आओ भारतीय संस्कृति का पुनरोद्धार करें।

27Oct
*आओ,भारतीय संस्कृति का पुनरोद्धार करें।*
कुतुब मीनार हिन्दू  व जैन के 27 मन्दिरों को तोडकर बनाई गई थी।जामा मस्जिद भी मन्दिर तोड़कर बनाई गई थी। हिंदू समाज को अपमानित करने के लिए इसकी सीढ़ियों में हिन्दू देवी-देवताओं के प्रतिमाएं  चिनवा दी थी।ताज महल ,लालकिला आदि जितने भी निर्माण मुगलों ने बनाएं,सब हिन्दु मन्दिरों की भव्यता को नष्ट करके बनाएं गये। जो भारत के  बहुसंख्यक लोगों के लिए अपमान की बात है ।भारत के स्वतंत्र होने पर भी कांग्रेसी सरकारों  में पहले 5 शिक्षा मंत्री मुसलमान ही रहे ।सारे मुस्लिम मंत्रियों ने भारतीय शिक्षा और संस्कृति को नष्ट करने कार्य किया ।भारतीय धरोहर को नष्ट करने का कार्य किया ।हमारे भारत में एक से एक बढ़कर देव मंदिर ,किले दुर्ग , प्राचीन  विश्वविद्यालय ,प्रतिमाएं हैं जो लाल किला ,ताज महल, कुतुब मीनार से हजारों गुना भव्य हैं । जब राम मंदिर  का शिलान्यास हो रहा था। तो आपने टीवी चैनल्स व अखबारों में  भारत के सभी भव्य मंदिरों के दर्शन  किए थे। अब आप खुद सोचिए कि इतनी भव्यता क्या इन मुगल शासकों द्वारा बनाए गए इमारतों में है ।बस हमने मान लिया। क्योंकि हमारे स्वतंत्र भारत के प्रारंभिक काल में जो चेतना और ऊर्जा  भारतीय संस्कृति के लिए मिलनी चाहिए थी। वह मुस्लिम इतिहासकारों और मुस्लिम मंत्रियों ने उसका ह्रास किया है।भारतीय वीरों भारतीय संस्कृति और भारतीय धरोहर को इतिहास में कोई स्थान नहीं दिया गया ।जो अकबर कभी राणा प्रताप का प्रत्यक्ष सामना तक नहीं कर पाया ।उसको इन मुस्लिम इतिहासकारों ने अकबर महान बता दिया।यह भारत के इतिहास को बदलने की सोची समझी साजिश थी। जो कांग्रेस शासन में फलती फूलती रही। आपको ध्यान होगा ,जब सोमनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार हो रहा था तो नेहरु जी ने तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद जी को वहां जाने से मना किया था। उनकी इस मानसिकता ही बताती है कि वह कितने मुसलमान परस्त थे।
अब समय आ गया है ऐसी सारी इमारतों का शुद्धिकरण वह पुनरोद्धार कर भारतीय और हिंदू धर्म के प्रतीकों को पुन : जीवित किया जाए।
पंडित शिवकुमार शर्मा -आध्यात्मिक गुरु एवं ज्योतिष रत्न।
अध्यक्ष शिवशंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केंद्र गाजियाबाद।

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