि हम उपरोक्त उपाय ना करें। किन्तु अपनी दिनचर्या और जीवनशैली में कुछ बदलाव कर लें, तो प्रतिकूल ग्रहों की अनुकूलता हमें मिलने लगती है ।
ग्रहों की अनुकूलता के लिए कौन सी जीवनशैली अपनाएं ,जिससे कि उनके हमें लाभ मिले, घर में कलेश कम हो ,धन आदि में बरकत हो और जीवन समृद्ध बने ।
इस पर विचार करते हैं।
1. सूर्य ग्रह यदि आपकी कुंडली में अच्छे परिणाम नहीं दे रहा है तो आपको अपयश का सामना करना पड़ता है। नौकरी में बार-बार व्यवधान आ जाता है अथवा पिताजी असंतुष्ट रहते हैं तो उसके लिए आप सबसे पहले तो पिता का ही सम्मान करें ।यदि पिता जी प्रसन्न हो गए तो सूर्य की उपरोक्त नकारात्मकता समाप्त हो जाएगी।सूर्योदय से पूर्व अथवा सूर्योदय तक जागरण करने से भी सूर्य की ऊर्जा का फल घर मिलता है। जो लोग सूर्योदय के बाद भी सोते रहते हैं तो सूर्य की अनुकूलता उन्हें प्राप्त नहीं हो सकती है। दूसरे सूर्य की प्रसन्नता हेतु आप प्रातः सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करने के बाद एक लोटा जल सूर्य को अर्घ्य दें ।तथा उसके पश्चात सूर्य को प्रणाम करें ।आपका सूर्य आपके लिए वरदान सिद्ध होगा।
2. चंद्रमा यदि कुंडली में अशुभ फल दे रहा है तो माता को प्रसन्न करें ।कई स्थानों पर देखने में आता है कि कई व्यक्ति अपनी माताओं का उचित सम्मान नहीं करते हैं अथवा कुंडली में चतुर्थ भाव खराब होने से माता के प्रति नकारात्मक भाव आ जाता है। किंतु यदि माता का उचित प्रकार से सम्मान करें सेवा करें, उनका कहना माने तो कमजोर चंद्रमा के अशुभ प्रभाव को कम किया जा सकता है। दूसरे कभी भी अपने मन में किसी के प्रति नकारात्मक विचार ना लाएं। चंद्रमा मन का कारक है ।हमारा किसी के प्रति नफरत है तो उसको तुरंत त्याग दें ।आपके ग्रह मजबूत हो जाएंगे।
3. यदि आपकी कुंडली में मंगल अच्छा नहीं है ।विशेष प्रयासों के उपरांत भी सर्विस ,नौकरी में उचित स्थान व सम्मान नहीं मिलता है। भाइयों से नहीं बनती है। प्रॉपर्टी के मामलों में धोखाधड़ी होती है। ऐसे लोगों को नियमित रूप से अपने भाइयों से मिलते जुलते रहना चाहिए। क्योंकि जो व्यक्ति भाइयों का सम्मान करता है उसका मंगल बहुत अच्छा रहता है। मंगल से पीड़ित व्यक्ति को नियम पूर्वक धरती पर ही सोना चाहिए ।घर में नीचे फर्श पर अपना गद्दा आदि डालकर सोए तो भूमि पुत्र मंगल का लाभ होना शुरू हो जाएगा। मंगल दुस्साहस का कारक भी है, इसलिए आकस्मिक क्रोध को त्यागना पड़ेगा। यदि आप बिना विचार किए अनावश्यक रूप से क्रोध करते हैं तो मंगल आपका अशुभ ही रहेगा। नॉनवेज का भोजन करना मंगल और राहु ग्रह को अप्रसन्न करता है।इसलिए उन्नति के इच्छुक व्यक्ति को नॉनवेज, मांसाहार और मदिरा सेवन से दूर रहना ही ठीक है ।
इसलिए जीवन में उन्नति चाहते हो तो मंगल को मजबूत करें।
4. बुध की प्रतिकूलता को समाप्त करने के लिए अपने दिनचर्या में प्रातः काल और शाम को नंगे पैर हरी घास पर घूमना बहुत ही लाभदायक होता है ।कमजोर कमजोर बुध व्यापारिक और आर्थिक रूप से निर्बलता देता है । यदि आपकी वाणी अच्छी नहीं है, आप हमेशा वाद विवाद में घिरे रहते हैं ।तो प्रातः काल सूर्योदय से पूर्व उठकर के आधा घंटा हरी घास के मैदान में या पार्क में घूमे ।दूसरी बात अपनी बुआ, बहन और बेटियों का सम्मान करें। इन बदलावों से बुध के नकारात्मक प्रभाव दूर जाएंगे।
5. यदि आपकी कुंडली में बृहस्पति अच्छे नहीं हैं तो आपके घर में संतान क्षेत्र ,धन क्षेत्र और गुरु कृपा की कमी रहती है। इसलिए गुरु को प्रबल करने के लिए अपने शिक्षक या गुरु का यथोचित सम्मान करें ।अपने इष्ट देव नियमित मंत्र जाप करें ।
यदि आपने गुरु नहीं बनाए हैं तो शिव भगवान या हनुमान जी को अपना गुरु बनाएं। लेकिन सबसे पहला नियम है गुरु को प्रसन्न करने के लिए प्रातकाल उठकर के अपने घरों में ईश्वर की प्रार्थना करें।
