वास्तु है सबके लिए (भाग -10)
*वायव्य दिशा के वास्तु का वैज्ञानिक विश्लेषण*
वास्तु शास्त्र के अनुसार इस दिशा का विस्तार 292 .5 अंशों से 337.5 अंशों तक होता है और इस दिशा इस दिशा के स्वामी वायु देव हैं और इसका आधिपत्य केतु के पास है। यह दिशा वायु प्रधान कार्यों वअस्थिर कार्यो के लिए अनुकूल है ।इस दिशा में कभी भी गृह स्वामी का कक्ष नहीं होना चाहिए अन्यथा वह घर से बाहर ही रहेगा। घुमक्कड़ प्रवृत्ति का होगा और मित्रों की संख्या अधिक होगी। इस दिशा में अतिथि कक्ष, ड्राइंग रूम, कुंवारी कन्या का कक्ष व रुग्ण कक्ष बनाना उचित रहता है ।अर्थात ड्राइंग रूम में जो मेहमान /गेस्ट आएगा शीघ्र जाएगा, यदि कन्या कुंवारी है तो उसका विवाह जल्दी होगा। यदि इस दिशा में रोगी को सुलाया जाए, उन्हें शीघ्र स्वास्थ्य लाभ होगा ।*वायव्ये पशु मन्दिरम्* इस सूक्ति के अनुसार इस स्थान पर पशुओं को रखने का स्थान ,गाड़ी की पार्किंग का स्थान ,गार्ड रूम आदि शुभ होते हैं।इस दिशा में कभी भी अपनी तिजोरी नहीं रखनी चाहिए।स्थायी प्रोपर्टी के कागज आभूषण इस दिशा में न रखें। इस दिशा में रखा हुआ धन शीघ्र खर्च हो जाएगा ।आप स्वयं प्रैक्टिकल करके देखें। मैं 30 वर्ष से लगातार वास्तु और ज्योतिष के विभिन्न पहलुओं एवं वैज्ञानिक अवधारणाओं पर स्वाध्याय , प्रत्यक्ष प्रैक्टिकल्स करके यह लेखमाला लिख पा रहा हूं।यदि प्लॉट में रसोई बनाने का स्थान अग्नि कोण में ना मिल रहा हो तो वायव्य में बना सकते हैं। क्योंकि भारत में अधिकतर उत्तर पश्चिम या पूर्वदक्षिणी हवा चलती है ।प्राचीन काल में मानसून आधार पर ही रसोई का निर्माण किया जाता था। ताकि धुंआ बाहर निकल जाए परन्तु आजकल घरों में रसोई घर में चिमनियां लगाने से उसका महत्व कम हो गया है।
वायव्य कोण रसोई का द्वितीय विकल्प है इस स्थान पर रसोई बनाने से गृहिणी का उत्तम स्वास्थ्य रहता है। वायव्य दिशा में शौचालय ,स्नानघर, स्टोर आदि भी बना सकते हैं वायव्य दिशा में वायु का अधिक प्रभाव रहता है इसलिए यहां पर अस्थिर चित्त वाले ,शंकालु लोग और राष्ट्रीय सुरक्षा में लगे हुए लोग का शयन स्थल नहीं होना चाहिए। इस दिशा में नव दंपत्ति का कक्ष भी नहीं होना चाहिए ।यहां रहने वाले व्यक्ति हमेशा अधिकतर घर से बाहर ही रहता है, चाहे अपने जॉब की वजह से ,व्यापार के कारण या अन्य कारणों से । इस दिशा में घर का मुख्य द्वार हो सकता है जिन व्यक्तियों का मूलांक आठ या पांच है उसके लिए यह दिशा शुभ मानी गई है। पश्चिम मुखी भवन में द्वार के लिए यह दिशा सर्वोत्तम मानी गई है।यह दिशा बीमार व्यक्तियों के लिए नवजीवन मानी गई है, कुंवारी कन्याओं के लिए शीघ्र विवाह कारक मानी गई है और मेहमानों के लिए शीघ्र निर्गमन की दिशा मानी गई है।
यदि किसी भवन में पालतु पशु कुत्ता, खरगोश आदि पाले जाते हैं तो उन्हें इसी दिशा में रखना उत्तम रहता है।
पंडित शिवकुमार शर्मा, आध्यात्मिक गुरु एवं ज्योतिष रत्न
अध्यक्ष -शिवशंकर ज्योतिष एवं वास्तु अनुसंधान केंद्र गाजियाबाद
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