*पितृ विसर्जन अमावस्या से एक महीने बाद शुरु होंगे नवरात्र*
*19वर्ष बाद आता है यह योग*
इस वर्ष संवत 2077 में आश्विन मास दोबार आएगा। भारतीय पंचांग के अनुसार जब कोई मास दो बार आता है ,उसे अधिक मास कहते हैं। अधिक मास में पहला पक्ष और चौथा पक्ष शुद्ध होता है। बीच के दोनों पक्ष अशुद्ध होते हैं। इसलिए इसको लौंद का महीना भी कहते हैं।
भारतीय पंचांग के अनुसार दो प्रकार के वर्ष प्रचलित है। सौर वर्ष और चान्द्र वर्ष । सौर वर्ष में 365 दिन 6 घंटे होते हैं तथा प्रत्येक 4 वर्ष में फरवरी का महीना 29 दिन का होता है, इसलिए उसे अधिवर्ष कहते हैं। इसी प्रकार चांन्द्र वर्ष में 354 दिन होते हैं तथा प्रत्येक वर्ष 11 दिन कम हो जाते हैं। इन्हीं 11 दिनों का समायोजन करने के लिए 32 माह 16 दिन और 8 घंटे के पश्चात एक मास दो बार आता है ,जिसे हम अधिक मास कहते हैं । यह पुरुषोत्तम मास कहलाता है। अधिक मास के बीच के दोनों पक्षों में शुभ कार्य वर्जित हैं ,जैसे विवाह, संस्कार, गृह प्रवेश आदि। अधिक मास में पूजा पाठ ,हरि नाम स्मरण ,मंत्र जाप, दान करना बहुत अच्छा होता है। कहते हैं इन दिनों में पूजा-पाठ अथवा दान करने का 10 गुना लाभ मिलता है।
सामान्य रूप से पितृ विसर्जन अमावस्या के बाद नवरात्र आरंभ हो जाते हैं किंतु बीच के दोनों पक्षों अर्थात 30 दिन अधिक मास के होने कारण उस मास में नवरात्रि नहीं होंगे। चौथे पक्ष में नवरात्र आरंभ होंगे। आश्विन मास का अधिक मास होना 19 वर्ष के बाद आता है ।इससे पहले यह सन 2001 में आया था और इसके बाद 2038 में आएगा इसी कारण इस बार नवरात्रि पितृ विसर्जन अमावस्या से एक महीना बाद आएंगे।
भारतीय कालगणना ग्रहों की सूक्ष्म गति पर आधारित है। इसीलिए कोई तिथि बढ़ जाती है। कोई तिथि कम हो जाती है और कोई महीना अधिक मास जाता है। कभी क्षय मास हो जाता है। वास्तव में हमारे प्राचीन ऋषि-मुनियों की खगोल शास्त्र की खोज बहुत महत्वपूर्ण है ।ग्रहों के परिपथ ,उनकी दूरियां और उनकी चलने की गति इन सब का ज्ञान हमारे ऋषि-मुनियों को था। तभी तो हमारी भारतीय संस्कृति पूरे विश्व में श्रेष्ठ है ।
पंडित शिवकुमार शर्मा ,अध्यक्ष- शिव शंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केंद्र गाजियाबाद
98 11 89 3069
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