दिवाली से पहले खरीदारी के विशेष मुहूर्त शनि पुष्य, रवि पुष्य योग एवं सर्वार्थसिद्धि योग

27Oct
*दीपावली से पूर्व बन रहे हैं खरीदारी के विशेष योग*
*रवि पुष्य योग, गुरु पुष्य योग और शनि पुष्य योग का शास्त्रीय महत्व*
ज्योतिष में पुष्य नक्षत्र का बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है ।पुष्य नक्षत्र को पुष्टि वर्धक कहा गया है अर्थात पुष्ट कर आने वाला ।यह नक्षत्र विवाह कर्म को छोड़कर सभी कार्य में सर्वश्रेष्ठ होता है इसलिए व्यापारिक कार्य ,कोई नवीन वस्तु खरीदना, बेचना ,भूमि भवन क्रय विक्रय, मंत्र तंत्र जाप, सिद्धि आदि के लिए शुभ होता है ।रविवार,गुरु वार  और शनिवार को यह नक्षत्र विशेष फलदायक है ।
*गुरु पुष्य योग*
बृहस्पतिवार को पुष्य नक्षत्र होने से यह गुरु पुष्य योग बनता है। गुरु पुष्य योग अमृत योग कहलाता है। यह व्यापारिक कार्यों में सफलता दायक माना गया है। नया व्यापार करना, भूमि ,भवन खरीदना , बेचना,बयाना देना ,रजिस्ट्री कराना, किसी प्रकार के वाहन खरीदना, बेचना, व्यापारिक अनुबंध आदि के लिए यह योग बहुत ही सफलता दायक माना गया है। पुष्य नक्षत्र के स्वामी शनिदेव होते हैं। पुष्य नक्षत्र में जन्म होने से बुद्धिमान तेजस्वी और विलक्षण योगा वाला बनता है।
*रवि पुष्य योग*
गुरु पुष्य योग की भांति  रविपुष्य योग बहुत महत्वपूर्ण होता है ।रविवार को यदि पुष्य नक्षत्र आ जाए तो यह योग रवि पुष्य अमृत योग होता है विशेष रूप से ऐसा योग तंत्र, मंत्र ,यंत्र सिद्धि ,नग धारण, मंत्र जाप, असाध्य रोगों के लिए जड़ी-बूटी ग्रहण करने के लिए और श्रेष्ठ माना गया है।
रवि पुष्य योग में भी गुरु पुष्य की तरह व्यापारिक कार्य करने में सफलता मिलती है ।
*शनि पुष्य योग* 
उपरोक्त दोनों योगों के अलावा शनि पुष्य योग भी महत्वपूर्ण होता है । क्योंकि शनि पुष्य नक्षत्र का  ही स्वामी है । अपने दिन अपने नक्षत्र का स्वामी होने से शनि पुष्य योग का महत्व बढ़ जाता है ।जिन व्यक्तियों की कुंडली में शनि की ढैया ,साढेसती ,महादशा ,अंतर्दशा चल रही हो और उसका अशुभ प्रभाव पड़ रहा हो तो व्यक्ति के सामने कई प्रकार की समस्याएं जैसे आर्थिक, सामाजिक, पारिवारिक समस्याओं से जूझना पड़ता है। शनि पुष्य योग में शनि से मुक्ति का उपाय करना बहुत ही कारगर माना गया है।इस योग में शनि के विशेष मंत्रों का जाप ,नीलम धारण ,शनि का दान तुलादान ,छाया दान आदि फलदायक होते हैं । ऐसा माना गया कि शनि पुष्य योग में भवन निर्माण के लिए  नींव रखना  , गृह प्रवेश करना बहुत शुभ  है।स्थायी कार्यों के लिए शनि पुष्य योग बहुत ही शुभ होता है। जैसे गृह निर्माण।
पुष्य नक्षत्र के योग से बने हुए तीनों योग  ही सर्वश्रेष्ठ होते हैं । यद्यपि तीनों के अलग-अलग क्षेत्र हैं ।गुरु पुष्य योग व्यापारिक कार्य के लिए ।रवि पुष्य योग पूजा पाठ, मंत्र सिद्धि, तंत्र सिद्धि निर्धारण के लिए और शनि पुष्य योग शनि के उपायों को करने व गृह निर्माण संबंधी कार्यों के लिए श्रेष्ठ माना गया है । परन्तु तीनों योग में कोई भी कार्य आरंभ करने से सफलता की संभावनाएं अधिक होती है। चाहे वह व्यापारिक हो, चाहे वह घर संबंधी ,भवन संबंधी हो या तंत्र मंत्र सिद्धि की संबंधी। 
इस वर्ष के गुरु पुष्य योग, रवि पुष्य योग शनि पुष्य योग
 *शनि पुष्य योग* 
7 नवंबर 2020 प्रातः 8:04 से अगले सूर्योदय तक(6:43बजे)
*रवि पुष्य योग*
8 नवंबर 2020 प्रातः 6:44 से 8:44 बजे तक।
*गुरु पुष्य योग*
31 दिसंबर 2020 शाम 19:48 बजे से प्रातः सूर्योदय तक।
उपरोक्त खरीदारी के मुहूर्त के अलावा अन्य  मुहूर्त इस प्रकार हैं:
6 नवंबर ,13 नवंबर व 14 नवंबर (सर्वार्थ सिद्धि योग)
पंडित शिवकुमार शर्मा आध्यात्मिक गुरु एवं ज्योतिष रत्न 
अध्यक्ष -शिवशंकर ज्योतिष अनुसंधान केंद्र गाजियाबाद

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