ग्रहों के गुण,प्रवृत्ति और स्वभाव
*बुध ग्रह*
ज्योतिष शास्त्र में बुध को चंद्रमा का पुत्र माना गया है ।किंतु बुध चंद्रमा को शत्रु मानता है और चंद्रमा बुध को मित्र मानता है। चंद्रमा नपुंसक ग्रह ,द्विस्वभाव प्रवृत्ति का है। बुध का तत्व पृथ्वी है बुध की राशि मिथुन और कन्या है । बुध कन्या राशि के 15 से 20 अंशों के मध्य मूल त्रिकोण में माना गया है बुध की उच्च राशि कन्या होती है और
नीच राशि मीन होती है। बुध ग्रह अश्लेषा ,ज्येष्ठा और रेवती नक्षत्र का स्वामी है ।बुध अपने से सप्तम भाव को पूर्ण दृष्टि से देखता है ।बुध के मित्र ग्रह सूर्य शुक्र और राहु है।बुध चंद्रमा को शत्रु, मानता है। मंगल शनि और शुक्र बुध के सम ग्रह हैं। बुध तीव्र गति का ग्रह है, लगभग एक महीना एक राशि में रहता है। बुध सदैव सूर्य के आस पास ही रहता है। यह शुभ ग्रह और रजोगुणी है। बुध के देवता भगवान विष्णु है उत्तर दिशा का स्वामी है। कुंडली में अशुभ बुध होने से वाणी ,जिह्वा, और त्वचा रोग देता है । यह कुंडली में यदि पाप ग्रह के साथ बैठा हूं अथवा नीच राशि में हो या शत्रु ग्रहों के मध्य में बैठा हो तो उस व्यक्ति की वाणी में दोष होता है, वाचाल होता है,, त्वचा संबंधी बीमारी होती है। ऐसी अवस्था में बुध को प्रसन्न करने के लिए गाय को हरा चारा खिलाना चाहिए और नियमित रूप से गाय की सेवा करनी चाहिए।
बुध ग्रह विद्या ,बुद्धि ,वाणी, व्यापार और वाणिज्य कारक है। बुध के शुभ होने से व्यक्ति मैनेजमेंट गुरु अथवा सी ए होता है बैंकिंग,पत्रकारिता, कानून का ज्ञाता होता है। बुध को प्रसन्न करने से व्यापार में वृद्धि होती है। पद प्रतिष्ठा का लाभ होता है। समाज में अच्छे लोगों में गिनती होती है। इसलिए इन सब को चाहने वाला व्यक्ति अपनी बहन, बुआ, बेटी आदि का सम्मान करें। उनके सम्मान करने से हमारे व्यवसाय और कार्य क्षेत्र में बहुत ही वृद्धि होती है ।इसको मैंने प्रत्यक्ष अनुभव किया है ।वास्तु शास्त्र में भी बुध उत्तर दिशा का स्वामी है यदि यह दिशा वस्थान अच्छा एवं स्वच्छ है ,तो आपके घर में कभी भी धन की कमी नहीं आएगी।
पंडित शिवकुमार शर्मा आध्यात्मिक गुरु एवं ज्योतिष रत्न ।
अध्यक्ष _शिवशंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केंद्र गाजियाबाद
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