प्रातः काल की अपनी दिनचर्या में ईश्वर का ध्यान अवश्य सम्मिलित करें। जो व्यक्ति प्रतिदिन 5-10 मिनट भी ईश्वर का ध्यान नहीं करते उनको गुरु के लाभों से वंचित होना पड़ता है। दूसरी विशेष बात यह है कि जिनका गुरु कमजोर होता है, उन्हें कभी जीवन में पेड़ नहीं कटवाने चाहिए ।क्योंकि गुरु पितृदोष का कारक होता है और कभी-कभी अशुभ गुरु के कारण कुंडली में पितृदोष भी आता है।
गुरु को प्रसन्न करने के लिए नियमित रूप से प्रात काल उठकर स्नान करके अपने इष्ट देव का स्मरण अथवा गुरु का ध्यान करें। धार्मिक ग्रंथों का अवश्य ही अध्ययन करें। इससे हमें दैनिक उर्जा के साथ-साथ बृहस्पति की भी ऊर्जा मिलेगी।
6. शुक्र के दुष्प्रभाव कारण यदि आपको गृहस्थ जीवन में अड़चनें आ रही हैं ।पति पत्नी में आपस में नहीं बनती ।भौतिक ऐश्वर्य आपको नहीं मिलते हैं। प्रयत्न करने के बाद भी आपको लगातार निराशा का सामना करना पड़ता है। तो शुक्र को मजबूत करने के लिए अपनी धर्मपत्नी को प्रसन्न करना चाहिए। शाम के समय अधिक देर तक नहीं जागे।शुक्र का सबसे बड़ा नियम है जल्दी जागना जल्दी सोना ।
दूसरी बात यह कि यदि आपके घर में हर जगह हो फर्श अथवा टाइल्स लगी हैं ऐसे घर में भी शुक्र की कृपा नहीं होती है। इसलिए घर के अग्नि कोण अथवा वायव्य कोण में कुछ हिस्सा बिना टाइल्स के ही रखें अथवा गमले में मिट्टी डालकर पौधा लगा दे ।इससे में शुक्र के संपूर्ण लाभ प्राप्त होंगे।
6. शनि, राहु और केतु की अनुकूलता प्राप्त करने के लिए हमें अपनी दिनचर्या को ठीक करना पड़ेगा। क्योंकि यह तीनों पाप ग्रह हैं और अंधकार के कारक हैं।
यदि आपको लगता है कि हर कार्य में निराशा मिल रही है। आलस्य का भाव बढ़ रहा है, परिवारिक संस्कार खत्म हो गये हैं। घर में कलेश रहता है, हमेशा संघर्ष की स्थिति बनी रहती है। दोस्तों में घूमना,फिरना, रात में जागना, दिन में सोना अव्यवस्थित दिनचर्या होना ये यह सब शनि ,राहु ,केतु के दुष्प्रभाव के कारण होते हैं ।इसलिए सबसे पहले अपनी दिनचर्या को व्यवस्थित करें।
प्रकृति के प्रति सचेत रहें । पेड़- पौधे ना काटे। अपने मातहत अर्थात नौकर, सेवक ,श्रमिक आदि को प्रसन्न रखें ।कुत्ते बिल्ली आदि को रोटी, बिस्कुट ब्रेड आदि खिलाते रहे।
दिन में भूल कर भी ना सोएं। किसी की निंदा ना करें और अपने कार्य के प्रति ईमानदार बने। शुभ भाव के शनि, राहु, केतु आपको बहुत ऊंचाई पर ले जाएंगे ।डॉक्टर अब्दुल कलाम इसके बहुत अच्छे उदाहरण है।
उपरोक्त नवग्रह के उपाय करने उसे और जीवन में अपनी दिनचर्या बदलने से आपके सभी ग्रह प्रसन्न होंगें।
उपरोक्त लेख का सार यह है कि
1. अपने दिनचर्या को व्यवस्थित रखें।
2.रात को देर तक न जागे और प्रातः काल जल्दी उठे।
3. माता-पिता और गुरुओं का सम्मान करें।
4. अपने घर में बने पूजा घर में अपने इष्ट का अथवा ईश्वर का 5-10 मिनट अवश्य ध्यान करें।
5. बुरी संगति से दूर रहें। मांसाहार और मदिरा का सेवन ना करें।
6. माता ,पिता, पत्नी और बुआ बहन बे,टी का यथोचित सम्मान अवश्य करें।
7. हमेशा सात्विक भोजन करें। भोजन की निंदा कभी न करें।
8. अपने कार्य के प्रति निष्ठावान बनें। परिश्रम से मुंह न मोड़े।
9. अपने कार्य के प्रति ईमानदार रहें। कार्य इस प्रकार करें मानो सारा कार्य की जिम्मेदारी आपके ऊपर ही हो।
10. किसी पर भी अनावश्यक क्रोध न करें । वाद विवाद से दूर रहें।11.प्रतिदिन ईश्वर को ध्यान करने के साथ-साथ अपने धर्म की बातें भी अवश्य जाने ।धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन करें और अपने महापुरुषों का जीवन वृत्त अपने बच्चों को अवश्य बताएं।
12. कभी भी पेड़ ना काटे ।यदि संभव हो तो वृक्षारोपण अवश्य करें।
13. कुत्ते ,बिल्ली ,चींटी, बन्दरों और गायों को समय-समय पर चारा, भोजन ,फल आदि अवश्य खिलाएं।14. अपने अधीनस्थ कर्मचारी अथवा सेवकों पर क्रोध न करें ।गरीब ,मजदूर ,श्रमिक वर्ग को समय समय पर भोजन कराएं ।वस्त्र आदि दान करते रहें।
पंडित शिवकुमार शर्मा, आध्यात्मिक गुरु एवं ज्योतिषाचार्य
अध्यक्ष- शिवशंकर ज्योतिष एवं अनुसंधान केंद्र ,गाजियाबाद
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